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नवरात्रि के पहले दिन जबलपुर में हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल

जबलपुर। नवरात्रि के पहले ही दिन जब देशभर में मां दुर्गा के जयकारे गूंज रहे थे, तब शहर में गंगा-जमुनी तहज़ीब की अद्भुत झलक देखने को मिली। बुधवार सुबह मैहर माता के दर्शन के लिए पैदल यात्रा पर निकले करीब 30 उपवासी भक्तों का जत्था जब रद्दीचौकी से गुजर रहा था, तो मुस्लिम समुदाय के लोगों ने उनका खुले दिल से स्वागत किया।

मुस्लिम समुदाय ने किया सत्कार

स्थानीय मुस्लिम जनप्रतिनिधियों और युवाओं ने भक्तों को सादा भोजन, फल, और ठंडा पानी उपलब्ध कराया। चूंकि सभी यात्री व्रत पर थे, इसलिए उनके लिए खासतौर पर व्रत का भोजन तैयार किया गया। धूप से बचाने के लिए हर भक्त को केसरिया गमछा पहनाकर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर शहर कांग्रेस अल्पसंख्यक अध्यक्ष अशरफ मंसूरी और मोती लाल नेहरू वार्ड के पार्षद शफीक हीरा ने कहा, “आज मैं अपने हिंदू भाइयों की सेवा करने का हिस्सा बनकर गर्व महसूस कर रहा हूं। यही भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब है, जिसे हमें आगे बढ़ाना है।”

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मौन व्रतधारियों की अनोखी खुशी

भक्तों के इस जत्थे में पांच लोग ऐसे भी थे, जिन्होंने मौन व्रत रखा था। जब मुस्लिम समुदाय के लोग उनसे बात करने पहुंचे तो उन्होंने पेन और कागज़ पर अपने संदेश लिखकर अपनी खुशी जाहिर की।

मिलजुल कर बनी मिसाल

इस स्वागत कार्यक्रम में आबिद मंसूरी, इम्तियाज अंसारी और समीर खान शामिल रहे। वहीं हिंदू समुदाय से मंगेली ग्राम पंचायत के सचिव मिथलेश यादव, सुरेश दुबे, मनीष पटेल और नीरज अहिरवार ने इस पहल पर आभार व्यक्त किया।

भोजन और सत्कार के बाद जब भक्तों ने अपनी यात्रा दोबारा शुरू की तो माहौल में आपसी भाईचारे और सौहार्द का सुंदर संदेश गूंज रहा था। यह दृश्य साबित करता है कि नवरात्रि का असली उत्सव सिर्फ पूजा-पाठ नहीं, बल्कि इंसानियत और एकता का जश्न भी है।

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बाज़ मीडिया जबलपुर डेस्क 'जबलपुर बाज़' आपको जबलपुर से जुडी हर ज़रूरी खबर पहुँचाने के लिए समर्पित है.
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