खुले टैंक ने निगल ली दो जिंदगियां — जब सिस्टम सोया रहे, तो लापरवाही ही कातिल बन जाती है!

सेंट्रल डिवीज़न, बाज़ मीडिया,जबलपुर। मनमोहन नगर सामुदायिक अस्पताल परिसर में हुई दर्दनाक दुर्घटना ने पूरे जबलपुर को झकझोर कर रख दिया। रविवार की दोपहर खेलते-खेलते खुले सेप्टिक टैंक में गिरकर दो सगे भाइयों — विनायक (8) और कान्हा (10) की मौत ने हर दिल को रुला दिया। अस्पताल के उस कोने में, जहाँ बच्चों की खिलखिलाहट गूंजनी चाहिए थी, अब सन्नाटा पसरा है और दीवारें भी जैसे अपराधबोध से झुकी हुई हैं।
जब इन नन्हे मासूमो के शव सोमवार सुबह उनके पैतृक गांव देहरी खुर्द (कुंडम) पहुंचे, तो पूरा गांव उमड़ पड़ा। कोई मां अपने आंचल से आंसू पोंछ रही थी, कोई पिता सिर पकड़कर बैठा था।
मां के करुण विलाप से आसमान फट पड़ा —
“अभी तो स्कूल जाने की उम्र थी मेरे लालों की… इतनी जल्दी क्यों बुला लिया उन्हें”
गांव में हर आंख नम थी।
छोटे बच्चों ने अपने दोस्तों को फूलों से ढकी अर्थी पर लेटे देखा तो कई खुद भी सिसक पड़े।
अंतिम यात्रा के दौरान “विनायक अमर रहे” और “कान्हा अमर रहे” के नारे गूंजे, और फिर घाट पर चिता की लपटों के साथ पूरा गांव गम में डूब गया।

💔 लापरवाही का शिकार बने दो मासूम
घटना रविवार शाम करीब चार बजे की है।
दोनों भाई अस्पताल के बाहर क्रिकेट खेल रहे थे। गेंद अस्पताल परिसर में चली गई — मासूमों ने सोचा बस दो मिनट लगेंगे वापस लाने में। लेकिन जो खेल था, वही उनकी आखिरी दौड़ बन गया।
खुले सेप्टिक टैंक में पैर फिसला और दोनों उसमें जा गिरे। जब तक लोग दौड़े, बहुत देर हो चुकी थी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह टैंक पिछले 10 साल से खुला पड़ा था।
कई बार शिकायतें हुईं, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने इसे नजरअंदाज कर दिया।
“हमने कई बार कहा था कि टैंक ढकवाओ, बच्चे आते-जाते हैं… पर किसी ने ध्यान नहीं दिया,” — एक स्थानीय बुजुर्ग ने गुस्से और आंसुओं से भरी आवाज में कहा।
⚖️ प्रशासनिक एक्शन — पर सवाल अब भी बाकी
घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने ताबड़तोड़ एक्शन लिया है।
सफाई ठेकेदार गौरव पिल्लई को बर्खास्त कर दिया गया और चिकित्सा अधिकारी डॉ. अंशुल शुक्ला को हटाकर सीएमएचओ कार्यालय में अटैच किया गया है।
सीएमएचओ डॉ. संजय मिश्रा ने बताया कि “प्रथम दृष्टया लापरवाही साफ थी, इसलिए तत्काल कार्रवाई की गई है।”
लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि सिर्फ ठेकेदार हटाने से क्या बदल जाएगा?
“यह सिस्टम की सड़ी हुई जिम्मेदारी है, जो सिर्फ गरीब के बच्चों की जान पहचानती है,” — एक ग्रामीण ने कहा।
🔥 कांग्रेस का विरोध और सवाल
हादसे के बाद सोमवार को कांग्रेस नेताओं ने अस्पताल पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया।
नगर अध्यक्ष सौरभ शर्मा ने कहा —
“प्रशासन 4 लाख देकर चुप कराना चाहता है। ठेकेदार हटाना दिखावे की कार्रवाई है। अगर यह हादसा किसी रसूखदार के बच्चों के साथ हुआ होता, तो अब तक पूरा प्रशासन बदल दिया जाता।”
नेता प्रतिपक्ष अमरीष मिश्रा ने इसे “नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की साझा लापरवाही” बताया।
उन्होंने कहा कि “10 साल तक टैंक खुला रहा — ये सिर्फ ठेकेदार की गलती नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की नाकामी है।”
🌾 पिता की आंखों में सिर्फ सवाल
पिता राजेश विश्वकर्मा, जो त्रिमूर्ति नगर में मजदूरी करते हैं, अपने दोनों बेटों की तस्वीरों को सीने से लगाए बैठे हैं।
“हर रोज बच्चों से कहता था – खेलकर जल्दी आना… आज वो लौटे ही नहीं।”
उनके शब्द थम जाते हैं, पर आंखें अब भी पूछ रही हैं —
क्या गरीबों के बच्चों की जान इतनी सस्ती है कि वो एक ढक्कन की कीमत पर चली जाए?
इस हादसे ने जबलपुर को सिर्फ शोक में नहीं, शर्म में भी डुबो दिया है।
खुले टैंक में गिरकर हुई इन दो मासूमों की मौत हमें याद दिलाती है कि लापरवाही भी एक तरह की हत्या है — जो हर बार जिम्मेदारियों की दीवारों के पीछे छिप जाती है।



