
गोहलपुर डिवीज़न, बाज़ मीडिया, जबलपुर। शुक्रवार का दिन जबलपुर के मुस्लिम समाज के इतिहास में एक बेहद पीड़ादायक और शर्मनाक अध्याय के रूप में दर्ज हो गया, जब मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र के अंसार नगर चोपड़ा स्थित अंसार नगर नमाज़गाह को प्रशासनिक अधिकारियों ने सील कर दिया। भारी हंगामे और बढ़ते विवाद के बीच जुमे की नमाज़ अदा नहीं हो सकी, न असर की नमाज़ हुई और न ही मगरिब की। अल्लाह के घर में इबादत रुक गई और “हय्या अलस्सलाह” की सदा खामोश हो गई।

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि टकराव किसी बाहरी कारण से नहीं, बल्कि मुसलमानों के आपसी मतभेद की वजह से हुआ। हालात इतने बिगड़ गए कि उलेमा-ए-किराम (दोनों पक्षों के), जिनसे समाज को राह दिखाने और विवाद में सुलह कराने की उम्मीद थी, वे भी किसी ठोस मध्यस्थता के बजाय अपने – अपने फैसलों पर अड़े नजर आए। नतीजा यह निकला कि विवाद खूनखराबे तक पहुंचने लगा और प्रशासन को मजबूरन मस्जिद में ताला लगाकर उसे सील करना पड़ा।

विवाद क्या है…
प्राप्त जानकारी के अनुसार, हज़रत मौलवी रियाज़ आलम साहब दशकों से अंसार नगर नमाज़गाह अहले सुन्नत में इमामत करते रहे हैं। हर मकतब-ए-फ़िक्र के लोग उनके पीछे इत्मीनान और फख्र के साथ नमाज़ अदा करते रहे। हाल ही में लगातार गंभीर बिमारी के चलते बिगड़ती सेहत के चलते अस्थाई रूप से इमामत से हट गए। इसके बाद मस्जिद कमेटी द्वारा नए इमाम की नियुक्ति की गई, यहीं से विवाद की शुरुआत हुई।
एक पक्ष ने मसलकी इख्तिलाफ अकीदे का हवाला देते हुए नए इमाम का विरोध किया। बीते जुमे को जब नए इमाम साहब मिम्बर पर खड़े हुए, तब भी विवाद हुआ। हालांकि उस दिन किसी तरह मामला शांत कर दिया गया। जिसके बाद पूरे हफ्ते नए इमाम साहब ने नमाज अदा कराइ। लेकिन अंदरखाने तनाव बना रहा।

जुमे के दिन हालात बेकाबू
आज शुक्रवार को यह विवाद पूरी तैयारी के साथ सामने आया। मकामी लोगों के साथ साथ, शहर के अलग-अलग इलाकों से बड़ी संख्या में लोग अंसार नगर नमाज़ गाह पहुंचे। इसके बाद विरोध, नारेबाज़ी और बहस ने जल्द ही हाथापाई का रूप ले लिया।
मामला बिगड़ता देख पुलिस बल को बुलाया गया। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मस्जिद के भीतर जाकर दोनों पक्षों को समझाने की कोशिश की, लेकिन कोई भी पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं हुआ।
हालात बिगड़ते देख मौके पर पहुंचे एसडीएम पंकज मिश्रा ने दोनों पक्षों को समझाइश दी, लेकिन विवाद शांत न होने पर एहतियातन मस्जिद के गेटों पर ताला लगवाकर प्रशासनिक सील लगा दी गई।

एसडीएम का कहना है कि यह कदम केवल शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया है, ताकि कोई अप्रिय स्थिति न बने। दोनों पक्षों को थाने बुलाकर बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है, और विवाद सुलझते ही मस्जिद को खोल दिया जाएगा।
समाज के सामने सवाल
इस कार्रवाई के बाद जुमे की नमाज़ नहीं हो सकी, असर और मगरिब की नमाज़ भी अदा नहीं हुई। अंसार नगर नमाज़गाह अब सील है और यह सवाल पूरे मुस्लिम समाज के सामने खड़ा है कि आखिर कब फिर से इस मस्जिद में अज़ान की आवाज़ गूंजेगी और नमाज़ अदा की जा सकेगी…
यह घटना न सिर्फ जबलपुर मुस्लिम समाज बल्कि पूरे देश के मुस्लिम समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि आपसी मतभेद, जिद और संवाद की कमी किस तरह इबादतगाहों तक को तालों के पीछे धकेल सकती है।
आज जरूरत इस बात की है कि समाज के जिम्मेदार लोग, उलेमा-ए-किराम मस्जिद कमिटी और मुकामी मुसल्लियान मिलकर हालात की समीक्षा करें, आपसी बातचीत का रास्ता निकालें और अल्लाह के घर को फिर से इबादत के लिए खोलने की पहल करें।
क्योंकि मस्जिदें ताले के लिए नहीं, सजदे के लिए होती हैं — और अगर इबादतगाहें ही बंद होने लगें, तो यह पूरे समाज की हार मानी जाएगी।



