
फॉलो-अप रिपोर्ट | Gohalpur Division, Baz Media
जबलपुर। जबलपुर मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र के पत्थर फोड़ मस्जिद एरिया में रहने वाले परीवार के साथ कुंडम थाना क्षेत्र के ग्राम जैतपुरी के पास गुरुवार को हुआ दर्दनाक सड़क हादसा लोगों के दिलों में डर और अफसोस छोड़ गया है।
अस्पतालों में भर्ती मासूम बच्चे, बदहवास मां-बाप और आंखों देखे गवाह एक ही बात दोहरा रहे हैं—यह हादसा कुदरत की मार नहीं, बल्कि इंसानी लापरवाही का नतीजा था।
माल ढोने के लिए बने पिकअप वाहन में 15-20 लोगों को बैठाकर पिकनिक पर निकलना, खुलेआम अपनी और अपने बच्चों की जान दांव पर लगाने जैसा था। नतीजा वही हुआ जिसका डर था—एक नौजवान की दर्दनाक मौत, 3 मासूम बच्चे और एक महिला जिंदगी-मौत से जूझ रहे हैं, जबकि कुल 20 लोग घायल बताए जा रहे हैं, जिनमें 9 बच्चे शामिल हैं।
क्या हुआ था जैतपुरी में
नए साल के जश्न के बीच गुरुवार सुबह करीब 11 बजे मुस्लिम बाहुल्य पत्थरफोड़ क्षेत्र का एक परिवार पिकनिक मनाने निकला था। सभी लोग महिंद्रा बोलेरो पिकअप मालवाहक वाहन (एमपी-20 जीए-9127) में सवार थे। कुंडम के पास जैतपुरी के समीप तेज रफ्तार और अधिक वजन के कारण वाहन अनियंत्रित हो गया। असंतुलन के चलते पिकअप कुछ दूरी तक सड़क पर घिसटती चली गई और पलट गई।


हादसा इतना भीषण था कि बच्चे, महिलाएं और नौजवान सड़क पर जा गिरे। कुछ लोग वाहन के नीचे दब गए। मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने इंसानियत दिखाते हुए बड़ी मशक्कत से घायलों को बाहर निकाला। सूचना मिलते ही कुंडम थाना पुलिस मौके पर पहुंची, घायलों को जिला अस्पताल और मेट्रो अस्पताल भिजवाया गया और वाहन जब्त किया गया।
आज की हालत: जख्म गहरे हैं
शुक्रवार को अस्पताल सूत्रों के मुताबिक अधिकांश घायलों की हालत स्थिर बताई जा रही है। परिजनों की आंखों में दर्द साफ दिखता है—“काश, सही गाड़ी चुनी होती… काश, बच्चों को उस पिकअप में न बैठाया होता।”
पिकअप माल के लिए है, इंसानों के लिए नहीं
यह बात बार-बार इसलिए दोहरानी पड़ रही है क्योंकि समाज में इसे हल्के में लिया जा रहा है। पिकअप, छोटा हाथी आदि एक लोडिंग वाहन है, सवारी वाहन नहीं—
- इसे सामान ढोने के हिसाब से डिजाइन किया गया है।
- इसमें यात्रियों के लिए सीट, सेफ्टी बेल्ट या पकड़ने की कोई सुरक्षित व्यवस्था नहीं होती।
- मोड़ पर संतुलन बिगड़ने का खतरा कई गुना ज्यादा होता है।
- अचानक ब्रेक लगने पर लोग एक-दूसरे पर गिरते हैं और कुचल जाते हैं।

इसके बावजूद थोड़े से पैसे बचाने या “चल जाएगा” वाली सोच के चलते बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को भी ऐसे वाहनों में बैठा दिया जाता है। यह न सिर्फ कानूनन अपराध है, बल्कि सीधी-सीधी मौत को दावत है।
यह खबर नहीं, एक सख्त चेतावनी है
जैतपुरी का हादसा सिर्फ एक न्यूज नहीं, बल्कि एक अलार्म है—खासकर हमारे समाज के लिए।
खुदा के वास्ते अपनी जानों पर रहम करो।
थोड़ी सी सहूलियत के लिए अपनी औलादों की जिंदगी दांव पर मत लगाओ। लोडिंग वाहन में इंसानों को बोरियों की तरह भरना बंद करो।
प्रशासन और समाज—दोनों जिम्मेदार
पुलिस ने वाहन जब्त कर कार्रवाई शुरू कर दी है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यही काफी है? जरूरत है—
- नियमित और सख्त वाहन जांच की।
- गांव-कस्बों और मुस्लिम बस्तियों में जागरूकता अभियान चलाने की।
- वाहन मालिकों और चालकों की जिम्मेदारी तय करने की।
आखिर में एक दर्द भरी अपील
इस्लाम हमें सिखाता है कि जान की हिफाजत सबसे बड़ा फर्ज है। इंसान भेड़-बकरी नहीं हैं कि उन्हें मालवाहक में भर दिया जाए। अगर आज हमने सबक नहीं लिया, तो कल किसी और घर का चिराग बुझ सकता है।
आज सावधान नहीं हुए, तो कल पछताने का मौका भी नहीं मिलेगा।



