
रिपोर्ट : सैफ मंसूरी, बाज़ मीडिया, जबलपुर।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 गरीब और कमजोर तबके के बच्चों के लिए उम्मीद की किरण बनकर आया था। इस कानून के तहत प्राइवेट स्कूलों में 25 फीसदी सीटें मुफ्त दी जाती हैं. इन 25 फीसद सीटों की पूरी फीस सरकार भरती है। यह पैसा बच्चों का हक है, उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए तय है। मगर जबलपुर में हाल ही में सामने आया मामला यह दिखाता है कि कुछ स्कूल संचालक और जिम्मेदार अधिकारी इस हक को अपने लालच के लिए हड़प रहे हैं।
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने जबलपुर के छह प्राइवेट स्कूलों के मालिकों और नोडल अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आरोप है कि इन स्कूलों ने गरीब और कमजोर वर्ग के 628 बच्चों के नाम पर फर्जी एडमिशन दिखाकर 26.50 लाख रुपये हड़प लिए।
शिकायतकर्ता विजयकांति पटेल की शिकायत के बाद ईओडब्लयू ने जांच शुरु की. ईओडब्लयू अधिकारियों ने बताया कि गरीब और कमजोर बच्चों को निशुल्क प्रवेश दिलाने और फीस प्रतिपूर्ति के लिए यह व्यवस्था बनाई गई थी। लेकिन जांच में पता चला कि इन छह स्कूलों ने अपने फायदे के लिए नियमों का उल्लंघन किया और शासन को नुकसान पहुंचाया।
यह सिर्फ आर्थिक धोखाधड़ी का मामला नहीं है, बल्कि उन गरीब बच्चों के हक की लूट का दर्दनाक सच है, जिनकी पढ़ाई और भविष्य पर ग्रहण लग गया।
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साठगांठ से सरकारी खजाने में सेंध
EOW की जांच में खुलासा हुआ कि यह पूरा खेल वर्ष 2011 से 2016 के बीच खेला गया। स्कूल संचालकों ने सरकारी प्रतिपूर्ति राशि (Reimbursement) हड़पने के लिए कमजोर आय वर्ग की सीटों पर फर्जीवाड़ा किया। हैरान करने वाली बात यह है कि रिकॉर्ड में एक ही छात्र का दो से तीन बार प्रवेश दर्शाया गया, ताकि सरकार से अधिक पैसा वसूला जा सके।
नोडल अधिकारियों की मिलीभगत ……..
जांच में यह भी सामने आया कि शिक्षा विभाग के नोडल अधिकारियों ने भी अपने पद का गलत इस्तेमाल किया। उन्होंने फर्जी एडमिशन का सत्यापन नहीं किया और स्कूल संचालकों के साथ मिलकर योजना की राशि का गबन करने में मदद की।

स्कूलों और संचालक के नाम जिनपर एफआईआर दर्ज हुई…
स्मिता चिल्ड्रन एकेडमी – मनीष असाटी
आदर्श ज्ञान सागर (मदरसा सलाहुद्दीन अय्यूबी के पास) – नसरीन बेगम
गुरू पब्लिक स्कूल – मो. तौसीफ
उस्मानिया मिडिल स्कूल – मो. शमीम
सेंट अब्राहम स्कूल – मोहम्मद शफीक
शिक्षा विभाग के इन अधिकारिया पर एफआईआर
श्रीमती चंदा कोष्टा
श्रीमती गुलनिगार खानम
श्रीमती अख्तर बेगम अंसारी
श्री राजेन्द्र बुधेलिया
श्री डी.के. मेहरा
इन पर भारतीय दंड संहिता की धाराओं 409 (विश्वासघात), 420 (धोखाधड़ी), 120B (साजिश) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7(C) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
बच्चों का हक गया बर्बाद
हर फर्जी एडमिशन का मतलब था कि कोई मासूम बच्चा, जो पढ़ाई का हकदार था, वह वंचित रह गया। गरीब बच्चों की किताबें, स्कूल का सपना और तालीम—सब इन लोगों की लालच के आगे कुर्बान हो गए।
EOW ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का एलान किया है। मगर सवाल यही है कि उन मासूम बच्चों के खोए हुए हक की भरपाई कब होगी।



