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सूडान बना खुली कब्रगाह! खार्तूम में मिलीं दो सामूहिक कब्रें, हजारों लाशें—RSF पर अत्याचार के आरोप, अंतरराष्ट्रीय जाँच तेज़

बाज इंटरनेशनल डेस्क। सूडान में जारी खूनी संघर्ष ने एक बार फिर मानवता को झकझोर देने वाली सच्चाई उजागर कर दी है। राजधानी खार्तूम में दो विशाल सामूहिक कब्रों की खोज हुई है, जिनमें हजारों लोगों के अवशेष पाए गए हैं। यह खुलासा सूडान में रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) द्वारा कथित अत्याचारों और युद्ध अपराधों की भयावह तस्वीर पेश करता है।

अनादोलू एजेंसी के मुताबिक, ये सामूहिक कब्रें खार्तूम के अल-रियाद इलाके में ओबैद खातिम स्ट्रीट के पास मिलीं। कब्रों में शवों को किसी भी धार्मिक या मानवीय नियम के बिना, बेतरतीब ढंग से दफनाया गया था। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि जिन इमारतों के आसपास ये कब्रें मिली हैं, उन पर पहले RSF का कब्ज़ा था और वे इमारतें कमांड सेंटर और हिरासत स्थल के तौर पर इस्तेमाल की जाती थीं।

हिरासत, यातनाएँ और सामूहिक हत्या

चश्मदीदों और स्थानीय गवाहों के बयान इस खोज को और भी भयावह बना देते हैं। गवाहों के अनुसार, इन ठिकानों पर नागरिकों और सैन्य कर्मियों को हिरासत में रखकर यातनाएँ दी गईं और बाद में मार डाला गया। मृतकों के शवों को अन्य कैदियों से ही उठवाया गया और खुदाई करने वाली मशीनों से खोदे गए गड्ढों में फेंक दिया गया

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कब्रों के आसपास बड़ी संख्या में चप्पलें, जूते और निजी सामान बिखरे हुए मिले हैं, जो इस बात की ओर इशारा करते हैं कि पीड़ितों को अचानक, बिना किसी तैयारी या पहचान के, मौत के घाट उतारा गया।

देरी से जाँच पर सरकार का जवाब

सूडान की अटॉर्नी जनरल इंतिसार अहमद अब्देल आल ने जाँच में देरी को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इसकी सबसे बड़ी वजह पीड़ितों की भारी संख्या है। उन्होंने बताया कि शवों को बाहर निकालने और इंटरनेशनल कमेटी ऑफ द रेड क्रॉस (ICRC) के साथ समन्वय में उन्हें सम्मानजनक कब्रिस्तानों में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया जारी है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि समस्या केवल संसाधनों की कमी नहीं है, बल्कि लाशों की संख्या इतनी अधिक है कि पहचान और स्थानांतरण एक बेहद जटिल कार्य बन गया है। अब्देल आल ने यह भी स्वीकार किया कि सामूहिक कब्रें केवल खार्तूम तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वाड मदनी और मध्य सूडान के कई इलाकों में भी ऐसे ही भयावह स्थल सामने आ चुके हैं।


एल-फाशेर में युद्ध अपराध: ICC का ऐतिहासिक निर्धारण

सूडान संकट के बीच एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) ने औपचारिक रूप से यह तय किया है कि RSF ने पश्चिमी सूडान के एल-फाशेर शहर में युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध किए

ICC की डिप्टी प्रॉसिक्यूटर नज़हत शमीम खान ने 18-19 जनवरी 2026 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को दी गई ब्रीफिंग में वीडियो फुटेज, ऑडियो रिकॉर्डिंग और सैटेलाइट इमेजरी सहित ठोस सबूत पेश किए। इन दस्तावेज़ों से यह सामने आया कि अक्टूबर 2025 में एल-फाशेर पर कब्ज़े के बाद RSF बलों ने

  • जातीय आधार पर लक्षित हत्याएँ,
  • व्यवस्थित यौन हिंसा,
  • मनमानी हिरासत,
  • और बड़े पैमाने पर शव छिपाने के अभियान चलाए।

यह आकलन अप्रैल 2023 से शुरू हुए सूडानी युद्ध के दौरान किए गए अपराधों पर ICC का पहला औपचारिक निर्धारण है।

18 महीने की घेराबंदी और अकाल जैसी स्थिति

एल-फाशेर ने RSF के कब्ज़े से पहले 18 महीनों की लंबी घेराबंदी झेली। सैटेलाइट विश्लेषण में सामने आया कि शहर के चारों ओर 57 किलोमीटर लंबी मिट्टी की दीवार बनाई गई थी, जिसने लगभग 2.5 लाख नागरिकों तक भोजन, पानी और मेडिकल सप्लाई को व्यवस्थित रूप से रोक दिया। सितंबर 2025 तक हालात अकाल जैसे हो चुके थे।

शहर पर कब्ज़े के बाद, गवर्नर मिन्नी मिन्नावी ने दावा किया कि सिर्फ पहले तीन दिनों में 27,000 लोग मारे गए। वहीं, येल ह्यूमैनिटेरियन रिसर्च लैब के सैटेलाइट विश्लेषण में नवंबर 2025 तक शहर के सात प्रमुख बाज़ारों में किसी भी गतिविधि के संकेत नहीं मिले, जो बड़े पैमाने पर आबादी के समाप्त हो जाने की ओर इशारा करता है।

सूडान: एक चलती-फिरती कब्रगाह

खार्तूम की सामूहिक कब्रों से लेकर एल-फाशेर में सामने आए युद्ध अपराधों तक, सूडान आज एक ऐसे मानवीय संकट से गुजर रहा है जिसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है। हजारों बेगुनाहों की लाशें, उजड़े शहर और भूख से जूझती आबादी — यह सब अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक कड़ा सवाल है।

अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि दुनिया कब और कैसे हस्तक्षेप करती है, और क्या इन अपराधों के जिम्मेदारों को कभी इंसाफ के कटघरे तक लाया जा सकेगा या नहीं।

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