
गोहलपुर डिवीज़न, बाज़ मीडिया, जबलपुर। कभी नाम का “आज़ाद” लेकिन हकीकत में ताले और कब्जों में कैद रहा डॉ. ज़ाकिर हुसैन वार्ड का आज़ाद बाग अब सचमुच आज़ाद हो गया है। बीते एक-दो दशकों से यह बाग कुछ क्षेत्रीय लोगों के अघोषित कब्ज़े में था। आम जनता के लिए इसके गेट पर हमेशा ताला लटका रहता था और अंदर जाने की इजाज़त सिर्फ चुनिंदा लोगों तक सीमित थी।
मोहल्ले के बच्चे बाहर सड़कों पर खेलते रहे, बुजुर्ग टहलने के लिए तरसते रहे, लेकिन बाग आम लोगों की पहुंच से दूर रहा। ऐसे में वर्षों के इंतज़ार और शिकायतों के बाद अब उम्मीद की किरण जगी है।
जीर्णोद्धार के बाद जनता को समर्पित
शुक्रवार को आज़ाद बाग का जीर्णोद्धार कर भव्य समारोह में जनता को समर्पित कर दिया गया। क्षेत्रीय पार्षद मुकीमा अंसारी के प्रयासों, नगर निगम के सहयोग और विधायक लखन घनघोरिया की पहल से बाग को नया रूप दिया गया है।
अब यहां बच्चों के झूले, बैठने की बेंच, साफ-सुथरी पाथवे, हरियाली और मनोरंजन की सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे यह बाग पूरे इलाके के लिए राहत और सुकून का केंद्र बनेगा।

गरिमामय लोकार्पण समारोह
लोकार्पण कार्यक्रम में महापौर जगत बहादुर सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि विधायक लखन घनघोरिया ने अध्यक्षता की।
विशिष्ट अतिथियों में जेडीए के पूर्व उपाध्यक्ष कदीर सोनी, नेता प्रतिपक्ष अमरीश मिश्रा, नगर कांग्रेस अध्यक्ष सौरभ शर्मा, याक़ूब अंसारी, अल्पसंख्यक विभाग शहर कांग्रेस अध्यक्ष अशरफ मंसूरी समेत कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
पार्षद वकील अंसारी, गुलाम हुसैन, अयोध्या तिवारी, अख्तर अंसारी, गुड्डू नबी, कलीम खान, सरदार हाजी अब्दुल हकीम बाबा और सरदार अयाज राईन सहित बड़ी संख्या में लोगों ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। भारी जनसमूह की मौजूदगी में पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला।
“अब बच्चों की हंसी गूंजेगी” – जनता की प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सिर्फ एक बाग का उद्घाटन नहीं, बल्कि मोहल्ले के हक की वापसी है।
अब बुजुर्ग सुबह-शाम टहल सकेंगे, बच्चे सुरक्षित माहौल में खेल सकेंगे और महिलाएं खुली हवा में समय बिता सकेंगी।
पार्षद ने जताया आभार
इस मौके पर पार्षद मुकीमा अंसारी ने नगर निगम, विधायक और सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि क्षेत्र की जनता की सुविधाओं के लिए वे आगे भी लगातार काम करते रहेंगे।
एडिटोरियल नोट (बाज़ मीडिया)
किसी भी बस्ती का पार्क सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं होता, वह उस समाज की सांस लेने की जगह होता है। आज़ाद बाग का सचमुच “आज़ाद” होना इस बात का सबूत है कि अगर जनप्रतिनिधि चाहें तो वर्षों पुरानी बंदिशें भी टूट सकती हैं। अब जिम्मेदारी जनता की है कि इस बाग को संभालकर रखे और इसे हमेशा खुला, सुरक्षित और जीवंत बनाए रखे।



