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राहत: 5 साल बाद खुला ठक्करग्राम का अस्पताल: 2019 में भूमिपूजन, 2026 में उद्घाटन… संघर्ष के बाद मिली स्वास्थ्य की सौगात

सैफ मंसूरी, बाज मीडिया, रजा चौक डिवीजन। ठक्करग्राम वार्ड के लोगों के लिए बीता शनिवार किसी त्योहार से कम नहीं रहा। लगभग पांच साल के लंबे इंतज़ार, नाराज़गी और आंदोलन के बाद आखिरकार इलाके को शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की सौगात मिल ही गई।

जिस अस्पताल की बुनियाद 2019 में रखी गई थी, जिसका निर्माण 2022 में पूरा हो गया था, वह 2026 तक ताले में बंद रहा। लेकिन अब यह केंद्र आम जनता के इलाज के लिए खोल दिया गया है।

स्वास्थ्य केंद्र का लोकार्पण विधायक लखन घनघोरिया द्वारा किया गया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार उनकी प्राथमिकता में शामिल हैं और आने वाले समय में इस केंद्र को और अधिक सुविधायुक्त बनाया जाएगा।

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स्थानीय पार्षद गुलाम हुसैन ने बताया कि यहां लीवर, किडनी, कैंसर, टीबी जैसी गंभीर बीमारियों की जांच, नवजात शिशुओं की देखभाल और नाक-कान-गला संबंधी जांच की सुविधा भी निःशुल्क उपलब्ध होगी।

इस अवसर पर हाजी कदीर सोनी जी, पार्षद गुड्डू नबी, सैयद ताहिर अली, पार्षद अखतर अंसारी, याकूब अंसारी, हाजी ताहिर, शहीद मंसूरी, मो. फिरदौस, अशरफ मंसूरी, आबिद मंसूरी, गुलाम जीलानी, महबूब अंसारी, फजल सरदार, भोला यासीन, कदीर अंसारी, टीपु सुल्तान, शाहरूख, रिन्कू शमीम ठेकेदार, यूसुफ मुल्लाजी, वहीद भाई आदि उपस्थित थे।

भूमिपूजन से खंडहर बनने तक… एक अधूरी कहानी

इस स्वास्थ्य केंद्र को तत्कालीन कमलनाथ सरकार के समय स्वीकृति मिली थी और 2019 में भूमिपूजन हुआ। 2022 में भवन बनकर तैयार भी हो गया, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि इसे आम जनता के लिए शुरू नहीं किया गया।

धीरे-धीरे यह अस्पताल खंडहर में तब्दील होने लगा।
यहां अवैध पार्किंग होने लगी, नशेड़ियों का अड्डा बन गया, आवारा कुत्तों ने डेरा जमा लिया।
हालात इतने खराब हो गए कि शाम ढलने के बाद लोग अस्पताल के सामने से गुजरने तक से डरने लगे।

तीन साल तक तैयार भवन के बंद रहने से लोगों में जनप्रतिनिधियों, स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे और यहीं से अस्पताल शुरू कराने की मांग जन आंदोलन में बदल गई।

आंदोलन ने पकड़ी रफ्तार

बंद पड़े अस्पताल को चालू कराने की लड़ाई में जबलपुर AIMIM (मजलिस) ने भी प्रयास किए।
निगम से लेकर स्वास्थ्य विभाग तक ज्ञापन, प्रदर्शन और लगातार आंदोलन किए गए।

पूर्व वार्ड अध्यक्ष अरमान नूरी ने बताया कि
“2022 में भवन बनकर तैयार था, लेकिन उसे चालू करने की मांग को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की चुप्पी से विभाग की लापरवाही बढ़ी। हमने भी जनता के साथ मिलकर आंदोलन किया।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि देरी के कारण अस्पताल में रखी कई दवाइयां एक्सपायर तक हो गईं, जो समय पर शुरू होता तो गरीबों के काम आ सकती थीं।

जनता बोली – ‘देर आए, दुरुस्त आए’

उद्घाटन के बाद इलाके में खुशी का माहौल देखने को मिला।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अब छोटी-मोटी बीमारी के लिए दूर भटकना नहीं पड़ेगा। प्राथमिक इलाज, जांच और दवाइयां अपने ही वार्ड में निःशुल्क मिलेंगी।

हालांकि लोगों ने यह भी माना कि अगर अस्पताल समय पर शुरू हो जाता तो यह राहत पहले ही मिल सकती थी।

बाज़ मीडिया एडिटोरियल

सरकारी योजनाएं बनना अच्छी बात है, लेकिन असली सफलता तब है जब उनका फायदा समय पर जनता तक पहुंचे। ठक्करग्राम का यह अस्पताल याद दिलाता है कि सिर्फ इमारत खड़ी कर देना काफी नहीं, उसे चालू रखना और जिम्मेदारी निभाना ज्यादा जरूरी है।

फिलहाल राहत की बात यह है कि लंबा इंतज़ार खत्म हुआ और अब यह अस्पताल सचमुच जनता के काम आएगा।

Saif Mansoori

सैफ मंसूरी जबलपुर के युवा पत्रकार हैं। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में पत्रकारिता में शोधकर्ता हैं। वर्तमान में बाज़ मीडिया में डेस्क रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। राष्ट्रीय राजनीति में विशेष रुचि है।
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