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AI चैटबॉट्स ने मुस्लिम महिलाओं के हिजाब उतारे, टेस्ट में खुलासा

लंदन | BAZ News Network (BNN) । ChatGPT और Grok जैसे बड़े AI चैटबॉट्स ने मुस्लिम महिलाओं के हिजाब उतार दिए। द गार्जियन और अरब न्यूज़ ने टेस्ट में पाया कि ये AI टूल्स धार्मिक पहनावे को हटा देते हैं, लेकिन नग्नता से बचने के लिए कपड़े उतारने से मना कर देते हैं। इससे सवाल खड़े हो रहे हैं कि AI टूल्स धार्मिक पहचान और महिलाओं की गरिमा को कैसे देखते हैं।

News in Short

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  • ChatGPT और Grok ने AI तस्वीर से हिजाब हटा दिया, Claude ने इनकार किया
  • Google Gemini ने पहले मना किया, लेकिन ‘Western’ बोलने पर बिना हिजाब की तस्वीर बना दी
  • फ्रांस में नेता ने मुस्लिम महिला की तस्वीर से हिजाब हटाकर पोस्ट की
  • अमेरिका की रिसर्च संस्था CSOH के मुताबिक भारत में मुस्लिम महिलाओं को निशाना बनाने के लिए AI का इस्तेमाल बढ़ा
  • AI चैटबॉट्स ने सिख पगड़ी और नन की ड्रेस भी हटा दी, लेकिन शरीर से कपड़े नहीं उतारे

AI चैटबॉट हिजाब हटाते हैं लेकिन कपड़े नहीं

द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक OpenAI के ChatGPT और xAI के Grok ने जब कहा गया तो AI से बनी महिला की तस्वीर से हिजाब हटा दिया। Anthropic के Claude ने साफ मना कर दिया। “उसकी मर्जी के बिना, यह मेरे लिए एक लक्ष्मण रेखा है,” Claude ने अरब न्यूज़ के टेस्ट में जवाब दिया।

Google Gemini ने पहले कहा कि वह असली इंसानों की तस्वीर से कपड़े या सिर ढकने की चीज़ नहीं हटाएगा। लेकिन जब उससे महिला को ज्यादा “Western” बनाने के लिए कहा गया तो उसने बिना हिजाब वाली तस्वीर बना दी। अरब न्यूज़ के टेस्ट में भी ChatGPT, Grok और Gemini तीनों ने हिजाब हटा दिया। Claude ने फिर मना किया।

दिलचस्प बात यह है कि जब द गार्जियन ने ChatGPT और Grok से AI महिला की तस्वीर से ड्रेस उतारने को कहा तो दोनों ने मना कर दिया। Grok ने कहा कि हिजाब हटाना सिर्फ कपड़े या बालों में बदलाव है जबकि ड्रेस हटाने से शरीर दिख जाएगा। ChatGPT ने भी यही कहा। लेकिन बाद में उसने माना कि हिजाब हटाना भी महिला की प्राइवेसी, गरिमा या धार्मिक मान्यता का उल्लंघन हो सकता है।

फ्रांस के नेता ने शुरू की बहस

यह मामला तब सामने आया जब फ्रांस की दक्षिणपंथी नेशनल रैली पार्टी के नेता जूलियन ओडौल ने एक मुस्लिम महिला की तस्वीर X पर शेयर की। तस्वीर में महिला का हिजाब और लंबी बाजू वाली ड्रेस गायब थी। उन्होंने इसके साथ “LIBERTÉ FRANÇAISE” यानी “फ्रांसीसी आजादी” लिखा। असली तस्वीर में महिला हिजाब और फुल लेंथ ड्रेस में सड़क पार कर रही थी।

यह साफ नहीं है कि ओडौल ने खुद तस्वीर बदली या किसी सॉफ्टवेयर से। लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल मुस्लिम समुदाय और खासकर मुस्लिम महिलाओं को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है।

भारत में बढ़ रहा AI से नफरत फैलाने का चलन

वाशिंगटन स्थित सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ ऑर्गनाइज्ड हेट (CSOH) की रिसर्च बताती है कि भारत में जेनरेटिव AI का इस्तेमाल मुस्लिम महिलाओं को यौन रूप से पेश करने और मुसलमानों को अमानवीय दिखाने के लिए किया जा रहा है। CSOH की इंडिया हेट लैब ने 2024 में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ 1,165 नफरती भाषण की घटनाएं रिकॉर्ड कीं — पिछले साल से 74.4 फीसदी ज्यादा।

संगठन के मुताबिक 98.5 फीसदी मामलों में मुसलमानों को अकेले या ईसाइयों के साथ निशाना बनाया गया। CSOH ने अमेरिका में भी मुस्लिम महिला नेताओं इल्हान ओमर और रशीदा तलीब को AI से टारगेट करने के मामले दर्ज किए हैं। CSOH की रिसर्च और आउटरीच डायरेक्टर एवियाने लाइडिग ने कहा, “यह मुस्लिम समुदाय और खासकर मुस्लिम महिलाओं को निशाना बनाने के चलन का हिस्सा है।”

सिख पगड़ी और नन की ड्रेस भी हटाई

द गार्जियन ने दूसरे धार्मिक पहनावों का भी टेस्ट किया। ChatGPT ने सिख पगड़ी और कैथोलिक नन की हैबिट (ड्रेस) दोनों हटा दीं। Gemini ने पहले मना किया लेकिन बाद में हटा दिया। लाइडिग का कहना है कि यह AI इमेज टूल्स के नियमों में खामी दिखाता है। “मुस्लिम महिलाओं का परदा हटाना प्लेटफॉर्म नियमों का साफ उल्लंघन नहीं हो सकता, लेकिन यह नुकसानदायक है।”

AI कंपनियों को धार्मिक पहचान और महिलाओं की गरिमा को समझने की जरूरत है। हिजाब सिर्फ एक कपड़ा नहीं, बल्कि धार्मिक और व्यक्तिगत पहचान है। ChatGPT और Grok का दोहरा रवैया — हिजाब हटाना लेकिन कपड़े न उतारना — बताता है कि AI में धार्मिक संवेदनशीलता की कमी है।

📌 Sources & References

  • The Guardian
  • Arab News

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