जबलपुर के ’37 हज यात्रियों से धोखाधड़ी’ करने वाले आरोपी को 07 साल की सजा और जुर्माना

जबलपुर, 1 दिसंबर 2024: एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें हज यात्रा के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले आरोपी को दोषी करार दिया गया है। इस मामले में आरोपी मोहम्मद इकबाल पटेल, जो कि सूरत, गुजरात का निवासी है, को अपर सत्र न्यायाधीश राजेश कुमार यादव की अदालत ने सात साल के कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने आरोपी पर 1.5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
घटना का विवरण
यह मामला वर्ष 2018 का है, जब मोहम्मद इकबाल पटेल ने फर्जी टूर कंपनी का गठन किया और इस कंपनी के माध्यम से जबलपुर के 37 हज यात्रियों से वीजा और यात्रा की सुविधाएं प्रदान करने के लिए पैसे लिए थे। आरोपी ने इन यात्रियों को विश्वास में लेकर वादा किया था कि वे उन्हें सऊदी अरब में हज और उमरा करने के लिए ले जाएंगे।
यात्रियों ने विश्वास कर और आरोपी के झांसे में आकर यात्रा के लिए आवश्यक पैसे जमा किए। जब ये यात्री मुंबई पहुंचे, तो उन्हें वहां वीजा नहीं मिला और वे हज यात्रा पर नहीं जा सके। इस पर यात्रियों ने आरोपी से अपना पैसा वापस मांगा, लेकिन उसने लगातार बहानेबाजी की और पैसा लौटाने से इनकार कर दिया।
पीड़ितों ने किया पुलिस में शिकायत
आखिरकार, जब यात्रियों को किसी भी प्रकार की मदद नहीं मिली, तो उन्होंने जबलपुर लौटकर हनुमानताल थाने में आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज करवाई। पुलिस ने इस शिकायत को गंभीरता से लिया और आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी, ठगी और अन्य संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की। इसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
न्यायालय में सुनवाई और सजा
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में सबूत और गवाह पेश किए, जिनके आधार पर आरोपी को दोषी करार दिया गया। अतिरिक्त लोक अभियोजक लहर दीक्षित ने अभियोजन की ओर से सशक्त पैरवी की और आरोपी के खिलाफ सजा की मांग की। अदालत ने सारे साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी मोहम्मद इकबाल पटेल को दोषी ठहराया और सात साल की सजा सुनाई। साथ ही अदालत ने आरोपी पर 1.5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जिसे उसे पीड़ितों को लौटाना होगा।
अदालत का संदेश
इस मामले की सुनवाई और सजा ने यह संदेश दिया है कि धोखाधड़ी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और ऐसे अपराधों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अदालत ने यह भी कहा कि नागरिकों को हमेशा सावधान रहना चाहिए और यात्रा जैसी सेवाओं के लिए किसी भी प्रकार की भुगतान करते वक्त पूरी जानकारी प्राप्त करनी चाहिए।
यह फैसला एक उदाहरण बनकर उभरा है, जिससे ऐसे धोखाधड़ी के मामलों में पीड़ितों को न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ी है और भविष्य में ऐसे अपराधों के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा हो



