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Gaza Update : पीएम मोदी को ‘गाज़ा शांति बोर्ड’ में शामिल होने का दिया न्योता मध्य पूर्व शांति की अमेरिकी योजना में भारत को अहम भूमिका देने की पेशकश

बाज़ इंटरनेशनल डेस्क। भारत एक बार फिर दुनिया के सामने शांति, संतुलन और जिम्मेदार नेतृत्व की मिसाल बनकर उभरा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाज़ा संकट के समाधान के लिए तैयार की गई अमेरिकी मध्यस्थता वाली शांति योजना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “गाज़ा के लिए शांति बोर्ड” में शामिल होने का निमंत्रण देकर भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को नई ऊंचाई दी है।

यह निमंत्रण इस बात का संकेत है कि आज भारत सिर्फ एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता का भरोसेमंद स्तंभ बन चुका है।

ट्रंप का पत्र: भारत के नेतृत्व पर भरोसा

16 जनवरी को भेजे गए पत्र में राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की खुले शब्दों में सराहना की। उन्होंने लिखा कि भारत जैसे महान लोकतंत्र का इस ऐतिहासिक प्रयास से जुड़ना उनके लिए सम्मान की बात है। ट्रंप के अनुसार, यह पहल न सिर्फ मध्य पूर्व में शांति मजबूत करेगी, बल्कि वैश्विक संघर्षों को सुलझाने के लिए एक नया और साहसिक रास्ता भी दिखाएगी।

भारत की सोच: युद्ध नहीं, समाधान

ट्रंप ने अपने पत्र में गाज़ा संघर्ष खत्म करने के लिए घोषित 20-सूत्रीय रोडमैप का ज़िक्र करते हुए बताया कि इसे अरब देशों, इज़राइल और यूरोप के कई राष्ट्रों का समर्थन मिल चुका है। इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा पारित प्रस्ताव ने भी इस योजना को वैश्विक मान्यता दी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को इस शांति बोर्ड में शामिल करने का फैसला इसलिए अहम है क्योंकि भारत हमेशा से “वसुधैव कुटुंबकम्” की भावना के साथ संवाद, मानवता और शांति का पक्षधर रहा है।

दुनिया मान रही है भारत की भूमिका

भारत के साथ-साथ पाकिस्तान, जॉर्डन, तुर्की, मिस्र, कनाडा और यूरोप व लैटिन अमेरिका के कई देशों को भी आमंत्रित किया गया है। लेकिन जानकारों का कहना है कि भारत का नाम इस सूची में होना यह दर्शाता है कि भारत को एक संतुलित, निष्पक्ष और भरोसेमंद वैश्विक शक्ति के रूप में देखा जा रहा है।

आने वाले दिनों में स्विट्ज़रलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान इस शांति बोर्ड की आधिकारिक घोषणा होने की संभावना है।

भारत की कूटनीति की जीत

गाज़ा शांति बोर्ड में भारत की संभावित भागीदारी को भारतीय विदेश नीति की बड़ी सफलता माना जा रहा है। यह वही भारत है जो रूस-यूक्रेन युद्ध से लेकर पश्चिम एशिया तक, हर मंच पर बातचीत और शांति का संदेश देता आया है।

भारत से उम्मीदें

अंतरराष्ट्रीय जानकारों का कहना है कि अगर भारत इस शांति बोर्ड में सक्रिय भूमिका निभाता है, तो यह न सिर्फ गाज़ा में शांति प्रक्रिया को मजबूती देगा, बल्कि दुनिया को यह भरोसा भी दिलाएगा कि भारत सत्ता नहीं, समाधान की राजनीति करता है

कुल मिलाकर, पीएम मोदी को मिला यह न्योता भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत, नैतिक नेतृत्व और शांतिप्रिय सोच का प्रमाण है—जहां भारत अब सिर्फ अपनी बात नहीं रखता, बल्कि दुनिया को रास्ता दिखाता है

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