
जबलपुर। खितौला क्षेत्र में रेत कारोबारी धर्मेंद्र ठाकुर की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या ने पुलिस-प्रशासन को अलर्ट मोड पर ला दिया है। वारदात के बाद से पुलिस की कार्रवाई बेहद तेज हो गई है और फरार नकाबपोश हमलावरों को पकड़ने के लिए जबलपुर, कटनी और मंडला जिलों की सीमाओं पर देर रात तक दबिश दी जा रही है।
सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन, प्राथमिक जांच व परिजनों–परिचितों के बयानों के आधार पर पुलिस ने हमलावरों की पहचान लगभग तय कर ली है। सूत्रों के अनुसार, चार संदिग्धों की भूमिका साफ हो चुकी है, जिनमें से दो पर सीधे तौर पर फायरिंग में शामिल होने का शक है।
दो विशेष टीमें छापामारी में जुटीं, हर दो घंटे में फीडबैक ले रहे वरिष्ठ अधिकारी
खितौला थाना पुलिस के साथ क्राइम ब्रांच की दो स्पेशल टीमें संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही हैं।
एसपी सम्पत उपाध्याय और एएसपी अंजना तिवारी ने जांच अधिकारियों को बिना किसी ढिलाई के कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
दोनों अधिकारी हर दो घंटे में टीमों की प्रगति की समीक्षा कर रहे हैं।
पुलिस का तकनीकी सेल मोबाइल लोकेशन ट्रैकिंग, कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रहा है। दूसरी टीम संदिग्ध गांवों, जंगल क्षेत्रों और सीमा इलाकों में लगातार दबिश दे रही है।
वारदात ऐसे हुई—रास्ता रोककर ताबड़तोड़ तीन गोलियां दागीं
गुरुवार दोपहर धर्मेंद्र ठाकुर अपनी बाइक से गुजर रहे थे, तभी नकाबपोश बदमाशों ने सुनसान मोड़ पर रास्ता रोककर उन पर फायरिंग कर दी।
हमलावरों ने एक के बाद एक तीन गोलियां दागीं, जिससे धर्मेंद्र की मौके पर ही मौत हो गई।
फायरिंग के बाद इलाके में दहशत फैल गई। लोग घरों से निकल आए और सूचना मिलते ही खितौला थाने सहित आसपास के थाना प्रभारियों की टीमें घटनास्थल पर पहुंच गईं।
क्षेत्र को तत्काल सुरक्षा घेरे में लेकर फील्ड यूनिट और एफएसएल टीम ने साक्ष्य जुटाए।
जांच रंजिश की ओर झुकी—पुराने विवाद की पुष्टि की कोशिश
प्राथमिक जांच में पुलिस को संकेत मिले हैं कि हत्या की वजह पुरानी रंजिश या कारोबारी विवाद हो सकता है।
टीम इस एंगल पर भी काम कर रही है कि क्या मृतक का किसी गिरोह, प्रतिस्पर्धी कारोबारी या आपराधिक समूह से विवाद था।
पुलिस इस बात की भी पुष्टि कर रही है कि हाल के दिनों में धर्मेंद्र ने किसी को धमकी मिलने या विवाद बढ़ने की शिकायत की थी या नहीं।
मोबाइल बंद कर छिपे आरोपी, गिरफ्तारी के करीब होने का दावा
पुलिस सूत्रों का कहना है कि आरोपी मोबाइल बंद कर फरार जरूर हैं, लेकिन तकनीकी और फील्ड दोनों स्तरों पर उनकी लोकेशन का दायरा सीमित किया जा चुका है।
टीमें लगातार संदिग्ध मार्गों, नदियों के किनारों, जंगल पट्टी और गांवों में दबिश दे रही हैं।
पुलिस को भरोसा है कि अगले 24–48 घंटे में मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी संभव है।
इस हत्याकांड ने न केवल इलाके में भय का माहौल बनाया है, बल्कि रेत कारोबार से जुड़े पुराने विवादों और आपराधिक गतिविधियों पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस की अगली कार्रवाई पर क्षेत्र की निगाहें टिकी हैं।



