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“बरेली की कार्रवाई न्याय नहीं, सियासी बदले की निशानी” — जमाअत-ए-इस्लामी हिंद का प्रतिनिधिमंडल बरेली पहुंचा; मांग: निर्दोष मुसलमानों को तुरंत रिहा किया जाए

रिपोर्ट: बाज मीडिया | नई दिल्ली, 29 अक्टूबर 2025

भारत के मुसलमानों के लिए बरेली की घटनाएं एक बार फिर गहरी चिंता का कारण बन गई हैं।
जमाअत-ए-इस्लामी हिंद का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल इन घटनाओं की हकीकत जानने के लिए बरेली पहुंचा — जहाँ हाल के दिनों में दर्ज़नों मुस्लिम घरों पर तोड़फोड़, दुकानों की सीलिंग और मनमानी गिरफ्तारियों की कार्रवाई हुई है।

इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व जमाअत के उपाध्यक्ष मालिक मोअतसीम खान ने किया। उनके साथ राष्ट्रीय सचिव आई. करीमुल्लाह, लईक अहमद, APCR के नेशनल सेक्रेटरी नदीम खान, जमाअत यूपी पश्चिम ज़ोन के अध्यक्ष ज़मीरुल हसन और कई अधिवक्ता व सामाजिक कार्यकर्ता शामिल थे।

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🔍 “बिना सबूत, बिना प्रक्रिया — सब कुछ एकतरफा”

प्रतिनिधिमंडल ने बरेली के प्रभावित इलाकों का दौरा किया और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की।
जमाअत की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार:

  • कई घरों पर तोड़फोड़ और दुकानों पर सीलिंग की कार्रवाई बिना किसी कानूनी नोटिस या जांच के की गई।
  • कई युवाओं को बिना सबूत और झूठे आरोपों में गिरफ्तार किया गया।
  • वैध दस्तावेज़ और डिजिटल सबूत मौजूद होने के बावजूद, पुलिस ने राजनीतिक दबाव में कार्रवाई की।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यह सब एक समुदाय को डराने और दबाने की कोशिश है, जिसका कानून और इंसाफ़ से कोई संबंध नहीं।


⚖️ कानूनी मोर्चे पर जमाअत और APCR की पहल

जमाअत और APCR (Association for Protection of Civil Rights) ने कहा कि वे पीड़ितों की कानूनी लड़ाई में साथ खड़े रहेंगे।
जमाअत के प्रतिनिधियों ने बरेली के स्थानीय वकीलों के साथ बैठक की और कानूनी कदम उठाने की रणनीति बनाई।

प्रतिनिधिमंडल ने जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक से मिलने की कोशिश की ताकि प्रशासन से जवाब लिया जा सके, लेकिन कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली।


🗣️ जमाअत का बयान: “सियासी मकसद से दर्ज FIR रद्द हों”

जमाअत के उपाध्यक्ष मालिक मोअतसीम खान ने कहा:

“जो FIR राजनीतिक मकसद से दर्ज की गई हैं, उन्हें तुरंत वापस लिया जाए।
निर्दोष युवाओं को रिहा किया जाए और पुलिस की ज्यादतियों पर न्यायिक जांच हो।”

उन्होंने कहा कि मुसलमानों को कानूनी और संवैधानिक रास्ते से अपने अधिकारों के लिए खड़ा होना चाहिए।

“हमारी लड़ाई किसी से नहीं — अन्याय, मनमानी और भय के खिलाफ़ है।”


🧾 APCR का दावा: “27 घरों को नोटिस, 32 दुकानें सील”

APCR के नेशनल सेक्रेटरी नदीम खान ने कहा कि बरेली प्रशासन ने अब तक —

  • 27 मुस्लिम परिवारों को तोड़फोड़ के नोटिस, और
  • 32 दुकानों को सील किया है।

उन्होंने कहा:

“इन दुकानों और घरों के वैध दस्तावेज़ हमारे पास हैं। अदालत में ये साबित किया जाएगा कि ये लोग निर्दोष हैं।
हमें यक़ीन है कि अदालत से न्याय मिलेगा।”


🤝 एकता और सब्र की अपील

जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने देशभर के मुसलमानों से अपील की है कि —

  • धैर्य रखें, एकजुट रहें, और कानून का रास्ता अपनाएं।
  • किसी उकसावे में न आएं, बल्कि संविधान और अदालत के ज़रिए हक़ की लड़ाई जारी रखें।
  • हर ज़िले में सिविल राइट्स नेटवर्क को मज़बूत करें ताकि ऐसे मौक़ों पर मुसलमान अकेले न रहें।

📌 बाज मीडिया की टिप्पणी:
बरेली की यह घटना केवल एक शहर का मामला नहीं, बल्कि देशभर के मुसलमानों के लिए एक जागने की चेतावनी है। यह वक़्त कानून की समझ बढ़ाने, अपने अधिकारों के लिए खड़े होने और मीडिया व सिविल सोसाइटी के सहयोग से एक मज़बूत आवाज़ बनाने का है।

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