
जबलपुर, (बाज़ मीडिया)। जबलपुर को मध्यप्रदेश का सांस्कृतिक और धार्मिक पर्यटन केंद्र बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने घोषणा की है कि माँ नर्मदा के पावन तटों — विशेषकर गौरीघाट — को सरयू (अयोध्या) की तर्ज पर भव्य और आधुनिक स्वरूप दिया जाएगा।
इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना का भूमिपूजन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शीघ्र करेंगे। परियोजना का लक्ष्य जबलपुर को “नर्मदा टूरिज्म सर्किट” के रूप में विकसित करना है — जो धार्मिक आस्था, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय अर्थव्यवस्था — तीनों को नई ऊर्जा देगा।


🌊 गौरीघाट बनेगा नर्मदा टूरिज्म का केंद्र
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने होटल समदड़िया में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि गौरीघाट, दरोगा घाट, खारीघाट, जिलहरी घाट, सिद्धघाट और उमा घाट को जोड़कर एक एकीकृत घाट कॉरिडोर बनाया जाएगा।
यह कॉरिडोर सरयू घाटों की तरह आधुनिक सुविधाओं और सांस्कृतिक आकर्षण का केंद्र होगा।
उन्होंने कहा —
“माँ नर्मदा की शांत लहरें श्रद्धालुओं को शांति और शक्ति दोनों प्रदान करती हैं। अब यह तट श्रद्धा के साथ-साथ रोजगार और पर्यटन के अवसरों का भी केंद्र बनेगा।”

🏗️ आधुनिक विकास, पारंपरिक आस्था का संगम
परियोजना के पहले चरण में घाटों का सौंदर्यीकरण, पर्यावरणीय पुनर्वास और आस्था से जुड़ी मूल संरचनाओं का पुनर्निर्माण किया जाएगा।
मुख्य विशेषताएँ:
- खारी घाट पर जलकुंड और चेंजिंग रूम की व्यवस्था
- दरोगा घाट पर ‘नाव घाट’ और भव्य दीवार कला (म्युरेल्स)
- संध्या आरती मंच — पाँच स्थायी प्लेटफॉर्म्स जहां प्रतिदिन भव्य आरती होगी
- वॉच टावर और कंट्रोल रूम — श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए
- ई-कार्ट सेवा — वृद्ध और दिव्यांग यात्रियों के लिए
- सुव्यवस्थित पार्किंग (900 दोपहिया, 700 चारपहिया)
- स्थायी दुकानें और तीर्थ पुरोहितों के लिए निर्धारित स्थान
💧 नर्मदा प्रदूषण-नियंत्रण और वाटर चैनल योजना
इस विकास योजना की सबसे खास विशेषता है 800 मीटर लंबा जल चैनल, जो श्रद्धालुओं को स्नान और पूजन की स्वच्छ सुविधा देगा।
फूल और दीप सीधे नदी में न बहाकर इस चैनल में अर्पित किए जाएंगे — जिससे माँ नर्मदा की मुख्य धारा प्रदूषण-मुक्त रहेगी।
यह मॉडल पूरे प्रदेश के लिए “क्लीन रिवर पिलग्रिम प्रोजेक्ट” का उदाहरण बन सकता है।

💰 जबलपुर की अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्ट
पर्यटन विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रोजेक्ट से जबलपुर को सालाना लाखों नए पर्यटक मिल सकते हैं।
- धार्मिक पर्यटन से जुड़े होटल, परिवहन, दुकानें, गाइड और शिल्पकारों को प्रत्यक्ष लाभ होगा।
- घाट क्षेत्र के आस-पास छोटे व्यवसायों को स्थायी दुकानें मिलने से स्थानीय रोजगार में बढ़ोतरी होगी।
- शहर की छवि एक “सांस्कृतिक और स्पिरिचुअल टूरिज्म डेस्टिनेशन” के रूप में उभरेगी, जो जबलपुर की अर्थव्यवस्था में दीर्घकालीन स्थिरता लाएगी।
🌿 पर्यावरण और सौंदर्य दोनों पर फोकस
गौरीघाट और आसपास के क्षेत्र में हरियाली, बैठने की जगहें और प्राकृतिक दृश्य सौंदर्य को प्राथमिकता दी जाएगी।
मोक्षधाम को भी आधुनिक स्वरूप देने की योजना तैयार की जा रही है, ताकि श्रद्धालु और पर्यटक दोनों को आध्यात्मिक और पर्यावरणीय शांति का अनुभव मिले।

🙏 “नर्मदा तट विकास परियोजना” — एक नई पहचान
राकेश सिंह के नेतृत्व में जबलपुर को एक नई दिशा मिल रही है।
गौरीघाट के विकास के बाद यह क्षेत्र न केवल आस्था और अध्यात्म का केंद्र बनेगा, बल्कि यह शहर की अर्थव्यवस्था, पर्यटन और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक होगा।
“हम चाहते हैं कि जबलपुर आने वाला हर पर्यटक माँ नर्मदा के तट पर वही दिव्यता महसूस करे, जो लोग अयोध्या की सरयू या वाराणसी के घाटों पर करते हैं।” — राकेश सिंह



