गुजरात में दरगाह विध्वंस पर बवाल — पथराव, लाठीचार्ज और 13 गिरफ्तारियां, इलाके में तनाव बरकरार

वेरावल (गुजरात), 12 नवंबर: गुजरात के सोमनाथ ज़िले के वेरावल स्थित प्रभास पाटन क्षेत्र में सोमवार को दरगाह विध्वंस के दौरान हिंसक झड़पें भड़क उठीं। स्थानीय लोगों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच विवाद इतना बढ़ा कि पुलिस को लाठीचार्ज और आँसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। झड़पों के बाद पुलिस ने अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि अन्य की तलाश जारी है।
सूत्रों के अनुसार, विवाद तब शुरू हुआ जब स्थानीय प्रशासन की टीम प्रभास पाटन इलाके में एक दरगाह की चारदीवारी को गिराने पहुंची। बताया जा रहा है कि जैसे ही दरगाह का हिस्सा गिराया गया, लगभग 100 महिलाएं और बच्चे विरोध में इकट्ठा हो गए। स्थिति देखते ही देखते बिगड़ गई और भीड़ ने कथित तौर पर पुलिस और प्रशासनिक कर्मचारियों पर पथराव शुरू कर दिया।
जवाब में पुलिस ने लाठीचार्ज किया और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए तीन आंसू गैस के गोले दागे। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, देर शाम तक पुलिस ने हालात पर काबू पा लिया और विध्वंस अभियान को दोबारा शुरू कर दिया। मंगलवार सुबह तक प्रशासन ने 11 अवैध संरचनाओं — जिनमें कुछ घर और एक धार्मिक स्थल शामिल थे — का मलबा हटा दिया।
इस घटना को लेकर प्रभास पाटन पुलिस स्टेशन में उप-ममलतदार (सर्किल ऑफिसर) रंजीतसिंह आर. खेर की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। शिकायत के अनुसार, प्रशासन की टीम सरकारी भूमि (सर्वे नंबर 831) पर बने अवैध निर्माणों को हटाने गई थी और सुबह का अभियान शांतिपूर्ण रहा। लेकिन शाम होते ही दरगाह पर तोड़फोड़ शुरू होते ही भीड़ इकट्ठा हो गई और पुलिस टीम पर हमला कर दिया।
पुलिस ने 17 लोगों को नामजद किया है, जबकि अन्य अज्ञात व्यक्तियों पर भी केस दर्ज किया गया है। आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत गैरकानूनी जमावड़ा, दंगा करने, लोक सेवक पर हमला करने, मानव जीवन को खतरे में डालने, और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप लगाए गए हैं। साथ ही गुजरात पुलिस अधिनियम की धारा 135 के तहत भी मामला दर्ज हुआ है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और हालात पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। जांच जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
इस पूरे विवाद की जड़ 28 सितंबर, 2024 की घटनाओं से जुड़ी बताई जा रही है, जब प्रशासन ने इसी प्रभास पाटन इलाके में नौ मुस्लिम धार्मिक स्थलों को तोड़ दिया था। इनमें अनुमानतः 1,200 वर्ष पुरानी हाजी मंगरोल दरगाह, शाह सिलार दरगाह, गरीब शाह दरगाह, जाफर मुजफ्फर दरगाह, एक मस्जिद, 500 वर्ष पुराना कब्रिस्तान और 47 घर शामिल थे। उस समय भी स्थानीय समुदाय ने विरोध जताया था और सुप्रीम कोर्ट ने बिना उचित प्रक्रिया के “बुलडोज़र न्याय” पर रोक लगाने के आदेश दिए थे।
सोमनाथ जिला अब प्रशासन और समुदाय — दोनों के बीच अविश्वास और तनाव की स्थिति में है। फिलहाल अधिकारी शांति बनाए रखने की अपील कर रहे हैं, जबकि स्थानीय लोग इस कार्रवाई को धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मामला बता रहे हैं।



