सतना में 1 मंच, 12 निकाह, 1 पैग़ाम — अल-बरकात वेलफेयर सोसाइटी ने इज्तिमाई निकाह के ज़रिये दिया ‘सादगी, ख़िदमत और ख़ुलूस’ का पैग़ाम

बाज मीडिया, सतना। दिलों में ख़ैर की नीयत लिए सतना के नज़ीराबाद मैदान में अल–बरकात वेलफेयर सोसाइटी के ज़ेर-ए-एहतिमाम 12 जोड़ो का सामूहिक निकाह कार्यक्रम पूरे वक़ार, सादगी और रूहानियत के माहौल में संपन्न हुआ। निकाह की रस्में जब अदा हो रही थीं, तब पूरा मैदान “बारकल्लाहु लका वा बारका अलैका वा जमा बैनकुमा फी ख़ैर” की मुबारक सदाओं से गूंज उठा।

इस मौके पर शहर और आस-पास के इलाक़ों से उलेमा-ए-किराम, समाजी ज़िम्मेदार लोग, ख्वातीन, नौजवान और हर तबके के लोग बड़ी तादाद में मौजूद रहे। सबकी आंखों में एक ही ख़्वाब था— कौम की बच्चियां इज़्ज़त से रुख़्सत हों, बोझ बनकर नहीं, रहमत बनकर अपने नए सफ़र की शुरुआत करें।
“निकाह को फिज़ूल रस्मों से बचाना भी इबादत है” — सरपरस्त का पैग़ाम
अल–बरकात सोसाइटी के सरपरस्त हाजी परवेज़ नवाब ने अपने बयान में दिल तक उतरने वाली बात कही:

“आज हमारे समाज की सबसे बड़ी बीमारी है दिखावा, फिज़ूलखर्ची और झूठी शान। निकाह में लाखों खर्च कर दिए जाते हैं, मगर बेटियों की ज़िंदगी को आसान बनाने की कोई नहीं सोचता। हम ये पैग़ाम देना चाहते हैं कि निकाह सुन्नत है, इबादत है — इसे आसान बनाना हमारा फ़र्ज़ है। हमारी कोशिश है कि कोई बेटी सिर्फ पैसों की कमी की वजह से घर में ना बैठे।”
उनकी बात सुनते ही पूरा मैदान तालियों और “माशाअल्लाह” की सदाओं से गूंज उठा।
हर बेटी की रुख़्सती इज़्ज़त और सामान के साथ

सोसाइटी की तरफ़ से हर नवविवाहित जोड़े को वो तमाम ज़रूरियात मुहैय्या कराई गईं, जिससे उनकी नई ज़िंदगी मज़बूती से शुरू हो सके। तोहफ़े की शक्ल में दिए गए सामान में शामिल थे:
- अलमारी
- बेड और गद्दा
- बर्तनों का पूरा सेट
- सोफा
- डाइनिंग टेबल
- ट्रॉली बैग
- और रोज़मर्रा की घरेलू ज़रूरियात
यह सामान देते वक़्त सोसाइटी के ज़िम्मेदारों की आंखों में जो अपनापन था, वो बता रहा था कि यह काम सिर्फ रस्म नहीं, ख़िदमत-ए-ख़ल्क़ (इंसानों की सेवा) की सच्ची मिसाल है।
2023 से जारी नेकी का काफ़िला

सोसाइटी के रहनुमा हाजी परवेज़ नवाब साहब ने अपनी तक़रीर में बताया:
“ये नेक पहल हमने 2023 में शुरू की थी। तब 10 जोड़ो का निकाह कराया, अगले साल 7 जोड़ों का, और इस साल अल्हम्दुलिल्लाह 12 जोड़ो का। हमारी नियत साफ़ है, रास्ता सीधा है, और जब तक अल्लाह तौफ़ीक़ देगा, यह सिलसिला जारी रहेगा।”
उन्होंने यह भी कहा कि यह काम किसी वाहवाही के लिए नहीं, बल्कि अल्लाह की रज़ा के लिए किया जा रहा है।
शिरीन खान की ख़िदमत बनी मिसाल
समाज सेविका शिरीन खान ने भी नवविवाहित जोड़ों को अपनी तरफ़ से सामान भेंट किया। मंच से उनकी इस पहल की सराहना करते हुए कहा गया कि:
“शिरीन खान ने साबित किया है कि समाज की बेहतरी सिर्फ बातों से नहीं, अमल से आती है। वह हमारी बेटियों और नई नस्ल के लिए रोल मॉडल हैं।”
कौन–कौन रहा मौजूद
कार्यक्रम में बड़ी शख़्सियतों और समाजी रहनुमाओं ने शिरकत की, जिनमें शामिल थे:

- महापौर योगेश ताम्रकार
- पूर्व मंत्री सईद अहमद
- सुनील गुप्ता
- मशहूद अहमद शेरू
- इरफान अहमद
- इमरान सौदागर
- शेरू खान
- तारिक रजा ‘फुर्सत’
- रेशु यादव
- हाजी नवाब
- हाजी सिकंदर बेग
- जाकिर कुरैशी
- रफीक सिद्दीकी
- दिलीप जैन
- सोसाइटी अध्यक्ष जाहिद खान
- साबिर खान, शाहिद खान, इनायत सिद्दीकी, आसिफ खान, जानी मंसूरी
- अनवर, शमीउल्लाह खान, सादिक सौदागर, तौहीद खान, इकराम मंसूरी, सलमान
- जबलपुर से एडवोकेट तकी रज़ा, एडवोकेट अफज़ाल रहमानी, एडवोकेट शोएब अंसारी, एडवोकेट अदनान अंसारी
साथ ही उलेमा-ए-किराम, समाज के बुज़ुर्ग, नौजवान, और ख्वातीन भी बड़ी तादाद में मौजूद रहे।
दुआ के साथ हुआ रुख़्सत-ए-तक़रीब का समापन
कार्यक्रम के आखिर में खास दुआ कराई गई, जिसमें:
- मुल्क में अमन–चैन,
- कौम की तरक़्क़ी,
- नवविवाहित जोड़ों की ख़ुशहाल ज़िंदगी,
- और अल–बरकात वेलफेयर सोसाइटी की लगातार कामयाबी की दुआ की गई।
अवाम की ज़बान पर एक ही बात:
“ये सिर्फ 12 निकाह नहीं… 12 परिवारों की ज़िंदगी बदलने का सबब है, 12 बेटियों की इज़्ज़त की हिफ़ाज़त है, 12 घरों में ख़ुशियों का उजाला है।”
समाज के लोगों ने इसे:
- नेकी का रास्ता
- सादगी का पैग़ाम
- कौम की एकजुटता की तहरीक
- और इंसानियत का सबसे ख़ूबसूरत चेहरा कहा।



