
“बिना वजह देरी और अधिकारों की जानकारी न देने से पूरी प्रक्रिया हुई गैर-कानूनी”
गुवाहाटी। गुवाहाटी हाई कोर्ट ने AIUDF के विधायक अमीनुल इस्लाम की नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत की गई हिरासत को अवैध घोषित करते हुए रद्द कर दिया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि यदि वे किसी अन्य मामले में वॉन्टेड नहीं हैं, तो उन्हें तुरंत रिहा किया जाए।
इस्लाम को छह महीने पहले असम में हुई एक पॉलिटिकल रैली के दौरान दिए गए विवादित बयान—जम्मू-कश्मीर के पहलगाम और पुलवामा हमलों को “BJP सरकार की साज़िश” बताने—के आधार पर गिरफ्तार किया गया था।
कोर्ट ने कहा—अधिकारों की जानकारी देर से दी, रिप्रेजेंटेशन निपटाने में ‘बिना वजह देरी’
जस्टिस कल्याण राय सुराणा और राजेश मजूमदार की डिवीजन बेंच ने पाया कि प्रशासन ने इस्लाम की NSA हिरासत को लेकर संविधान प्रदत्त सुरक्षा उपायों का पालन नहीं किया।
मुख्य आधार—
- इस्लाम द्वारा दायर रिप्रेजेंटेशन को अधिकारियों तक पहुंचाने में 12 दिन की देरी हुई
- देरी का कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया
- MLA को केंद्र सरकार को अपील करने के अपने अधिकार की जानकारी 23 दिन बाद दी गई
- यह जानकारी भी तब दी गई जब केंद्र सरकार ने खुद राज्य को याद दिलाया
कोर्ट ने माना कि यह देरी और अधिकारों की जानकारी न देना, दोनों ही NSA की प्रक्रिया को खराब और गैर-कानूनी बनाते हैं।
पहलगाम हमले पर दिए बयान के बाद गिरफ्तारी
24 अप्रैल को एक रैली में इस्लाम ने आरोप लगाया था कि—
- 22 अप्रैल को पहलगाम में हुआ हमला राज्य द्वारा बताया गया घटनाक्रम नहीं है
- यह “केंद्र सरकार की साज़िश” है
- इससे पहले उन्होंने पुलवामा हमले को भी 2019 के चुनावों से जोड़कर “साज़िश” बताया था
इस बयान को लेकर उनके खिलाफ कई धाराओं के तहत केस दर्ज हुआ था, जिनमें BNS की धारा 152 (पूर्व में IPC की देशद्रोह जैसी धाराएँ) भी शामिल थीं।
जमानत के दिन ही NSA में दोबारा हिरासत
इस्लाम को 14 मई को इस मामले में जमानत मिल गई थी, लेकिन उसी दिन उन्हें NSA के तहत पुनः हिरासत में ले लिया गया।
असम पुलिस ने दावा किया था कि वे “राज्य की सुरक्षा और पब्लिक ऑर्डर के लिए खतरा पैदा कर रहे थे।”
राज्य में उस वक्त “पाकिस्तान समर्थकों पर कार्रवाई” अभियान के तहत 58 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिसमें इस्लाम पहला नाम थे।
फाउंडेशनल कानूनी सिद्धांत का हवाला देते हुए कोर्ट का फैसला
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के के.एम. अब्दुल्ला कुन्ही बनाम यूनियन ऑफ इंडिया फैसले का हवाला देते हुए कहा—
- NSA के तहत रिप्रेजेंटेशन निपटाने की कोई तय समय सीमा नहीं है
- पर अनुचित देरी पूरे हिरासत को अवैध कर देती है
- हिरासत में लिए गए व्यक्ति को अपने सभी अधिकारों की तुरंत जानकारी दी जानी चाहिए
कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि इन प्रक्रियात्मक खामियों के बाद इस्लाम की NSA हिरासत कानूनी रूप से टिक नहीं सकती।
AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने एक महीना पहले ही यह दावा किया था कि इस्लाम की NSA हिरासत “पूरी तरह राजनीतिक” है।
उन्होंने कहा था कि यदि उन्हें रिहा नहीं किया गया तो वे “अगला विधानसभा चुनाव जेल से लड़ेंगे।”
NSA क्या है?
1980 का नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) बिना किसी चार्जशीट या ट्रायल के
- 12 महीने तक की प्रिवेंटिव डिटेंशन की अनुमति देता है।
यह कानून उन मामलों में लागू किया जाता है जहाँ राज्य को लगता है कि कोई व्यक्ति - देश की सुरक्षा
- सार्वजनिक व्यवस्था
- या सामुदायिक शांति के लिए खतरा बन सकता है।



