
जबलपुर। जबलपुर ग्रामीण क्षेत्र के सिहोरा–खितौला में हुई इंसास बैंक डकैती में करोड़ों रुपए के सोने की बरामदगी में नाकाम रही जिला पुलिस के सामने अब पनागर में हुई सनसनीखेज लूट एक नई और बड़ी चुनौती बनकर खड़ी हो गई है। मंगलवार रात पनागर में ज्वेलर्स से हुई इस लूट ने न सिर्फ पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि जिले के लॉ एंड ऑर्डर को लेकर आम नागरिकों के मन में डर और असुरक्षा की भावना भी गहरा दी है।
पनागर थाना क्षेत्र में मंगलवार रात करीब 8 बजे कमानिया गेट के पास भूरा ज्वेलर्स के संचालक सुनील सराफ और उनके बेटे संभव सराफ के साथ हुई लूट की वारदात को 24 घंटे से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन बुधवार शाम तक भी पुलिस आरोपियों तक नहीं पहुंच सकी। बदमाश करीब 900 ग्राम सोना, 19 किलो 750 ग्राम चांदी और लगभग 17 लाख रुपए नकद कुल 54 लाख लूटकर फरार हो गए।
बुधवार भर चली तलाश, नतीजा सिफर
वारदात के तुरंत बाद मंगलवार रात पनागर सहित गोसलपुर, सिहोरा, अधारताल, माढ़ोताल, तिलवारा, बरगी, खितौला, मझगवां और मझौली थाना क्षेत्रों में नाकाबंदी कराई गई थी। बुधवार को भी पूरे दिन पुलिस की टीमें संभावित रास्तों, बस स्टैंड, ढाबों और संदिग्ध ठिकानों पर दबिश देती रहीं, लेकिन न तो कोई आरोपी हाथ लगा और न ही लूटे गए जेवर या नकदी का कोई सुराग मिला।
क्राइम ब्रांच और साइबर सेल भी खाली हाथ
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक सम्पत उपाध्याय के निर्देश पर क्राइम ब्रांच को जांच में लगाया गया है। वहीं साइबर सेल ने पनागर और आसपास के क्षेत्रों के मोबाइल टावरों का डेटा खंगालते हुए शाम 6 से रात 8 बजे के बीच सक्रिय मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल और लोकेशन की जांच शुरू की, लेकिन अब तक कोई ठोस इनपुट सामने नहीं आया है।
पुरानी विफलताओं की याद दिलाती पनागर लूट
पनागर की यह वारदात जबलपुर पुलिस के उस लंबे रिकॉर्ड की याद दिला रही है, जिसमें बड़ी और पेशेवर आपराधिक घटनाओं का खुलासा नहीं हो सका। सिहोरा-खितौला क्षेत्र में हुई इंसास बैंक डकैती इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां करोड़ों के सोने की बरामदगी आज तक नहीं हो पाई। इसके अलावा जिले में बीते वर्षों में हुई कई लूट और डकैती की घटनाएं भी पुलिस फाइलों में अधूरी पड़ी हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस शहर और ग्रामीण इलाकों में छोटी चोरियों तक को रोकने में नाकाम साबित हो रही है, ऐसे में संगठित और पेशेवर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई पर भरोसा डगमगाने लगा है। रात के समय कमजोर गश्त, सूनसान इलाकों में पुलिस की गैरमौजूदगी और बाहरी गिरोहों की आसान आवाजाही को अपराध बढ़ने का बड़ा कारण बताया जा रहा है।
लॉ एंड ऑर्डर पर उठे सवाल
पनागर लूट के बाद ग्रामीण और शहरी इलाकों में दहशत का माहौल है। व्यापारियों और आम नागरिकों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि जब प्रमुख मार्गों और कस्बों में इस तरह की वारदातें हो रही हैं और आरोपी आसानी से फरार हो जा रहे हैं, तो आम आदमी खुद को कितना सुरक्षित माने।
पुलिस का दावा—जल्द होगा खुलासा
सीएसपी राजेश्वरी कौरव का कहना है कि लूट की घटना की हर एंगल से जांच की जा रही है। सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्य और मुखबिर तंत्र के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने के प्रयास जारी हैं। पुलिस का दावा है कि जल्द ही मामले का खुलासा किया जाएगा।
हालांकि, बीते अनुभवों को देखते हुए आम जनता और व्यापारियों का भरोसा फिलहाल पुलिस के दावों से ज्यादा नतीजों पर टिका हुआ है। पनागर की लूट अब सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि जबलपुर जिले की कानून-व्यवस्था की परीक्षा बन चुकी है।



