
इंडिया हेट लैब की रिपोर्ट में खुलासा, मुसलमान और ईसाई सबसे ज़्यादा निशाने पर
नई दिल्ली। सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ़ ऑर्गेनाइज़्ड हेट (CSOH) के प्रोजेक्ट इंडिया हेट लैब (IHL) की ताज़ा सालाना रिपोर्ट ने देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हेट स्पीच की चिंताजनक तस्वीर सामने रखी है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 में भारत के 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 1,318 आमने-सामने (ऑफ़लाइन) हेट स्पीच की घटनाएं दर्ज की गईं, जिनका मुख्य निशाना मुसलमान और ईसाई समुदाय रहे।
रिपोर्ट बताती है कि यह आंकड़ा 2024 की तुलना में 13 प्रतिशत अधिक है, जबकि 2023 के मुकाबले इसमें 97 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2023 में ऐसी 668 घटनाएं दर्ज की गई थीं, जो अब लगभग दोगुनी हो चुकी हैं।
संयुक्त राष्ट्र की परिभाषा के आधार पर वर्गीकरण
इंडिया हेट लैब ने इन घटनाओं को संयुक्त राष्ट्र की हेट स्पीच की परिभाषा के अनुसार श्रेणियों में बांटा है। इनमें साज़िश की थ्योरी फैलाने, हिंसा और हथियार उठाने का खुला आह्वान, सामाजिक-आर्थिक बहिष्कार, पूजा स्थलों को ज़ब्त या ध्वस्त करने की मांग, अमानवीय भाषा का इस्तेमाल और भारत में रह रहे रोहिंग्या शरणार्थियों को निशाना बनाना शामिल है।
98 प्रतिशत भाषण मुसलमानों के खिलाफ
रिपोर्ट के मुताबिक, दर्ज की गई कुल हेट स्पीच घटनाओं में से 1,289 भाषण यानी 98 प्रतिशत किसी न किसी रूप में मुसलमानों को निशाना बनाते थे। इनमें 1,156 घटनाओं में सीधे मुसलमानों और 133 मामलों में मुसलमानों के साथ-साथ ईसाइयों के खिलाफ बयान दिए गए। यह 2024 की तुलना में करीब 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाता है।
ईसाइयों को निशाना बनाने वाली हेट स्पीच 162 घटनाओं में दर्ज की गई, जो कुल घटनाओं का लगभग 12 प्रतिशत है। इनमें 29 घटनाएं सीधे ईसाइयों के खिलाफ थीं, जबकि 133 मामलों में उन्हें मुसलमानों के साथ जोड़ा गया। यह आंकड़ा 2024 में दर्ज 115 ईसाई-विरोधी घटनाओं के मुकाबले 41 प्रतिशत अधिक है।
BJP शासित राज्यों में सबसे ज़्यादा घटनाएं
रिपोर्ट का एक अहम निष्कर्ष यह भी है कि हेट स्पीच की अधिकांश घटनाएं BJP शासित राज्यों में हुईं। कुल घटनाओं में से लगभग 88 प्रतिशत (1,164 घटनाएं) ऐसे राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज की गईं, जहां BJP अकेले, गठबंधन के रूप में या नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) के नेतृत्व में सत्ता में है।
यह संख्या 2024 में इन्हीं क्षेत्रों में दर्ज 931 घटनाओं से 25 प्रतिशत अधिक है, जो BJP के नियंत्रण वाले इलाकों में अल्पसंख्यक-विरोधी बयानबाजी के बढ़ते पैमाने को दिखाती है।
23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के विश्लेषण में सामने आया कि BJP साल के अधिकांश समय 16 राज्यों/क्षेत्रों में सत्ता में रही। इनमें उत्तर प्रदेश (266), महाराष्ट्र (193), मध्य प्रदेश (172), उत्तराखंड (155) और दिल्ली (76) सबसे ऊपर रहे। इन पांच राज्यों में ही देशभर की कुल घटनाओं का 65 प्रतिशत हिस्सा दर्ज किया गया।
इसके उलट, विपक्षी दलों या गठबंधनों द्वारा शासित सात राज्यों में 2025 में केवल 154 हेट स्पीच की घटनाएं दर्ज की गईं, जो 2024 में दर्ज 234 घटनाओं से 34 प्रतिशत कम हैं।
VHP, बजरंग दल और AHP सबसे आगे
रिपोर्ट में आयोजकों की भूमिका पर भी रोशनी डाली गई है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल—दोनों को चरमपंथी हिंदुत्व संगठन बताया गया है—289 घटनाओं (22 प्रतिशत) के आयोजक या सह-आयोजक के रूप में सामने आए। इसके बाद अंतर्राष्ट्रीय हिंदू परिषद (AHP) 138 घटनाओं के साथ दूसरे स्थान पर रही।
कुल मिलाकर, 2025 में 160 से अधिक संगठनों और अनौपचारिक समूहों को हेट स्पीच की घटनाओं से जुड़ा पाया गया।
नेताओं और साधुओं की भूमिका
व्यक्तिगत स्तर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सबसे अधिक 71 हेट स्पीच भाषणों के साथ सूची में सबसे ऊपर रहे। उनके बाद अंतर्राष्ट्रीय हिंदू परिषद के प्रमुख प्रवीण तोगड़िया (46) और BJP नेता अश्विनी उपाध्याय (35) का नाम आता है।
इसके अलावा, हिंदू साधु और धार्मिक नेता 145 हेट स्पीच घटनाओं में शामिल पाए गए, जो 2024 की तुलना में 27 प्रतिशत अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार, इन बयानों ने अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत को धार्मिक वैधता देने का काम किया।
साज़िश की थ्योरी और हिंसा के खुले आह्वान
2025 में दर्ज लगभग आधी हेट स्पीच घटनाओं (656) में “लव जिहाद,” “लैंड जिहाद” और “जनसंख्या जिहाद” जैसी साज़िश की थ्योरी का ज़िक्र किया गया। यह पिछले साल के मुकाबले 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी है।
इसके साथ ही, 308 भाषणों में हिंसा के लिए खुलेआम उकसाया गया, जिनमें से 136 मामलों में सीधे हथियार उठाने की बात कही गई। यह हिंसक बयानबाजी में 19 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाता है।
महाराष्ट्र इस मामले में सबसे खतरनाक राज्य के रूप में सामने आया, जहां 78 अत्यधिक खतरनाक भाषण दर्ज किए गए। इनमें से लगभग 40 प्रतिशत भाषणों में हिंसा का आह्वान किया गया, जो किसी भी राज्य के लिए सबसे ऊंचा अनुपात है।
मस्जिदों और चर्चों को निशाना
रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में 120 भाषणों में अल्पसंख्यक समुदायों के सामाजिक-आर्थिक बहिष्कार की अपील की गई। वहीं, 276 भाषणों में मस्जिदों, दरगाहों और चर्चों को हटाने या नष्ट करने की बात कही गई।
उत्तर प्रदेश में ज्ञानवापी मस्जिद और शाही ईदगाह मस्जिद सबसे ज़्यादा निशाने पर रहीं, जिसे रिपोर्ट ने ज़मीनी स्तर पर संभावित लामबंदी का संकेत बताया है।
अमानवीय भाषा का बढ़ता इस्तेमाल
कुल 141 भाषणों में अमानवीय शब्दावली का इस्तेमाल किया गया। इनमें अल्पसंख्यकों को “दीमक,” “परजीवी,” “कीड़े,” “सूअर,” “पागल कुत्ते,” “सांप के बच्चे,” “हरे सांप” और “खून के प्यासे ज़ॉम्बी” जैसे शब्दों से संबोधित किया गया।
सोशल मीडिया बना नफरत फैलाने का बड़ा माध्यम
रिपोर्ट यह भी बताती है कि 1,318 घटनाओं में से 1,278 के वीडियो सबसे पहले सोशल मीडिया पर शेयर या लाइव-स्ट्रीम किए गए। इनमें फेसबुक पर 942 वीडियो, यूट्यूब पर 246, इंस्टाग्राम पर 67 और X (पूर्व में ट्विटर) पर 23 वीडियो सबसे पहले अपलोड हुए। इससे साफ है कि हेट स्पीच को फैलाने में सोशल मीडिया की भूमिका बेहद अहम रही।
विशेषज्ञ की चेतावनी
CSOH की रिसर्च डायरेक्टर डॉ. एवियन लेडिग ने कहा,
“डेटा से पता चलता है कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं के दौरान हेट स्पीच में अस्थायी उछाल तो आता ही है, लेकिन सबसे चौंकाने वाला ट्रेंड यह है कि पूरे साल यह ऊंचे स्तर पर बनी रही।”
उन्होंने आगे कहा कि पिछले वर्षों के उलट, जब चुनावी मौसम के बाहर हेट स्पीच में गिरावट देखी जाती थी, 2025 में गैर-चुनावी समय में भी लगातार लामबंदी देखने को मिली। यह किसी तात्कालिक प्रतिक्रिया के बजाय रणनीतिक बदलाव की ओर इशारा करता है।
रिपोर्ट के निष्कर्ष देश में सामाजिक सौहार्द, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं, और यह बहस तेज कर रहे हैं कि नफरत फैलाने वाली बयानबाजी पर रोक के लिए ठोस कदम कब उठाए जाएंगे।



