
जबलपुर। शहर में एलपीजी गैस सिलेंडर की आपूर्ति को लेकर बढ़ती शिकायतों के बीच जिला प्रशासन ने महाराजपुर क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई करते हुए एक रिहायशी मकान पर छापा मारा। संयुक्त टीम ने यहां से अवैध रूप से भंडारित 46 गैस सिलेंडर जब्त किए।
यह कार्रवाई ऐसे समय में की गई है जब शहर में घरेलू और कमर्शियल सिलेंडरों की किल्लत को लेकर उपभोक्ताओं और व्यापारियों में नाराजगी देखी जा रही है।
संयुक्त टीम की दबिश
राजस्व विभाग, खाद्य विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने मुखबिर की सूचना पर छापामार कार्रवाई की। कार्रवाई का नेतृत्व नायब तहसीलदार नीलू बागड़ी और सहायक खाद्य अधिकारी राजधर साकेत ने किया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सूर्यकांत शर्मा की मौजूदगी में टीम ने मकान की तलाशी ली।
मौके से
- 8 भरे हुए घरेलू सिलेंडर
- 32 खाली सिलेंडर
- 4 कमर्शियल सिलेंडर
बरामद किए गए। आरोपी प्रदीप साहू को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार सघन आबादी वाले क्षेत्र में इतनी बड़ी संख्या में गैस सिलेंडरों का भंडारण न केवल अवैध था, बल्कि सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर खतरा भी था।
जब्त सिलेंडरों के संबंध में आवश्यक वस्तु अधिनियम सहित संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
गैस संकट के बीच बढ़ी सख्ती
शहर में पिछले कुछ दिनों से एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति प्रभावित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम में तकनीकी समस्या आ रही है और बुकिंग के बाद भी समय पर डिलीवरी नहीं मिल रही।
कई गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखी जा रही हैं। होटल और रेस्टोरेंट संचालकों ने भी कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई बाधित होने की बात कही है, जिससे शादी समारोह और व्यावसायिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।
एजेंसियों पर निगरानी, अधिकारियों की तैनाती
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने गैस एजेंसियों पर निगरानी बढ़ा दी है। वितरण के दौरान अधिकारियों की तैनाती का निर्णय लिया गया है, ताकि घरेलू सिलेंडर पात्र उपभोक्ताओं तक ही पहुंचें और कालाबाजारी पर रोक लगाई जा सके।
हाल ही में एक रेस्टोरेंट से घरेलू सिलेंडरों के दुरुपयोग पर पांच सिलेंडर जब्त किए गए थे। प्रशासन का दावा है कि शहर में गैस की वास्तविक कमी नहीं है, बल्कि वितरण व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने की आवश्यकता है।
बन रहा स्थानीय मॉडल
इधर, जबलपुर से करीब 30 किलोमीटर दूर बंदरकोला गांव में कई परिवारों ने बायोगैस प्लांट अपनाकर वैकल्पिक व्यवस्था शुरू की है। इसे गैस संकट से निपटने के स्थानीय मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।
सोशल मीडिया पर भी उपभोक्ता बुकिंग और हेल्पलाइन से जुड़ी समस्याओं की शिकायत कर रहे हैं। इससे मांग और आपूर्ति के बीच अस्थायी अवरोध या लॉजिस्टिक समस्या की आशंका जताई जा रही है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शहर की सुरक्षा और उपभोक्ताओं के हितों से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। फिलहाल गैस वितरण व्यवस्था पर प्रशासन की कड़ी नजर बनी हुई है।



