
रजा चौक डिवीज़न, जबलपुर। शहर की रद्दी चौकी के पास स्थित सैफ मस्जिद में दावते इस्लामी के जेरे एहतेमाम जारी 10 रोज़ा तर्बियती ऐतिकाफ ईद उल फित्र का चाँद नज़र आते ही मुकम्मल हो गया। चाँद की तस्दीक के साथ ही मस्जिद का माहौल जहां एक तरफ खुशी और शुक्राने से गूंज उठा, वहीं दूसरी तरफ रुख़्सती के लम्हात में कई आंखें अश्कबार भी नज़र आईं।
10 दिनों तक इबादत, ज़िक्र, तिलावत और तर्बियत में मशगूल रहने वाले नौजवान जब अपने घरों को लौटने लगे तो उनके चेहरों पर एक नई रौशनी और दिलों में एक नया अज्म दिखाई दिया।
इबादत और तर्बियत का यादगार सफर
इस तर्बियती ऐतिकाफ में हर दिन और हर सेशन उलेमाए किराम की निगरानी में पहले से तय प्रोग्राम के मुताबिक चला। फज्र के बाद तफसीर-ए-कुरआन, दिन में दर्स और दीनी बयानात, प्रैक्टिकल सेशन में नमाज़, वुज़ू, गुस्ल और जनाज़े का तरीका, अस्र के बाद सुन्नतों और आदाबे जिंदगी पर हलके—हर मरहले ने नौजवानों की शख्सियत को निखारने का काम किया।
तरावीह के बाद रोजाना सीखी गई बातों का रीवीजन और तहज्जुद की पाबंदी ने रूहानियत को और मजबूत किया। ऐतिकाफ का हर लम्हा फिक्र-ए-आखिरत और इस्लामी जिंदगी की तैयारी में गुज़रा।
“मकसद था जिंदगी में अमली इंक़लाब”
सैफ मस्जिद के इमाम और दावते इस्लामी के मुबल्लिग हाफिज इमरान अत्तारी साहब ने बताया कि इस तर्बियती ऐतिकाफ का असल मकसद यही था कि नौजवान 10 दिन ऐसे माहौल में रहें जहां उनकी सोच, आदतें और रोजमर्रा की जिंदगी इस्लामी उसूलों के मुताबिक ढल जाए।
उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल दौर में जब गुमराही के असबाब हर हाथ में मौजूद हैं, ऐसे में मस्जिद का यह तर्बियती निजाम नौजवानों को सही राह दिखाने की एक अहम कोशिश है।
नौजवानों ने क्या कहा
ऐतिकाफ में शामिल कई नौजवानों ने बताया कि इन 10 दिनों ने उनकी जिंदगी का रुख बदल दिया। नमाज़ की पाबंदी, दुआओं की आदत, बड़ों का अदब और वक्त की कद्र—इन सब चीजों में उन्होंने खुद में साफ तब्दीली महसूस की।
कुछ नौजवानों ने कहा कि मोबाइल और बेकार मशगलों से दूर रहकर उन्हें जो सुकून मिला, वह उनकी जिंदगी का अनमोल तजुर्बा है। उन्होंने इरादा किया कि अब वे अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में सीखी हुई बातों पर अमल जारी रखेंगे।
चाँद की खबर और रुख़्सती का मंज़र
जैसे ही ईद का चाँद नज़र आने की खबर पहुंची, मस्जिद में अल्हम्दुलिल्लाह की सदाएं बुलंद हुईं। मगर साथ ही ऐतिकाफ की रुख़्सती का एहसास भी दिलों को नम कर गया। उलेमाए किराम ने आखिर में खास दुआ कराई और नौजवानों को दीन पर इस्तिकामत के साथ कायम रहने की ताकीद की।
शहर के दीनदार हलकों में इस तर्बियती ऐतिकाफ की कामयाबी पर खुशी जताई जा रही है। सैफ मस्जिद में हुआ यह रूहानी इज्तिमा एक बार फिर इस बात का पैगाम दे गया कि अगर सही माहौल और रहनुमाई मिल जाए, तो नौजवानों की जिंदगी में इंक़लाब लाना नामुमकिन नहीं।



