Advertisement
JabalpurNationalNews

कटनी केस में नया मोड़: क्या बिना जांच बना दी गई ‘मानव तस्करी’ की कहानी? परिजनों के वीडियो के बाद उठे बड़े सवाल!

जबलपुर/कटनी। मध्य प्रदेश के कटनी रेलवे स्टेशन पर 11 अप्रैल की देर रात हुई बड़ी कार्रवाई अब कई सवाल खड़े कर रही है। पश्चिम मध्य रेलवे के जबलपुर मंडल अंतर्गत कटनी स्टेशन पर पटना–पुणे एक्सप्रेस से 167 मुस्लिम बच्चों को रेल सुरक्षा बल (आरपीएफ) द्वारा रेस्क्यू किए जाने के बाद जहां एक ओर मानव तस्करी की आशंका जताई गई, वहीं अब सामने आए एक वीडियो और परिजनों के दावों ने मामले को नया मोड़ दे दिया है।

क्या है पूरा मामला

खुफिया सूचना के आधार पर आरपीएफ, जीआरपी, महिला एवं बाल विकास विभाग और बाल संरक्षण इकाई की संयुक्त टीम ने ट्रेन के प्लेटफॉर्म नंबर 5 पर पहुंचते ही घेराबंदी कर बच्चों को उतारा। ये बच्चे एस1, एस2, एस3, एस4 और एस7 कोच में सवार थे। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई कि बच्चों को बिहार से महाराष्ट्र मजदूरी या अन्य गैर-कानूनी काम के लिए ले जाया जा रहा था।

विज्ञापन

बच्चों के साथ मौजूद सद्दाम नामक व्यक्ति ने खुद को महाराष्ट्र के लातूर स्थित एक मदरसे का शिक्षक बताया और दावा किया कि वह इन बच्चों को पढ़ाई के लिए ले जा रहा था। उसके अनुसार, बच्चे बिहार के अररिया जिले के गांवों के रहने वाले हैं और पिछले तीन वर्षों से मदरसे में पढ़ रहे हैं।

वीडियो से बदला नैरेटिव

एपीसीआर जबलपुर द्वारा मुहय्या कराया गया वीडियो

अब इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक वीडियो सामने आया है, जिसमें कथित रूप से बच्चों के परिजन यह कहते नजर आ रहे हैं कि उनके बच्चे किसी मजदूरी के लिए नहीं बल्कि पढ़ाई के लिए मदरसे जा रहे थे। परिजनों के मुताबिक, स्कूल की छुट्टियों में बच्चे अपने गांव आए थे और अब उन्हें वापस महाराष्ट्र भेजा जा रहा था। वीडियो में यह भी दावा किया जा रहा है कि बच्चों को लेकर जा रहे मौलवी ही उन्हें नियमित रूप से पढ़ाने के लिए ले जाते हैं।

विज्ञापन

जांच एजेंसियां सतर्क, कानूनी लड़ाई की तैयारी

मामले के तूल पकड़ने के बाद अब सामाजिक और कानूनी संगठन भी सक्रिय हो गए हैं। एपीसीआर (Association for Protection of Civil Rights) और जमीयत उलेमा-ए-हिंद की लीगल सेल इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए कानूनी लड़ाई की तैयारी कर रही हैं। संगठनों का कहना है कि बिना पूरी जांच के बच्चों को “बंधुआ मजदूर” बताना जल्दबाजी हो सकती है।

प्रशासन का पक्ष

बाल सुरक्षा अधिकारी मनीष तिवारी के अनुसार विभाग को पहले इन बच्चों से मजदूरी कराए जाने की सूचना मिली थी, जिसके आधार पर कार्रवाई की गई। फिलहाल सभी बच्चों को सुरक्षा में रखा गया है और उनकी काउंसलिंग की जा रही है। साथ ही परिजनों, दस्तावेजों और साथ यात्रा कर रहे लोगों की भूमिका की जांच जारी है।

कटनी आरपीएफ थाना प्रभारी वीरेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि जब तक हर बच्चे की पहचान, अभिभावकों से संपर्क और यात्रा के उद्देश्य की पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक बच्चों को प्रशासन की निगरानी में रखा जाएगा।

असली सवाल अब भी कायम

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या ये बच्चे मानव तस्करी का शिकार होने जा रहे थे या फिर वे वास्तव में मदरसे में पढ़ने वाले छात्र हैं?
जांच पूरी होने के बाद ही सच्चाई सामने आ सकेगी, लेकिन फिलहाल यह मामला प्रशासनिक कार्रवाई, संवेदनशीलता और सामाजिक धारणा—तीनों के बीच संतुलन की चुनौती बन गया है।

Jabalpur Baz

बाज़ मीडिया जबलपुर डेस्क 'जबलपुर बाज़' आपको जबलपुर से जुडी हर ज़रूरी खबर पहुँचाने के लिए समर्पित है.
Back to top button

You cannot copy content of this page