Baz World: गाज़ा पर बड़े हमले की तैयारी, सीज़फायर 3200 बार टूटा

गाज़ा | 10 जून 2026 | BAZ News Network (BNN) | BAZ Desk | Bazmedia.in
News in Short
- इज़राइली फौज ने गाज़ा में बड़े ज़मीनी हमले के कई प्लान मंज़ूर किए, सदर्न कमांड ने तैयारी शुरू की।
- अक्टूबर सीज़फायर के बाद से 3,200 से ज़्यादा उल्लंघन, 980 से ज़्यादा फ़लस्तीनी हलाक — जिनमें 300 से ज़्यादा बच्चे, महिलाएं और बुज़ुर्ग।
- काहिरा में जारी बातचीत में हमास ने इज़राइल से हमले रोकने, 600 ट्रक राहत सामग्री और पुरानी सीज़फायर लाइन पर वापसी की मांग की।
गाज़ा पर बड़े हमले की योजना इज़राइली फौज के अंदर तेज़ी से आगे बढ़ रही है। मिलिट्री चीफ ऑफ स्टाफ एयाल ज़मीर ने सदर्न कमांड के कई ऑपरेशनल प्लान को हरी झंडी दे दी है। यह जानकारी इज़राइली अखबार हारेत्ज़ ने दी है।
गाज़ा पर बड़े हमले के लिए कौन से इलाके निशाने पर हैं
इज़राइली फौज का मानना है कि अगर बड़ा ज़मीनी हमला होता है तो उन्हें ऐसे इलाकों में घुसना होगा जहां वो अब तक नहीं गए। इनमें मध्य गाज़ा के रिफ्युजी कैंप, दक्षिणी गाज़ा का मुवासी इलाका — जहां लाखों बेघर फ़लस्तीनी रह रहे हैं — और गाज़ा सिटी के बड़े हिस्से शामिल हैं। इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पिछले हफ्ते कह चुके हैं कि उन्होंने फौज को गाज़ा के 70 फ़ीसद हिस्से पर कंट्रोल लेने का हुक्म दिया है — और यह सिर्फ “शुरुआत” है। इससे करीब 20 लाख फ़लस्तीनी एक छोटे से कोने में सिमटने पर मजबूर हो रहे हैं।
सीज़फायर का हाल — 3,200 उल्लंघन, 980 से ज़्यादा मौतें
अक्टूबर में लागू हुए सीज़फायर को इज़राइल 3,200 से ज़्यादा बार तोड़ चुका है। इस दौरान 980 से ज़्यादा फ़लस्तीनी मारे गए हैं, जिनमें 300 से ज़्यादा बच्चे, महिलाएं और बुज़ुर्ग हैं। सिर्फ मई में 119 फ़लस्तीनी हलाक हुए — यह इस साल का सबसे बड़ा मासिक आंकड़ा है। मरने वालों में 19 बच्चे और 10 महिलाएं थीं। अपार्टमेंट बिल्डिंग, बाज़ार, गाड़ियां और कैफे — सब पर हमले हो रहे हैं। कई घरों को बमबारी से महज़ कुछ मिनट पहले निकलने का नोटिस मिला, बहुतों को तो वो भी नहीं।
मार्च में इज़राइली फौज ने राहत संगठनों को चुपके से नए नक्शे भेजे जिनमें दिखाया गया कि वो सीज़फायर समझौते में तय “येलो लाइन” से 11 फ़ीसद आगे बढ़ चुकी है। इससे गाज़ा का 64 फ़ीसद हिस्सा — जबकि समझौते में सिर्फ 53 फ़ीसद तय था — इज़राइली कंट्रोल में आ गया।
काहिरा बातचीत — हमास की तीन मांगें, इज़राइल का इनकार
काहिरा में मिस्र की मध्यस्थी में फ़लस्तीनी गुटों के बीच बातचीत का नया दौर जारी है। हमास और दूसरे गुटों ने मीडिएटर्स को साफ बता दिया है — जब तक इज़राइल हमले नहीं रोकता, दूसरे फेज़ की बात नहीं हो सकती। हमास की तीन मांगें हैं: हमले बंद हों, 600 ट्रक राहत सामग्री रोज़ाना आने दी जाए जैसा समझौते में था, और इज़राइली फौज अक्टूबर की सीज़फायर लाइन पर वापस जाए। हमास के एक अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया — “इज़राइल इनमें से किसी भी मांग पर कोई वादा करने को तैयार नहीं है।”
संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी — जंगी जुर्म की आशंका
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने इज़राइल के हमलों की तीखी निंदा की है। उन्होंने कहा — “मारे जाने का यह बेरोकटोक सिलसिला इज़राइल की पूरी बेलगामी को दिखाता है।” UN के फ़लस्तीनी इलाकों के दफ्तर के प्रमुख अजीत सुंघाय ने कहा कि गाज़ा में जंगी जुर्म होने की चिंता थमी नहीं है। इज़राइली डिफेंस मिनिस्टर इज़राइल काट्ज़ ने माना है कि इज़राइल का मकसद बड़ी तादाद में फ़लस्तीनियों को गाज़ा से निकालना है — जिसे वो “स्वेच्छिक पलायन” कहते हैं, मगर मानवाधिकार संगठन इसे नस्लीय सफाए की योजना बताते हैं। 7 अक्टूबर 2023 से अब तक 72,980 से ज़्यादा फ़लस्तीनी मारे जा चुके हैं।
गाज़ा में हालात हर गुज़रते दिन के साथ और ख़राब हो रहे हैं। काहिरा में बातचीत जारी है लेकिन ज़मीन पर हमले नहीं रुके। दुनिया देख रही है — मगर फ़लस्तीनी अवाम के लिए राहत कहीं नज़र नहीं आती।
📌 Sources & References
- Quds News Network (QNN)
- Haaretz
- Reuters
- UN Human Rights Office



