
लखनऊ | 15 मई 2025 | BAZ News Network (BNN) | BAZ Desk | Bazmedia.in
News in Short
- उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद, वाराणसी और बागपत जिलों में कथित अवैध मस्जिद और मदरसों पर बुलडोजर कार्रवाई।
- वाराणसी में 200 साल पुरानी मस्जिद को महज 22 मिनट में ढहाया गया, बागपत में भी मदरसे के हिस्से तोड़े गए।
- प्रशासन का दावा — बिना अनुमति निर्माण, स्थानीय समुदाय में चिंता और नाराजगी।
उत्तर प्रदेश में बुधवार को धार्मिक ढांचों पर बुलडोजर कार्रवाई की एक नई लहर चली, जिसमें गाजियाबाद, वाराणसी और बागपत जिलों में कथित अवैध मस्जिद और मदरसा इमारतों को ढहा दिया गया। प्रशासन ने इन्हें बिना अनुमति निर्माण बताया, लेकिन स्थानीय निवासियों और धार्मिक समूहों ने इस कार्रवाई पर गहरी चिंता जताई है। इस मामले ने एक बार फिर धार्मिक संवेदनशीलता के मुद्दों को उठाया है।
गाजियाबाद और वाराणसी में हुई कार्रवाई
गाजियाबाद के डासना क्षेत्र में अधिकारियों ने मदरसा अरबिया इस्लाम को बुलडोजर से ढहा दिया। इस कार्रवाई में भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। इसी तरह वाराणसी में भी रात के समय एक लगभग 200 साल पुरानी मस्जिद को बुलडोजर चला दिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह तोड़फोड़ महज 22 मिनट के भीतर पूरी कर ली गई, जिससे स्थानीय लोगों में हैरानी और आक्रोश फैल गया।
बागपत में भी मस्जिद-मदरसे के हिस्से तोड़े गए
बागपत जिले के बरौत तहसील के बोपुरा गांव में भी एक और बुलडोजर अभियान चला। यहां मस्जिद और मदरसा इस्लामिया सबीलुल फलाह की इमारत के कुछ हिस्सों को तोड़ा गया। अधिकारियों का कहना है कि कथित अवैध निर्माण की शिकायत के बाद राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने जांच की, जिसमें जरूरी प्रशासनिक अनुमति और दस्तावेजों की कमी पाई गई।
प्रशासन ने अनुमति की कमी का दिया हवाला
जिला मजिस्ट्रेट अस्मिता लाल के निर्देश पर की गई इस कार्रवाई के दौरान प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन का दावा है कि निर्माण प्रक्रिया में अनियमितताएं पाए जाने के बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत ढांचों को हटाया गया। अधिकारियों ने स्थानीय निवासियों और प्रबंधन समितियों को भविष्य में बिना सक्षम प्राधिकरण की अनुमति के कोई भी निर्माण कार्य न करने की चेतावनी भी दी है।
इन ढांचों की तोड़फोड़ से स्थानीय समुदायों में भारी चिंता और आक्रोश पैदा हुआ है। धार्मिक समूहों ने इसे संवेदनहीन और एकतरफा कार्रवाई बताया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय भी बन सकता है।



