छात्रों की आवाज़ उच्च न्यायालय तक पहुँचाने वाले गोहलपुर के अदनान अंसारी — जबलपुर के जागरूक युवा बने मिसाल

जबलपुर। मध्यप्रदेश के कॉलेजों में 8 साल से ठप पड़े छात्र संघ चुनावों को लेकर जबलपुर के एक युवा ने वह कदम उठाया जो लाखों छात्रों की सोच को आवाज़ दे गया। गोहलपुर निवासी अदनान अंसारी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर प्रदेश सरकार से सवाल पूछा — “जब हर साल छात्रों से चुनाव शुल्क वसूला जा रहा है, तो चुनाव क्यों नहीं?” उनकी याचिका पर अब मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से दो हफ्तों में जवाब मांगा है।
अदनान अंसारी जबलपुर के एक शिक्षित और सामाजिक रूप से सक्रिय युवा हैं, जो लंबे समय से शिक्षा, पारदर्शिता और छात्र अधिकारों के लिए आवाज़ उठा रहे हैं। उन्होंने अपने स्तर पर कई कॉलेजों के छात्रों से राय लेकर यह जनहित याचिका तैयार की, जिसमें लिंगदोह समिति की सिफ़ारिशों के तहत चुनाव बहाल करने की मांग की गई है।
अदनान मानते हैं कि —
“छात्र संघ सिर्फ राजनीति नहीं, नेतृत्व सीखने का मंच है। यह युवाओं को ज़िम्मेदारी और संवाद का संस्कार देता है।”
अदनान अंसारी की पहल के बाद प्रदेश के विभिन्न कॉलेजों के छात्र भी सोशल मीडिया पर इस मांग का समर्थन कर रहे हैं। कई शिक्षा विशेषज्ञों ने इसे “लोकतंत्र की बुनियाद को मज़बूत करने वाला कदम” बताया है।
🔹 युवा नेतृत्व की नई मिसाल
अदनान अंसारी का कहना है कि यह सिर्फ अदालत का मामला नहीं, बल्कि न्याय और जवाबदेही की लड़ाई है। उन्होंने कहा —
“सरकारें बदलती हैं, लेकिन छात्र हमेशा सबसे बड़ी ताक़त रहते हैं। अगर हम अपने अधिकारों के लिए नहीं खड़े होंगे, तो कोई भी हमें प्रतिनिधित्व नहीं देगा।”
🔹 बाज मीडिया का संपादकीय दृष्टिकोण
बाज मीडिया का मानना है कि ऐसे युवाओं की पहल समाज में लोकतांत्रिक सोच को मज़बूत करती है। अदनान अंसारी जैसे युवा हमारे दौर के “सिविक हीरोज़” हैं, जो शब्दों से नहीं, दस्तावेज़ों और तथ्यों से सवाल पूछते हैं।
अब पूरा प्रदेश यह देख रहा है कि राज्य सरकार अदालत के समक्ष क्या जवाब पेश करती है — और क्या अदनान अंसारी की यह कानूनी लड़ाई आने वाले महीनों में छात्र राजनीति की पुनर्बहाली का रास्ता खोलेगी।



