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Special Report : ओवरचार्जिंग, पुरानी बैटरी, गलत चार्जर — जबलपुर में ई-रिक्शा ‘मोबाइल बम’ बने… इंदौर की घटना ने चेतावनी दे दी!

मेंटेनेंस की अनदेखी किसी भी वक्त बन सकती है बड़ा हादसा

जबलपुर। शहर में ई-रिक्शा अब सिर्फ ट्रैफिक जाम या अव्यवस्था की समस्या नहीं रहे—ये अब सीधे-सीधे जानलेवा खतरे में बदलते जा रहे हैं। इंदौर में हाल ही में ई-रिक्शा की बैटरी फटने से महिला की मौत की घटना ने जबलपुर में भी प्रशासन और नागरिकों दोनों के सामने खतरे की घंटी बजा दी है। यहाँ करीब 10,000 से अधिक ई-रिक्शा बिना किसी फिटनेस टेस्ट, तकनीकी जांच, मेंटेनेंस और सुरक्षा मानकों के हर दिन सड़कों पर दौड़ रहे हैं।

पुरानी-खराब बैटरियों पर निर्भर ढेरों वाहन

शहर में चल रहे अधिकांश ई-रिक्शा में—

  • एक्सपायर्ड,
  • ओवरहीट होने वाली,
  • और तकनीकी रूप से असुरक्षित बैटरियां लगी हुई हैं।

स्थानीय बैटरी विक्रेताओं का कहना है कि बैटरी की उम्र आमतौर पर 2-4 साल होती है, परंतु चालक इन्हीं बैटरियों को तीन से चार साल तक खींचते रहते हैं।
मेंटेनेंस लगभग शून्य—

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  • बैटरी की सफाई नहीं
  • डिस्टिल्ड वाटर का उपयोग नहीं
  • सुरक्षित चार्जिंग की जानकारी नहीं

ऐसे में ये वाहन सड़क पर दौड़ते ‘चलते-फिरते बम’ बन चुके हैं।

ओवरचार्जिंग और गलत चार्जर—सबसे बड़ा विस्फोट जोखिम

विशेषज्ञों के अनुसार बैटरी विस्फोट के 3 मुख्य कारण सामने आ रहे हैं:

  1. रातभर ओवरचार्जिंग
    ड्राइवर बैटरी को रातभर चार्ज पर छोड़ देते हैं, जिससे बैटरी अस्थिर हो जाती है।
  2. कम क्षमता वाली बैटरी को हाई वोल्टेज चार्जर से चार्ज करना
    इससे बैटरी के सेल में अत्यधिक गर्मी पैदा होती है और गैस जमा होकर अंदर से दबाव बढ़ता है।
  3. डिस्टिल्ड वाटर की जगह एसिड का उपयोग
    कई ड्राइवर अज्ञानता में एसिड डाल देते हैं, जिससे बैटरी बम की तरह व्यवहार करने लगती है।

बैटरी में बने वेंटिलेशन होल गंदगी से बंद हो जाने पर विस्फोट का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

ई-रिक्शा—ट्रैफिक और सुरक्षा दोनों के लिए नासूर

सिर्फ बैटरी खतरा नहीं, बल्कि ई-रिक्शा चालक भी सड़क सुरक्षा के लिहाज से गंभीर समस्या बन चुके हैं—

  • सड़क के बीच खड़े हो जाना
  • ओवरलोड सवारी बैठाना
  • गलत दिशा (रॉन्ग साइड) से वाहन चलाना
  • सस्पेंशन और पहियों के खराब होने से पलटने की घटनाएँ

शहर में कई मामले ऐसे सामने आए हैं जहाँ अनियंत्रित ई-रिक्शा पलटने से यात्री गंभीर रूप से घायल हुए।

स्कूली बच्चों की जान खतरे में—पुराना आदेश आज भी कागज़ों में कैद

तत्कालीन कलेक्टर दीपक सक्सेना ने पहले ई-रिक्शा की अस्थिरता और कमजोर सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए ई-रिक्शा से स्कूली बच्चों को ले जाने पर प्रतिबंध लगाया था।

लेकिन आज भी शहर में सैकड़ों ई-रिक्शा रोजाना बच्चों को स्कूल लाते-ले जाते दिखाई देते हैं।
तकनीकी खराबी या बैटरी विस्फोट की स्थिति में सबसे अधिक जोखिम इन्हीं मासूम बच्चों पर है।

प्रशासन हरकत में—जल्द अभियान चलाने की तैयारी

ट्रैफिक डीएसपी संतोष शुक्ला ने कहा कि:

“जल्द ही ई-रिक्शा चालकों को बैटरी मेंटेनेंस और सुरक्षा नियमों की ट्रेनिंग दी जाएगी। आगे सख्ती भी बढ़ाई जाएगी।”

वहीं बैटरी विशेषज्ञों का स्पष्ट चेतावनी है कि—

जब तक अनिवार्य फिटनेस जांच, बैटरी टेस्टिंग और पुराने ई-रिक्शा की तकनीकी स्क्रीनिंग नहीं होती, तब तक बड़ा हादसा किसी भी दिन हो सकता है।

इंदौर की घटना ने दी चेतावनी—जबलपुर कब जागेगा?

जबलपुर में ई-रिक्शा भले ही सस्ता और सुविधाजनक परिवहन माध्यम हों, लेकिन प्रशासन की चुप्पी और मेंटेनेंस की अनदेखी इन्हें ‘मौत का वाहन’ बनाती जा रही है।

इंदौर की घटना ने यह साबित कर दिया है कि बैटरी कोई छोटी चीज़ नहीं—
गलत हैंडलिंग पर ये सड़क पर चलते-चलते फट सकती हैं।

अब बड़ा सवाल यह है—

क्या जबलपुर प्रशासन समय रहते कार्रवाई करेगा
या किसी बड़े हादसे के बाद जागेगा?

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