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उपनेता प्रतिपक्ष शगुफ्ता उस्मानी का ऐलान: महापौर ने जनता की पीड़ा पर साधी चुप्पी, अब चौराहों पर लगेगा ‘समानांतर सदन’

दूषित पेयजल पर कांग्रेस का हमला, धारा 30 की बैठक न बुलाने पर महापौर को घेरा
जबलपुर। नगर निगम में धारा 30 की बैठकें न बुलाए जाने और शहर में लगातार बिगड़ती पेयजल व्यवस्था को लेकर कांग्रेस पार्षद दल ने एक बार फिर भाजपा नेतृत्व वाली नगर सत्ता पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस पार्षद दल ने स्पष्ट आरोप लगाया कि पिछले डेढ़ साल में आधा दर्जन से अधिक बार धारा 30 की बैठक बुलाने को लेकर मांग पत्र सौंपे गए, लेकिन आज तक नतीजा शून्य है। दूषित पेयजल से शहर की जनता भयभीत है, बावजूद इसके महापौर जनहित के मुद्दों से मुंह फेरकर निरंकुश रवैया अपनाए हुए हैं।

पत्रकार वार्ता में उपनेता प्रतिपक्ष शगुफ्ता उस्मानी गुड्डू नबी ने कहा कि नगर निगम सदन जनता की समस्याएं सुनने और समाधान का मंच होता है, लेकिन वर्तमान में सदन को जानबूझकर निष्क्रिय रखा जा रहा है। इंदौर की घटना के बाद भी कांग्रेस ने धारा 30 की बैठक बुलाने को लेकर मांग पत्र सौंपा था, परंतु महापौर और नगर सत्ता ने आज तक कोई जवाब नहीं दिया। यह विपक्ष की आवाज दबाने और जनता के सवालों से बचने का प्रयास है।

वहीं पार्षद श्रीमती मुकीमा याकूब अंसारी ने कहा कि शहर में दूषित पेयजल की आपूर्ति एक गंभीर संकट बन चुकी है। पानी की टंकियों में लीकेज, नालियों के बीच से गुजरती पेयजल पाइप लाइनें और सीवर व पेयजल लाइनों का मिलान न होना, आम नागरिकों के स्वास्थ्य के साथ खुला खिलवाड़ है। इसके बावजूद नगर निगम और महापौर आंख मूंदे बैठे हैं।

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कांग्रेस पार्षद दल ने स्पष्ट किया कि पत्रकार वार्ता का उद्देश्य केवल मीडिया के माध्यम से जनता तक अपनी आवाज पहुंचाना है, क्योंकि विपक्ष की बातों को लगातार दबाया जा रहा है। इसी के चलते कांग्रेस ने निर्णय लिया है कि आंदोलन और प्रदर्शन जारी रहेंगे तथा आगामी दिनों में शहर के सभी प्रमुख चौराहों पर ‘समानांतर सदन’ लगाकर भाजपा सरकार और नगर निगम की नाकामियों को जनता के सामने उजागर किया जाएगा।

कांग्रेस पार्षद दल की प्रमुख मांगें और आरोप

कांग्रेस पार्षद दल ने धारा 30 की बैठक में निम्नलिखित बिंदुओं पर चर्चा की मांग की—

  • महापौर नगर निगम सदन में शहर की दूषित पेयजल समस्या को लेकर श्वेत पत्र प्रस्तुत करें। इसमें यह स्पष्ट किया जाए कि कहां-कहां नालियों से पेयजल पाइप लाइनें गुजर रही हैं और इन्हें कब तक बाहर किया जाएगा।
  • दूषित पानी की आपूर्ति से शहर की जनता भय और असुरक्षा के माहौल में जीने को मजबूर है।
  • शहर की कई पानी की टंकियों में लीकेज है, विशेष रूप से टाउन हॉल की टंकी की स्थिति गंभीर है।
  • अमृत 2.0 योजना के तहत 312 करोड़ रुपये की परियोजना में भारी लापरवाही बरती जा रही है। रांझी क्षेत्र में डिज़ाइन के विपरीत किए जा रहे कार्यों का कांग्रेस पार्षद दल पहले भी विरोध कर चुका है।
  • मुख्य मार्गों पर कार्य के दौरान डायवर्सन न देकर सड़कें बंद की जा रही हैं, जिससे प्रतीत होता है कि ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
  • तिलक वार्ड में सीवर लाइन का सही मिलान न होने से मल-मूत्र नालों में बह रहा है और उन्हीं नालों के भीतर से पेयजल पाइप लाइन गुजर रही है।
  • नर्मदा नदी में मिल रहे गंदे नालों के पानी को लेकर महापौर के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। विगत दिनों दिग्विजय सिंह के ट्वीट के बाद कांग्रेस पार्षद दल ने मौके पर जाकर निरीक्षण किया, जहां पाया गया कि बिना शुद्धिकरण के नालों का पानी नर्मदा में मिल रहा था।
  • लगभग 15 करोड़ रुपये की लागत से गौर नदी, बबहा नाला, सिद्धघाट, नावघाट, खारी घाट, जैन गौशाला और तिलवारा घाट पर लगाए गए ट्रीटमेंट प्लांट्स के उचित रखरखाव के अभाव में आज भी गंदा पानी नर्मदा में मिल रहा है।
  • नगर निगम हर साल पाइप लाइनों के रखरखाव पर 10 से 15 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है, फिर भी लीकेज और पाइप लाइनों की दुर्दशा में कोई सुधार नहीं हो रहा।
  • भोंगाद्वार क्षेत्र में गोबरयुक्त पानी की सप्लाई और उसी प्लांट में बंदर के कई दिनों तक मृत पड़े रहने की घटना, साथ ही रमनगरा की पेयजल पाइप लाइन के बार-बार फूटने से जनता के धन के दुरुपयोग के मामलों को भी कांग्रेस ने फिर से उठाया।

ये रहे उपस्थित नेता

आज की पत्रकार वार्ता में नेता प्रतिपक्ष अमरीश मिश्रा, उपनेता प्रतिपक्ष शगुफ्ता उस्मानी गुड्डू नबी, सचेतक अयोध्या तिवारी, पार्षद श्रीमती मुकीमा याकूब अंसारी, संतोष दुबे पंडा, श्रीमती अरुणा संजय साहू, श्रीमती गार्गी रामकुमार यादव, वकील अंसारी, श्रीमती रितु राजेश यादव, गुलाम हुसैन, अख्तर अंसारी, प्रमोद पटेल, सतेन्द्र चौबे, श्रीमती लक्ष्मी लक्ष्मण गोंटिया, श्रीमती तुलसा लखन प्रजापति एवं श्रीमती अदिति अतुल बाजपेई उपस्थित रहीं।

कांग्रेस पार्षद दल ने दो टूक कहा कि यदि जल्द ही धारा 30 की बैठक बुलाकर शहर के ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा नहीं की गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा और सड़कों से लेकर चौराहों तक जनता के बीच नगर निगम की विफलताओं को उजागर किया जाएगा।

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