
बाज़ मीडिया, रज़ा चौक डिवीज़न, जबलपुर। शहर का सबसे व्यस्त और संवेदनशील मार्ग—अंबेडकर चौक से अब्दुल हमीद चौक—आज आम लोगों के लिए रोज़ की यातना बन चुका है। हर दिन जनाज़े और शव यात्राएं जाम में फंसती हैं, मासूम बच्चे धूप और गर्मी में सड़क किनारे खड़े रहते हैं, वकील समय पर अदालत नहीं पहुंच पाते, कर्मचारी दफ्तर और फैक्ट्रियों में लेट पहुंचते हैं और हजारों नागरिक रोज़ घंटों जाम में तड़पते हैं। कारोबार लगभग ठप हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद सरकार जबलपुर के सबसे जरूरी फ्लायओवर को वर्षों से टालती आ रही है।
यह आरोप पूर्व विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने बुधवार को आयोजित पत्रकारवार्ता में लगाए। उन्होंने कहा कि जबलपुर में वहां फ्लायओवर बना दिए गए जहां कभी जाम नहीं लगता, लेकिन जहां रोज़ लोग जाम में फंसकर परेशान होते हैं, वहां फ्लायओवर को श्रेयबाजी, पक्षपातपूर्ण नीति और “कितने वोट मिले” जैसे अनैतिक सवालों में उलझाकर रोक दिया गया है।
पत्रकारवार्ता के दौरान वरिष्ठ नेता हाजी कदीर सोनी, नगर अध्यक्ष सौरभ शर्मा, नेता प्रतिपक्ष अमरीष मिश्रा, सैय्यद ताहिर अली, गुड्डू नबी उस्मानी, लईक अहमद राजू, हामिद मंसूरी, याकूब अंसारी, आजम अली खान, मुईन अंसारी आदि उपस्थित थे.

30 जनवरी को जनाधिकार न्याय पदयात्रा
पत्रकारवार्ता में विधायक घनघोरिया ने ऐलान किया कि शहर की तीन प्रमुख जनसमस्याओं—फ्लायओवर निर्माण, गोहलपुर फ्लायओवर विस्तार और बिजली संकट—को लेकर कांग्रेस द्वारा 30 जनवरी 2026, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्य तिथि पर जनाधिकार न्याय पदयात्रा निकाली जाएगी। यह पदयात्रा दोपहर 2 बजे अब्दुल हमीद चौक से शुरू होकर बाबा साहब भीमराव अंबेडकर चौक तक पहुंचेगी।
उन्होंने पत्रकारों, अधिवक्ताओं, व्यापारियों और आम नागरिकों से इस आंदोलन में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि सरकार की उपेक्षा के खिलाफ अब सड़क पर उतरना ज़रूरी हो गया है।

शहर की सबसे घनी आबादी को राहत देने वाला फ्लायओवर
बाज मीडिया से चर्चा के दौरान श्री घनघोरिया ने बताया कि प्रस्तावित फ्लायओवर अंबेडकर चौक, घमापुर चौक, सिंधी कैंप, मंडी मदार टेकरी, बहोराबाद होते हुए शहीद अब्दुल हमीद चौक तक लगभग 2500 मीटर लंबा और 7 मीटर चौड़ा है। यह मार्ग न केवल शहर का सबसे व्यस्त मार्ग है, बल्कि इसी पर करिया पत्थर शमशान घाट और मंडी मदर टेकरी कब्रिस्तान भी स्थित हैं।
किसी भी शव यात्रा या मैय्यत के निकलते ही पूरा इलाका घंटों जाम में बदल जाता है, जिससे संवेदनशील हालात में भी लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है।
अस्पताल, स्कूल और न्यायालय जाने वालों की रोज़ की जद्दोजहद
इसी मार्ग से शहर का जिला अस्पताल एल्गिन जाने का रास्ता है। जाम के कारण गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचने में मुश्किलें होती हैं। स्कूल से लौटते बच्चे घंटों जाम में फंसे रहते हैं, जबकि न्यायालय क्षेत्र में होने के कारण अधिवक्ता और वादकारी भी रोज़ लेट पहुंचते हैं। घनघोरिया ने कहा कि यह केवल ट्रैफिक समस्या नहीं, बल्कि मानव संवेदनाओं से जुड़ा मुद्दा है।
2019 से तैयार, फिर भी अटका प्रोजेक्ट
बाज मीडिया से श्री घनघोरिया ने बताया कि वे यह मांग 11 दिसंबर 2019 से लगातार उठा रहे हैं। लोक निर्माण विभाग द्वारा सर्वे, एल-सेपरेशन और साइट प्लान तैयार कर पहले 186.03 करोड़ और बाद में संशोधित 269.22 करोड़ रुपये का प्राक्कलन भेजा गया। सबसे अहम बात यह है कि इस परियोजना में कहीं भी भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता नहीं है, फिर भी सरकार ने आज तक इसे मंजूरी नहीं दी।
विधानसभा से हाईकोर्ट तक संघर्ष
यह मुद्दा विधानसभा में कई बार उठाया गया, मुख्यमंत्री को पत्र लिखे गए और अब यह मामला मध्यप्रदेश हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है। याचिका क्रमांक 16145-2025 पर कोर्ट ने नोटिस जारी कर दिया है और अगली सुनवाई 3 फरवरी 2026 को होगी।
गोहलपुर फ्लायओवर और बिजली संकट भी उठाया
पत्रकारवार्ता में गोहलपुर फ्लायओवर के संकरे पुल से लगने वाले जाम और पूरे क्षेत्र में बार-बार ट्रांसफार्मर जलने, बिजली कटौती, स्मार्ट मीटर की विफलता और बढ़ते बिजली बिलों का मुद्दा भी उठाया गया।
अंत में विधायक लखन घनघोरिया ने साफ शब्दों में कहा—
“यह हमारे क्षेत्र का अधिकार है। हम अपना हक मांग रहे हैं, किसी से भीख नहीं।”



