
बाज मीडिया, रजा चौक डिविजन, जबलपुर ।
जबलपुर में विशेष गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR–2026) के दौरान एक बड़ी साजिश और सुनियोजित खेल का आरोप सामने आया है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि नियम विरुध्द तरीके से फॉर्म-7 भरवाकर हजारों मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से कटवाने की साजिश रची गई। कांग्रेस का दावा है कि यह पूरी प्रक्रिया टारगेट करके, राजनीतिक दबाव में और नियमों को ताक पर रखकर अंजाम दी गई।
बुधवार को कांग्रेस का एक प्रतिनिधि मंडल विधायक लखन घनघोरिया, मतदाता पुनरीक्षण प्रभारी सैय्यद जमीरुद्दीन (फिरोज ठाकरे), वरिष्ठ नेता हाजी कदीर सोनी, नगर कांग्रेस अध्यक्ष सौरभ शर्मा, सैय्यद ताहिर अली, लईक अहमद राजू, गुड्डू नबी उस्मानी, अमरीष मिश्रा, आयोध्या तिवारी, कलीम खान, मुकीमा याकूब अंसारी, हामिद मंसूरी, इस्तियाक अंसारी, अशरफ मंसूरी, शादाब अंसारी, मोहम्मद मेहदी, रितेश गुप्ता, अभिषेक पाठक, प्रमोद पटेल सहित अन्य नेताओं के साथ कलेक्टर कार्यालय पहुँचा।
प्रतिनिधि मंडल ने पूरे मामले से जिला कलेक्टर को अवगत कराया और आरोपों से जुड़े दस्तावेज भी सौंपे।
कलेक्टर ने मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन प्रतिनिधि मंडल को दिया है।

2535 फॉर्म-7, सवालों के घेरे में पूरी प्रक्रिया
कांग्रेस द्वारा कलेक्टर को सौंपे गए मेमोरेंडम में बताया गया कि SIR–2026 के दौरान जो स्थिति सामने आई है, वह बेहद गंभीर और लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। मतदाता सूची सुधार के नाम पर फॉर्म-7 के माध्यम से बड़ी संख्या में ऐसी आपत्तियाँ दर्ज कराई गईं, जिनका कोई ठोस आधार नहीं है।
खुद जिला निर्वाचन अधिकारी ने 22 जनवरी 2026 को यह जानकारी दी कि पूरे जिले से करीब 2535 फॉर्म-7 जमा किए गए। इतनी बड़ी संख्या में आपत्तियाँ यह सवाल खड़ा करती हैं कि क्या वाकई इतनी गड़बड़ियाँ थीं, या फिर जानबूझकर मतदाता सूची से नाम हटाने की कोशिश की गई।
न अधिकृत BLO-2, न जानकारी—फिर भी आपत्ति
मेमोरेंडम में आरोप लगाया गया है कि इनमें से लगभग 200 फॉर्म-7 ऐसे लोगों द्वारा भरे गए, जो न तो संबंधित क्षेत्र के अधिकृत BLO-2 थे और न ही उन्हें उन मतदाताओं की कोई वैधानिक या वास्तविक जानकारी थी।
जबकि निर्वाचन आयोग के नियम साफ कहते हैं कि किसी भी मतदाता के नाम पर आपत्ति सिर्फ उसी भाग संख्या के अधिकृत BLO-2 ही दर्ज कर सकता है। इसके बावजूद नियमों को नज़रअंदाज़ कर फॉर्म-7 स्वीकार किए गए, जिससे पूरी चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
कौन-कौन बना निशाना?
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि इन आपत्तियों के ज़रिये चुनिंदा लोगों को निशाना बनाया गया, जिनमें—
- चुनाव प्रक्रिया में काम कर रहे बूथ लेवल अधिकारी (BLO)
- वर्तमान और पूर्व पार्षद
- अल्पसंख्यक, दलित, पिछड़ा और आदिवासी वर्ग के मतदाता
शामिल हैं। आरोप है कि इन सभी को बिना किसी ठोस सबूत के एक खास राजनीतिक दल, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, से जुड़ा मान लिया गया और इसी आधार पर उनके नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश की गई।
निष्पक्ष चुनाव पर सीधा हमला
राजनीतिक जानकारों और कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इस तरह की सामूहिक, चयनात्मक और पक्षपातपूर्ण आपत्तियाँ लोकतंत्र की बुनियादी सोच के खिलाफ हैं। अगर मतदाता का नाम उसकी राजनीतिक सोच या पहचान के शक में काटा जाएगा, तो यह न तो न्यायसंगत है और न ही स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की भावना के अनुरूप।
कानून क्या कहता है?
मेमोरेंडम में निर्वाचन नियमों के पैरा-31 का हवाला देते हुए कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर गलत जानकारी देकर मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की कोशिश करता है, तो यह दंडनीय अपराध है।
इस अपराध में एक साल तक की जेल, जुर्माना, या दोनों का प्रावधान है।
इसके बावजूद अब तक फर्जी और दुर्भावनापूर्ण आपत्तियाँ दर्ज कराने वालों पर कोई सख्त कार्रवाई न होना प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े करता है।
मतदाताओं में डर, जवाब की मांग
इस पूरे मामले ने आम मतदाताओं के बीच डर और असमंजस पैदा कर दिया है। कांग्रेस नेताओं ने मांग की है कि—
- फर्जी फॉर्म-7 की निष्पक्ष जांच कराई जाए
- नियम तोड़ने वालों पर कानूनी कार्रवाई हो
- और जिन पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से काटे गए हैं, उन्हें तुरंत मतदाता सूची में वापस जोड़ा जाए
कांग्रेस का कहना है कि अगर मतदाता ही सुरक्षित नहीं रहेगा, तो लोकतंत्र भी सुरक्षित नहीं रह पाएगा। अब निगाहें जिला प्रशासन और निर्वाचन आयोग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
जिला कलेक्टर से मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने निम्न समस्याओं और मांगों से भी कलेक्टर को अवगत कराया और कार्यवाही और समाधान की मांग की,
- पात्र मतदाताओं के नाम मनमाने ढंग से हटाए जाने पर तत्काल रोक लगाई जाए और उनकी निष्पक्ष जांच हो।
- SIR-2026 की प्रक्रिया को संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 326 के अनुरूप, पारदर्शी और सरल बनाया जाए।
- जिन मतदाताओं ने सभी दस्तावेज, शपथ-पत्र और फॉर्म समय पर जमा किए, उनके नाम तुरंत मतदाता सूची में पुनः जोड़े जाएं।
- वर्ष 2023-24 में मतदान कर चुके मतदाताओं को भी पत्रक न मिलने और नाम हटने की जांच की जाए।
- ऑनलाइन अपलोडिंग और डेटा एंट्री की तकनीकी त्रुटियों का खामियाजा मतदाता और BLO से न वसूला जाए।
- लॉजिकल डिस्टेंसिंग, नो-मैपिंग जैसी जटिल तकनीकी प्रक्रियाओं के नाम पर मतदाताओं को बार-बार नोटिस देकर परेशान करना बंद किया जाए।
- मतदाताओं को अनावश्यक आपत्ति केंद्रों के चक्कर लगाने से राहत दी जाए, जिससे मानसिक, शारीरिक और आर्थिक उत्पीड़न रुके।
- बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) पर अतिरिक्त और गैर-ज़रूरी कार्यभार व किसी भी तरह का राजनीतिक दबाव तुरंत रोका जाए।
- जिन पात्र मतदाताओं के Form-6 स्वीकार नहीं किए जा रहे, उन्हें तत्काल फॉर्म उपलब्ध कराए जाएं और आवेदन स्वीकार हों।
- वर्षों पहले स्थानांतरित मतदाता और विवाह के बाद पते बदल चुकी महिलाओं के मामलों में मतदाता सूची को सही किया जाए।
- अपात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाएं, लेकिन इसके साथ-साथ वर्तमान पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने की प्रक्रिया आसान हो।
- हर क्षेत्र में एक-दिवसीय विशेष शिविर (Special Camp) लगाकर मौके पर ही समस्याओं का समाधान किया जाए।
- सभी लंबित और विवादित आपत्तियों का निपटारा निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से किया जाए।



