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जबलपुर: रमज़ान में वार्ड को साफ रखने की जिम्मेदारी टीम शफीक ने उठाई, “नगर निगम की अनदेखी का रोना नहीं — अब खुद करेंगे खिदमत”

जबलपुर। रमज़ान के पाक महीने में जहां एक ओर लोग इबादत और रोज़ों में मशगूल हैं, वहीं दूसरी ओर शहर के डॉ. जाकिर हुसैन वार्ड में एक अलग मिसाल पेश की गई है। पूर्व पार्षद शफीक हीना और उनकी टीम ने नगर निगम की अनदेखी का रोना रोने के बजाय खुद मैदान में उतरकर वार्ड को साफ-सुथरा रखने की जिम्मेदारी उठा ली है।

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“30 रोज़ा ख़िदमत-ए-रमज़ान” के नाम से शुरू की गई इस मुहीम का मकसद रमज़ान के पूरे महीने मस्जिदों, इफ्तार गाहों और मुस्लिम बहुल गलियों में सफाई व्यवस्था को दुरुस्त रखना है, ताकि नमाज़ियों की इबादत में किसी तरह की रुकावट न आए।


शिकायत नहीं, समाधान का रास्ता

लोग सड़कों पर फैली गंदगी, जाम नालियों और कचरे के ढेर को लेकर नगर निगम पर सवाल उठाते रहे हैं। लेकिन इस बार टीम शफीक ने अलग रास्ता चुना।

टीम के सदस्यों का कहना है कि “अगर हम हर बार सिर्फ शिकायत करते रहेंगे, तो हालात नहीं बदलेंगे। रमज़ान खिदमत और जिम्मेदारी का महीना है—इसलिए हमने खुद आगे आने का फैसला किया।”


मस्जिदों और इफ्तार गाहों पर विशेष फोकस

मुहीम के तहत:

  • मस्जिदों के आसपास और रास्तों की नियमित सफाई
  • इफ्तार से पहले और बाद में मुकम्मल सफाई इंतज़ाम
  • वार्ड की गलियों में रोजाना निगरानी
  • जहां कचरा दिखे, वहां तुरंत कार्रवाई

टीम का कहना है कि गंदगी के कारण नमाज़ियों को मस्जिद आने-जाने में परेशानी होती है, जिससे उनकी एकाग्रता प्रभावित होती है। रमज़ान में यह स्थिति न बने, इसलिए यह जिम्मेदारी खुद उठाई गई है।


“सफाई आधा ईमान है” – अमल की कोशिश

इस मुहीम की प्रेरणा उस हदीस से ली गई है जिसमें हमारे प्यारे नबी हज़रत मुहम्मद ﷺ ने फरमाया कि “सफाई आधा ईमान है।”

टीम का कहना है कि अगर हम अपने घर को साफ रखते हैं, तो अपने मोहल्ले और मस्जिदों के रास्तों को भी वैसा ही समझना चाहिए।


वार्डवासियों से भी अपील

टीम शफीक ने लोगों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है:

  • इफ्तार के बाद कचरा इधर-उधर न फेंकें
  • घरेलू कचरा निर्धारित स्थान पर ही डालें
  • बच्चों और नौजवानों को सफाई के लिए जागरूक करें
  • मस्जिदों के रास्तों को गंदा न होने दें

एक नई सोच की शुरुआत?

राजनीतिक हलकों में भी इस पहल को अलग नजरिए से देखा जा रहा है। जहां आमतौर पर विपक्षी दल नगर निगम की नाकामी को मुद्दा बनाते हैं, वहीं टीम शफीक ने जमीनी स्तर पर काम कर एक अलग संदेश देने की कोशिश की है—“खिदमत सिर्फ बयान से नहीं, मैदान से होती है।”

अब देखना यह है कि यह मुहीम रमज़ान के बाद भी जारी रहती है या नहीं। फिलहाल, डॉ. जाकिर हुसैन वार्ड में सफाई को लेकर एक नई हलचल जरूर दिखाई दे रही है।

Jabalpur Baz

बाज़ मीडिया जबलपुर डेस्क 'जबलपुर बाज़' आपको जबलपुर से जुडी हर ज़रूरी खबर पहुँचाने के लिए समर्पित है.
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