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सिहोरा हिंसा: अमन लौटा, जनजीवन सामान्य, गिरफ्तारियां जारी… तीन दिन की हलचल ने खड़े किए कई बड़े सवाल, कार्रवाई की निष्पक्षता पर उठे सवाल

जबलपुर । गुरुवार रात भड़के साम्प्रदायिक तनाव के बाद सिहोरा अब धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है। तीसरे दिन शनिवार सुबह बाजार खुलने लगे, सड़कों पर चहल-पहल दिखी और लोग रोजमर्रा के कामों में जुटते नजर आए। प्रशासन का दावा है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है, लेकिन बीते तीन दिनों में जो कुछ हुआ उसने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—सबसे बड़ा सवाल पुलिस कार्रवाई की निष्पक्षता और दिशा को लेकर उठ रहा है।

60 से अधिक गिरफ्तारियां, पर असली उपद्रवी कौन?

तनाव के बाद से अब तक पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए अब तक 60 से अधिक संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। देर रात तक संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च निकाला गया और बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया।  

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हालांकि स्थानीय स्तर पर आरोप लग रहे हैं कि‘पत्थराव शुरू करने वालों’ की पहचान के नाम पर ताबड़तोड़ गिरफ्तारियां की जा रही हैं, वही दूसरी तरफ‘पत्थराव की आड़ में’ पूरे सिहोरा में कोहराम और आतंक मचाने वाले असामाजिक तत्व अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जो लोग उपद्रव के दौरान मस्जिद में फंसे हुए थे, उन्हें ही आरोपी मान लिया गया !!

पुलिस प्रशासन की ओर से फिलहाल यही कहा जा रहा है कि जांच निष्पक्ष और तथ्यों के आधार पर की जा रही है, तथा किसी भी निर्दोष को परेशान नहीं किया जाएगा।

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हालात पर काबू पाने में जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह और पुलिस अधीक्षक सम्पत उपाध्याय की तत्परता और सक्रिय नेतृत्व की सराहना की जा रही है। दोनों अधिकारियों की समय पर मौजूदगी और लगातार मॉनिटरिंग का ही परिणाम रहा कि स्थिति बेकाबू होने के बाद भी शीघ्र नियंत्रण में आ गई और किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।

हालांकि, दूसरी ओर सिहोरा पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि उपद्रव के बाद की गई गिरफ्तारियों में एक पक्षीय रुख अपनाया गया है। इन आरोपों के चलते कार्रवाई की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर बहस तेज हो गई है।

अधिकारियों को दो बार संभालनी पड़ी स्थिति

गुरुवार रात करीब साढ़े नौ बजे दो पक्षों के बीच हुए विवाद ने अचानक तनाव का रूप ले लिया था। हालात इतने बिगड़े कि वरिष्ठ अधिकारियों को दो बार मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालनी पड़ी।

कलेक्टर राघवेंद्र सिंह और पुलिस अधीक्षक सम्पत उपाध्याय ने मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला। प्रशासन का कहना है कि किसी भी धार्मिक स्थल को नुकसान नहीं पहुंचा है और पर्याप्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

दहशत के साए में लौटा जनजीवन

शनिवार सुबह से सिहोरा में हालात सामान्य होते दिखे। आधे से अधिक बाजार खुल गए, हालांकि ग्राहकों की संख्या कम रही। व्यापारी अब भी सहमे हुए नजर आए। दो दिन की बंदी और अफवाहों ने स्थानीय व्यापार पर गहरा असर डाला है।

व्यापारियों का कहना है कि त्योहार और परीक्षाओं के समय इस तरह का तनाव सीधे कारोबार पर चोट करता है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

परीक्षाओं पर पड़ा सीधा असर, 450 से अधिक विद्यार्थी अनुपस्थित

तनाव के बीच कक्षा 5वीं और 8वीं की बोर्ड परीक्षाएं भी आयोजित की गईं। मुख्य मार्ग—बस स्टैंड क्षेत्र—से होकर ही परीक्षा केंद्रों तक पहुंचना था, जहां हाल में विवाद हुआ था। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों को बायपास मार्ग से घुमाकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचाना पड़ा।

सिहोरा अंतर्गत 30 परीक्षा केंद्रों पर कुल 6371 विद्यार्थी पंजीकृत थे। इनमें से 5886 छात्रों ने परीक्षा दी, जबकि 450 से अधिक विद्यार्थी अनुपस्थित रहे। शासकीय कन्या शाला और सीएम राइज स्कूल में परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। छात्रों ने दहशत के माहौल में परीक्षा दी।

फ्लैग मार्च … सख्ती का संदेश

शुक्रवार देर रात निकाले गए फ्लैग मार्च में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आयुष गुप्ता, एएसपी जोन-3 सूर्यकांत शर्मा, यातायात एएसपी अंजना तिवारी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे। संवेदनशील इलाकों से गुजरते हुए अधिकारियों ने नागरिकों से शांति और एकता बनाए रखने तथा अफवाहों से दूर रहने की अपील की।

सबसे बड़ा सवालकार्रवाई कितनी संतुलित?

हालांकि सिहोरा अब पटरी पर लौटता दिख रहा है, लेकिन स्थानीय स्तर पर चर्चा का केंद्र … पुलिस कार्रवाई की निष्पक्षता है। क्या असली उपद्रवियों तक पुलिस पहुंच पाई है? क्या गिरफ्तारियां तथ्यों पर आधारित हैं या हालात काबू में दिखाने की जल्दबाजी?

प्रशासन का दावा है कि हर पहलू की जांच की जा रही है, लेकिन आमजन में यह भावना बनी हुई है कि पूरी सच्चाई सामने आना जरूरी है।

फिलहाल कस्बा शांत है, पर भरोसा बहाल करना प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। नागरिकों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से दूर रहने की अपील लगातार की जा रही है।

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