
जबलपुर। मध्यप्रदेश स्टेट बार काउंसिल के चुनाव को लेकर कई दिनों से चल रहा विवाद अब समाप्त हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित जस्टिस धूलिया कमेटी ने स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव प्रक्रिया में अब बार काउंसिल ऑफ इंडिया की कोई भूमिका नहीं रहेगी। चुनाव जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर की अध्यक्षता वाली कमेटी ही कराएगी।
सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ने दिया स्पष्ट आदेश
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित जस्टिस धूलिया कमेटी ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि मप्र स्टेट बार काउंसिल के चुनाव कराने की जिम्मेदारी जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर कमेटी के पास ही रहेगी। इसके साथ ही Bar Council of India का हस्तक्षेप समाप्त कर दिया गया है।
जस्टिस दिवाकर ने चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए जस्टिस एस.के. पालो को चुनाव अधिकारी नियुक्त किया है। अब चुनाव की पूरी जिम्मेदारी जस्टिस पालो संभालेंगे।
चुनाव अधिकारी की नियुक्ति पर दो दिन चला विवाद
बीते मंगलवार से चुनाव अधिकारी की नियुक्ति को लेकर विवाद की स्थिति बन गई थी। जस्टिस धूलिया कमेटी ने जस्टिस एस.के. पालो को चुनाव अधिकारी नियुक्त किया था। वहीं दूसरी ओर Bar Council of India ने जस्टिस एन.के. मोदी को चुनाव अधिकारी घोषित कर दिया था।
दो अलग-अलग नियुक्तियों से असमंजस की स्थिति पैदा हो गई थी। इस पर बुधवार रात जस्टिस धूलिया ने सभी पक्षों की ऑनलाइन सुनवाई की। सुनवाई के बाद जस्टिस एन.के. मोदी की नियुक्ति को निरस्त कर दिया गया और जस्टिस एस.के. पालो की नियुक्ति को वैध ठहराया गया।
27 फरवरी से शुरू होगी चुनाव प्रक्रिया
चुनाव अधिकारी जस्टिस एस.के. पालो ने विस्तृत चुनाव कार्यक्रम जारी कर दिया है। तय कार्यक्रम के अनुसार:
- 27 फरवरी को चुनाव की अधिसूचना जारी होगी।
- 16 मार्च को प्रारंभिक मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।
- आपत्तियों के निराकरण के बाद 1 अप्रैल को अंतिम मतदाता सूची जारी होगी।
- 8 से 10 अप्रैल के बीच नामांकन पत्र जमा किए जाएंगे।
12 मई को मतदान, 16 जून को मतगणना
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रत्याशी 22 अप्रैल शाम 4 बजे तक अपना नाम वापस ले सकेंगे। इसके बाद उम्मीदवारों की अंतिम सूची प्रकाशित की जाएगी।
सबसे महत्वपूर्ण तिथि 12 मई तय की गई है, जब मतदान कराया जाएगा। मतों की गणना 16 जून को होगी।
अधिवक्ताओं में राहत का माहौल
लंबे समय से चुनाव को लेकर बनी अनिश्चितता अब खत्म हो गई है। इस फैसले के बाद अधिवक्ताओं में राहत का माहौल है। चुनाव प्रक्रिया स्पष्ट होने से अब बार काउंसिल के नए सदस्यों के निर्वाचन का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
कानूनी हलकों में इसे महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है, जिससे चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और स्पष्टता सुनिश्चित होगी।



