
रिपोर्ट, सैफ मंसूरी, समाचार संपादक, बाज मीडिया जबलपुर।
“लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में, तुम तरस नहीं खाते…”
मकान हर आम आदमी की जिंदगी का सबसे बड़ा सपना होता है। एक-एक रुपये जोड़कर, अपनी जरूरतें कम करके, परिवार की खुशियों को टालकर वह जीवनभर की कमाई से एक छोटा सा आशियाना बनाना चाहता है। लेकिन जब यही सपना बिल्डरों की लालच और नियमों की अनदेखी की भेंट चढ़ जाता है, तो उस परिवार पर क्या गुजरती है, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है।
जिले में पिछले कुछ वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां बिना वैधानिक अनुमति के प्लॉट काटकर बेच दिए गए। लोगों को सस्ते और सुरक्षित निवेश का भरोसा दिलाया गया, लेकिन बाद में पता चला कि पूरी प्लॉटिंग अवैध थी। ऐसे में खरीदारों के सामने आर्थिक बर्बादी और मानसिक तनाव के अलावा कुछ नहीं बचा।
अब इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए जिला कलेक्टर ने सख्त रुख अपनाया है। जिले भर में चल रही प्लॉटिंग की जांच के आदेश जारी किए गए हैं, ताकि अवैध कॉलोनियों पर रोक लगाई जा सके और आम नागरिकों के सपनों को टूटने से बचाया जा सके। इसी क्रम में…
जबलपुर। अवैध प्लाटिंग कर आम शहरवासियों को चूना लगाने वाले गिरोहों के खिलाफ जिला कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह ने कमर कस ली है. उपनगरीय क्षेत्र पनागर में सामने आए अवैध प्लॉटिंग मामले में अब कार्रवाई का फोकस आर्या ग्रुप प्रमोटर्स एंड डेवलपर्स के मोहम्मद मजहर उस्मानी पर आ गया है। जिला कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह के द्वारा कराई गई जांच में खिरिया कला स्थित खसरा नंबर 208/2/2 की भूमि पर बिना वैधानिक अनुमति 59 प्लॉट बेचे जाने की पुष्टि हुई है। अब कॉलोनी सेल विभाग कलेक्टर के निर्देश पर चार आरोपितों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी में जुटा है।
इस मामले में जिला प्रशासन की जांच मे सामने आया है कि पनागर तहसील के अंतर्गत पिपरिया बनियाखेड़ा में दोनों कॉलोनाइजरों ने बिना लाइसेंस 115 प्लॉट बेचे हैं। मोहम्मद अजहर उस्मानी और विष्णु कुशवाहा ने 1.79 हेक्टेयर भूमि पर अवैध कॉलोनी बनाकर प्लॉट बेचे। जानकारी के मुताबिक इसके लिए विभागों से कोई भी अनुमति नहीं ली थी। खुलेआम नियमों को दर किनार कर प्रशासन एवं ग्राहकों को अंधेरे में रखा। 4.43 एकड़ में मन मुताबिक स्वयं का ले आउट तैयार कर प्लॉट काट दिए गए और मन मुताबिक प्लॉट्स का बखूबी विक्रय किया गया। बिल्डर्स यहां तक भी नहीं रुके और कॉलोन डेवलप करने की तैयारी में जुट चुके थे। अवैध प्लॉटिंग कर बेचे 59 प्लॉट जानकारी के मुताबिक पनागर के खिरिया कला में खसरा नम्बर 208/2/2 में अवैध प्लॉटिंग कर 59 प्लॉट बेचे गए थे। बिल्डर आर्या ग्रुप प्रमोटर्स एन्ड डेवलपर्स के मोहम्मद मजहर उस्मानी, विवेक सोनी, नीलेश पटेल ने बिना किसी निर्धारित अनुमति के प्लॉट बेचे। साथ ही बिना किसी अनुमति के कॉलोनी भी डेवलप की जा रही थी। मामला सामने आने के बाद अब कॉलोनी सेल 4 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी में जुट गया है।


बिना अनुमति 59 प्लॉट की बिक्री
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार संबंधित भूमि पर न तो विधिवत ले-आउट स्वीकृत कराया गया और न ही किसी सक्षम प्राधिकरण से कॉलोनी विकसित करने की अनुमति ली गई। इसके बावजूद प्लॉट काटकर उनका विक्रय किया गया।
जांच में यह भी सामने आया है कि कॉलोनी का विकास कार्य—सड़क, नाली, जल निकासी जैसी मूलभूत संरचनाओं की तैयारी—बिना अनुमतियों के शुरू किया गया था। इससे खरीदारों को भविष्य में वैधानिक मान्यता और सुविधाओं को लेकर दिक्कतें आ सकती हैं।
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टीएनसीपी और रेरा नियमों की अनदेखी
अधिकारियों का कहना है कि परियोजना के लिए टीएनसीपी (टाउन एंड कंट्री प्लानिंग) से स्वीकृति नहीं ली गई। साथ ही मध्य प्रदेश रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (रेरा) में पंजीयन भी नहीं कराया गया। कॉलोनाइजर लाइसेंस का अभाव और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) जैसी आवश्यक अधोसंरचनात्मक शर्तों की पूर्ति न होना भी जांच में सामने आया है।
विशेषज्ञों के मुताबिक रेरा पंजीयन के बिना प्लॉट बिक्री उपभोक्ता संरक्षण नियमों का उल्लंघन है। ऐसे मामलों में खरीदारों के हितों की सुरक्षा कमजोर पड़ जाती है।
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‘सस्ते आशियाने’ का आकर्षण, कानूनी जोखिम बड़ा
स्थानीय स्तर पर प्रचार के जरिए अपेक्षाकृत कम कीमत और आसान भुगतान शर्तों का हवाला देकर ग्राहकों को आकर्षित किए जाने की बात सामने आई है। प्रशासन का मानना है कि बिना वैधानिक स्वीकृति प्लॉट खरीदने वाले नागरिकों को भविष्य में नक्शा पासिंग, बिजली-पानी कनेक्शन और सड़क जैसी सुविधाओं में अड़चनें आ सकती हैं।
एफआईआर की तैयारी, आगे और सख्ती के संकेत
कॉलोनी सेल ने दस्तावेजों का संकलन पूरा कर लिया है और संबंधित थाना क्षेत्र में एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यदि जांच में वित्तीय अनियमितताओं या उपभोक्ताओं से धोखाधड़ी के तत्व मिलते हैं, तो धाराएं और कठोर की जा सकती हैं।
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि प्लॉट खरीदने से पहले टीएनसीपी स्वीकृति, रेरा पंजीयन और कॉलोनाइजर लाइसेंस की जांच अवश्य करें। पनागर प्रकरण को जिले में अवैध प्लॉटिंग के खिलाफ चल रहे अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है, जहां कार्रवाई का केंद्र फिलहाल मजहर उस्मानी की भूमिका पर टिका है।



