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सिहोरा घटना: विभिन्न पक्षों के आरोप–प्रत्यारोप के बीच निष्पक्ष जांच की मांग, एसपी को सौंपा गया ज्ञापन

जबलपुर। सिहोरा के आजाद चौक क्षेत्र में 19 फरवरी 2026 को हुई साम्प्रदायिक तनाव की घटना को लेकर अब शिकायतों और मांगों का सिलसिला तेज हो गया है। मंगलवार को ऑल इंडिया रजा एक्शन कमेटी, ब्रांच जबलपुर ने पुलिस अधीक्षक को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। संगठन ने घटना से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

नमाज और आरती के समय को लेकर विवाद

ज्ञापन में कहा गया है कि 19 फरवरी की रात तरावीह की नमाज के दौरान मस्जिद के सामने स्थित मंदिर में आरती शुरू होने से विवाद की स्थिति बनी। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पूर्व में शांति समिति की बैठक में आपसी सहमति से धार्मिक कार्यक्रमों के समय को लेकर निर्णय लिया गया था। इसी मुद्दे पर दोनों पक्षों के कुछ लोगों के बीच बहस हुई, जो बाद में तनाव में बदल गई।

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घटना के दौरान पथराव की भी बात सामने आई है। ज्ञापन में आरोप है कि आसपास के क्षेत्रों से पत्थर फेंके गए और मस्जिद परिसर भी इसकी चपेट में आया। सोशल मीडिया पर इस घटना से जुड़े कई वीडियो प्रसारित होने का उल्लेख भी किया गया है।

पुलिस कार्रवाई पर सवाल

ज्ञापन में पुलिस की कार्रवाई पर भी प्रश्न उठाए गए हैं। आरोप है कि पुलिस ने एक पक्ष के लोगों को हिरासत में लिया और मस्जिद परिसर में आंसू गैस का प्रयोग किया। हालांकि, इस संबंध में पुलिस का पक्ष सामने आना अभी शेष है। संगठन ने मांग की है कि पूरी कार्रवाई की निष्पक्ष समीक्षा की जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किस परिस्थिति में क्या कदम उठाए गए।

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रात में तोड़फोड़ और आगजनी के आरोप

ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि उसी रात कुछ अज्ञात लोगों द्वारा क्षेत्र में घरों और दुकानों में तोड़फोड़, बिजली मीटर क्षतिग्रस्त करने और कुछ स्थानों पर आगजनी की घटनाएं हुईं। दरगाह को नुकसान पहुंचाने का भी उल्लेख किया गया है। संगठन का कहना है कि इन घटनाओं की भी अलग से गंभीर जांच होनी चाहिए।

साथ ही यह आरोप भी लगाया गया है कि क्षतिग्रस्त स्थलों की रात में ही सफाई कराई गई और टूटे मीटर बदल दिए गए। संगठन ने मांग की है कि संबंधित विभागों से पूछताछ कर यह स्पष्ट किया जाए कि किन परिस्थितियों में यह कार्यवाही की गई।

सोशल मीडिया की भूमिका

ज्ञापन में कहा गया है कि घटना के बाद सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक और भड़काऊ सामग्री प्रसारित हुई, जिससे शहर का माहौल प्रभावित हुआ। संगठन ने मांग की है कि ऐसे सभी वीडियो और पोस्ट की जांच कर संबंधित व्यक्तियों की पहचान की जाए और कानूनी कार्रवाई की जाए।

कुछ संगठनों और व्यक्तियों के नाम का उल्लेख

ज्ञापन में कुछ संगठनों और एक स्थानीय व्यक्ति का नाम लेते हुए उन पर माहौल बिगाड़ने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि स्वतंत्र जांच के बाद ही हो सकेगी। संगठन ने मांग की है कि पूर्व में दी गई शिकायतों को भी जांच के दायरे में लिया जाए।

सीबीआई जांच की मांग

संगठन ने पूरे प्रकरण की सीबीआई से जांच कराने की मांग की है, ताकि सभी पहलुओं की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो सके। ज्ञापन के साथ पूर्व शिकायतों की प्रतियां, सोशल मीडिया वीडियो का मेमोरी कार्ड और कुछ छायाचित्र भी संलग्न किए गए हैं।

स्थिति सामान्य, प्रशासन सतर्क

घटना के बाद सिहोरा क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था। फिलहाल स्थिति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन प्रशासन एहतियातन निगरानी बनाए हुए है।

इस पूरे मामले में अब सबकी निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं। यह आवश्यक है कि जांच तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर हो, ताकि निर्दोषों को राहत मिले और दोषियों पर कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।

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