
जबलपुर, 26 फरवरी 2026। शहर में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों और काटने की घटनाओं को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक सक्रियता की मांग तेज हो गई है। मध्यप्रदेश राज्य सर्व शिक्षा अभियान मिशन के सदस्य प्यारे साहब ने कलेक्टर जबलपुर को ज्ञापन सौंपकर सार्वजनिक स्थलों पर नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। ज्ञापन में हाल ही में आए सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण आदेश का हवाला देते हुए जिला प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की अपील की गई है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला
ज्ञापन में बताया गया है कि Supreme Court of India ने SLP (C) 5 of 2025 “CITY HOUNDED BY STRAYS, KIDS PAID PRICE” मामले में 7 नवम्बर 2025 को अहम निर्देश जारी किए हैं। यह आदेश जस्टिस विश्वनाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ द्वारा पारित किया गया।
कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों के जीवन और सुरक्षा के मौलिक अधिकार की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। आदेश में यह भी टिप्पणी की गई कि सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तों का बढ़ता खतरा “प्रशासनिक उदासीनता ही नहीं बल्कि एक तंत्रगत विफलता” को दर्शाता है।
किन-किन स्थानों पर कार्रवाई के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे दो सप्ताह के भीतर स्थानीय निकायों के माध्यम से निम्न स्थानों की पहचान करें और सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करें:
- शासकीय एवं निजी स्कूल
- अस्पताल (जिला अस्पताल सहित)
- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और मेडिकल कॉलेज
- खेल परिसर और स्टेडियम
- बस स्टैंड
- रेलवे स्टेशन
कोर्ट ने यह भी कहा कि सभी राज्यों के मुख्य सचिव 8 सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करें। किसी भी प्रकार की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।
पशु क्रूरता अधिनियम और ABC नियमों का उल्लेख
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि केंद्र सरकार ने Prevention of Cruelty to Animals Act के तहत Animal Birth Control Rules अधिसूचित किए हैं, जिनका उद्देश्य आवारा कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करना और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा के हित में आवश्यक प्रशासनिक कदम उठाना राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है।
जिला प्रशासन से क्या मांग
प्यारे साहब ने कलेक्टर से आग्रह किया है कि:
- आगामी टी.एल. बैठक में संबंधित विभागों (नगर निगम, स्वास्थ्य, शिक्षा, पुलिस) को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं
- स्कूलों और अस्पतालों के आसपास विशेष अभियान चलाया जाए
- आवारा कुत्तों की पहचान, नियंत्रण और वैक्सीनेशन अभियान को तेज किया जाए
- संवेदनशील क्षेत्रों में त्वरित प्रतिक्रिया टीम गठित की जाए
ज्ञापन के साथ सुप्रीम कोर्ट का आदेश भी संलग्न किया गया है।
शहर में बढ़ रही चिंता
जबलपुर सहित प्रदेश के कई शहरों में हाल के महीनों में बच्चों और बुजुर्गों पर कुत्तों के हमले की घटनाएं सामने आई हैं। अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों में डर का माहौल है, खासकर स्कूलों और अस्पतालों के आसपास।
प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार
अब नजर जिला प्रशासन की कार्रवाई पर है। यदि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप त्वरित कदम उठाए जाते हैं तो शहर में सार्वजनिक सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम माना जाएगा।
आम नागरिकों का कहना है कि यह केवल पशु नियंत्रण का मुद्दा नहीं, बल्कि सीधे तौर पर “जीवन के अधिकार” से जुड़ा प्रश्न है।



