
युद्ध का असर: आम आदमी की रसोई पर बढ़ा बोझ, तेल-घी और रसोई गैस के दाम बढ़े
BAZ MEDIA, जबलपुर। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े युद्ध जैसे हालातों का असर अब भारत के शहरों तक दिखाई देने लगा है। मध्यप्रदेश के जबलपुर में भी इसका सीधा प्रभाव आम आदमी की रसोई पर पड़ रहा है। बीते कुछ दिनों में खाने के तेल, देसी घी और वनस्पति घी की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि घरेलू रसोई गैस सिलेंडर भी महंगा हो गया है। इससे खास तौर पर मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के सामने घरेलू बजट को संभालना मुश्किल होता जा रहा है।
खाने के तेल और घी की कीमतों में उछाल
शहर के किराना बाजारों में पिछले एक सप्ताह के दौरान खाने के तेल की कीमतों में 8 से 12 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी देखी गई है। सोयाबीन तेल, रिफाइंड तेल और सरसों तेल के दाम बढ़ने से रसोई का खर्च सीधे प्रभावित हुआ है।
इसी तरह देसी घी और वनस्पति घी के पैकेटों की कीमतों में भी करीब 10 रुपये तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। व्यापारियों का कहना है कि यह बढ़ोतरी अचानक नहीं हुई, बल्कि थोक बाजार में कीमतें बढ़ने के कारण खुदरा बाजार में भी इसका असर दिखाई दे रहा है।
शहर के कई किराना व्यापारियों के मुताबिक थोक मंडियों में ही माल महंगा मिल रहा है, जिसके कारण खुदरा दुकानदारों को भी बढ़े हुए दामों पर सामान बेचना पड़ रहा है।
अंतरराष्ट्रीय हालात का असर
जानकारों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और समुद्री मार्गों में बढ़ती अनिश्चितता के कारण आयात लागत बढ़ रही है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल और कई खाद्य तेलों के लिए आयात पर निर्भर करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ना स्वाभाविक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो आने वाले दिनों में खाद्य पदार्थों की कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
रसोई गैस भी महंगी, डिलीवरी में देरी
खाद्य पदार्थों के साथ-साथ घरेलू रसोई गैस की कीमतों में भी बढ़ोतरी ने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। शहर में 14.2 किलोग्राम के घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में लगभग 60 रुपये की वृद्धि दर्ज की गई है।
इसके अलावा कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की है कि गैस बुक कराने के बाद सिलेंडर की डिलीवरी में 15 से 20 दिनों तक का समय लग रहा है। कुछ लोगों का कहना है कि गैस एजेंसियों में लंबी प्रतीक्षा सूची बन गई है।
हालांकि गैस एजेंसियों का दावा है कि आपूर्ति सामान्य है और मांग बढ़ने के कारण अस्थायी देरी हो सकती है।
घरेलू बजट पर बढ़ा दबाव
शहर की गृहिणियों का कहना है कि पहले से ही बढ़ती महंगाई के कारण घरेलू खर्च संभालना मुश्किल हो रहा था, लेकिन अब रोजमर्रा की जरूरत की चीजों के दाम बढ़ने से मासिक बजट पूरी तरह प्रभावित हो गया है।
एक मध्यमवर्गीय परिवार जहां पहले महीने का राशन और गैस का खर्च पहले से तय कर लेता था, अब उसे हर महीने करीब 400 से 700 रुपये तक अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है।
पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की भी आशंका
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात लंबे समय तक तनावपूर्ण बने रहे तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी बढ़ोतरी की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
यदि ऐसा होता है तो परिवहन लागत बढ़ने के कारण अन्य वस्तुओं की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है, जिससे महंगाई का दायरा और बढ़ जाएगा।
प्रशासन के दावे और जमीनी स्थिति
सरकार और प्रशासन की ओर से यह दावा किया जा रहा है कि बाजार में खाद्य वस्तुओं और गैस की पर्याप्त आपूर्ति उपलब्ध है और किसी भी प्रकार की कृत्रिम कमी नहीं होने दी जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।
हालांकि जमीनी स्तर पर उपभोक्ताओं का अनुभव कुछ अलग दिखाई दे रहा है। बढ़ती कीमतों और गैस डिलीवरी में हो रही देरी ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
फिलहाल जबलपुर के लोग बढ़ती महंगाई के बीच राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय हालात किस दिशा में जाते हैं और सरकार महंगाई पर नियंत्रण के लिए क्या कदम उठाती है, इस पर शहरवासियों की नजरें टिकी हुई हैं।



