जबलपुर में हत्या : टिकारी में साले के हमले में जीजा की मौत, पारिवारिक विवाद ने लिया खूनी रूप

जबलपुर। पनागर थाना क्षेत्र के ग्राम टिकारी में पुश्तैनी जमीन को लेकर चला आ रहा पारिवारिक विवाद आखिरकार एक जानलेवा घटना में बदल गया। जीजा-साले के बीच लंबे समय से चल रहा तनाव बुधवार देर रात इतना बढ़ गया कि लाठी के वार ने एक परिवार का सहारा छीन लिया। गंभीर रूप से घायल 40 वर्षीय सुनील सिंह ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया।
पुलिस के अनुसार सुनील सिंह मूल रूप से तेंदूखेड़ा का निवासी था। विवाह के बाद वह अपने ससुराल ग्राम टिकारी में ही बस गया था और वहीं रहकर जीवन यापन कर रहा था। ससुराल पक्ष की जमीन को लेकर उसका अपने रिश्ते के साले दिलीप गोंड और उसके परिवार से लंबे समय से विवाद चल रहा था।
कहासुनी से शुरू हुआ विवाद
बताया जा रहा है कि बीती रात जमीन को लेकर दोनों पक्षों में फिर बहस शुरू हो गई। विवाद बढ़ते-बढ़ते गाली-गलौज तक पहुंच गया। इसी दौरान सुनील सिंह ने आवेश में आकर दिलीप गोंड के बड़े भाई को अपशब्द कह दिए। माहौल पहले से ही तनावपूर्ण था, ऐसे में बात हाथापाई तक जा पहुंची।
आरोप है कि गुस्से में दिलीप गोंड ने पास में रखी लाठी उठाई और सुनील पर कई वार कर दिए। सिर और शरीर पर लगी गंभीर चोटों से वह लहूलुहान हो गया और जमीन पर गिर पड़ा।
अस्पताल पहुंचने से पहले मौत
परिजन घायल सुनील को तत्काल मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाने के लिए निकले, लेकिन रास्ते में ही उसकी सांसें थम गईं। घटना की खबर फैलते ही गांव में सन्नाटा और तनाव का माहौल बन गया।
रिश्तों में दरार से अपराध तक
यह घटना केवल एक हत्या नहीं, बल्कि पारिवारिक रिश्तों में बढ़ती कटुता की दर्दनाक मिसाल भी है। गांवों में पुश्तैनी जमीन को लेकर विवाद आम होते जा रहे हैं, जो कई बार आपसी समझाइश के अभाव में हिंसक रूप ले लेते हैं। सामाजिक जानकारों का कहना है कि परिवार के भीतर संवाद और आपसी सहमति की कमी ऐसी घटनाओं को जन्म देती है।
आरोपी गिरफ्तार, जांच जारी
सूचना मिलते ही पनागर पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी दिलीप गोंड को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया। शव का पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंप दिया गया है। पुलिस का कहना है कि जमीन विवाद को लेकर पहले भी दोनों पक्षों में तनाव रहा है और मामले की विस्तृत जांच की जा रही है।
टिकारी की यह घटना एक बार फिर यह सवाल छोड़ गई है कि क्या जमीन और संपत्ति के विवाद रिश्तों से ज्यादा अहम हो गए हैं, और क्या समय रहते सुलह का रास्ता न अपनाने की कीमत जान देकर चुकानी पड़ रही है।



