आरडीयू कर्मचारी संघ चुनाव: गुटबाजी बनाम नए नेतृत्व की तलाश, 25 मार्च को होगा फैसला

जबलपुर। Rani Durgavati Vishwavidyalaya (आरडीयू) के शैक्षणेत्तर कर्मचारी संघ के चुनाव इस बार महज पदों की होड़ नहीं, बल्कि संगठन की भावी दिशा तय करने की कसौटी बन गए हैं। 25 मार्च को होने वाले मतदान से पहले विश्वविद्यालय परिसर में एक बड़ा सवाल चर्चा में है—क्या कर्मचारी पुराने गुटीय समीकरणों को दोहराएंगे या नए नेतृत्व को मौका देंगे?
अध्यक्ष पद पर प्रेम प्रकाश पुरोहित, संजय यादव और वीरेन्द्र सिंह के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। चुनावी सरगर्मियों के बीच यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि संजय यादव को पूर्व अध्यक्ष वंश बहोर पटैल गुट का समर्थन प्राप्त है। इस समर्थन ने चुनाव को आंतरिक राजनीतिक रंग दे दिया है। जानकारों का मानना है कि यदि गुटीय समीकरण सक्रिय रहे तो परिणाम प्रभावित हो सकते हैं, वहीं एक वर्ग इसे बदलाव का अवसर भी मान रहा है।
मुद्दों की आड़ में समीकरण
तीनों प्रत्याशी कर्मचारियों के हित, पदोन्नति में पारदर्शिता, वेतन विसंगतियों के समाधान और प्रशासन से बेहतर तालमेल जैसे मुद्दों को प्रमुखता दे रहे हैं। लेकिन कर्मचारियों के बीच यह भी चर्चा है कि वास्तविक मुकाबला विचारों से ज्यादा प्रभाव और नेटवर्किंग का हो सकता है।
कई कर्मचारी मानते हैं कि पिछले कार्यकाल में गुटबाजी के कारण कुछ मुद्दे लंबित रह गए। ऐसे में इस बार मतदाता यह देखना चाहते हैं कि नई टीम संगठन को एकजुट रख पाएगी या नहीं।
घर-घर पहुंचकर साधे जा रहे समीकरण
चार दिन की छुट्टियों ने प्रचार रणनीति को नया मोड़ दिया है। प्रत्याशी 22 मार्च तक कर्मचारियों के घर-घर जाकर व्यक्तिगत संपर्क साध रहे हैं। इसे केवल प्रचार नहीं, बल्कि समर्थन की मजबूती का प्रयास माना जा रहा है। 23 और 24 मार्च को विश्वविद्यालय परिसर में औपचारिक प्रचार होगा।
अन्य पदों पर भी कड़ा संघर्ष
अध्यक्ष के अलावा उपाध्यक्ष, महासचिव, संयुक्त सचिव और कोषाध्यक्ष सहित विभिन्न पदों पर कुल 36 उम्मीदवार मैदान में हैं। कार्यकारिणी सदस्य पद के लिए 15 प्रत्याशी दावेदारी कर रहे हैं। निर्वाचन अधिकारी प्रो. राकेश वाजपेई के अनुसार नाम वापसी के बाद अंतिम सूची जारी कर दी गई है।
कर्मचारियों की नजर परिणाम पर
कर्मचारियों की अपेक्षा है कि नई कार्यकारिणी गुटीय खींचतान से ऊपर उठकर संगठन को मजबूती दे और लंबित सेवा प्रकरणों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करे। इस बार मतदान केवल व्यक्तियों के चयन का नहीं, बल्कि संगठन की कार्यशैली और संस्कृति के चयन का प्रतीक माना जा रहा है।
25 मार्च को होने वाला मतदान यह तय करेगा कि कर्मचारी संघ पुराने समीकरणों के साथ आगे बढ़ेगा या नई सोच और नए नेतृत्व को अवसर देगा। परिणाम न केवल संघ की नई टीम तय करेगा, बल्कि विश्वविद्यालय प्रशासन और कर्मचारियों के रिश्तों की दिशा भी निर्धारित करेगा।



