
अरशद क़ादरी, बाज़ मीडिया, जबलपुर। शहर के मुजावर मोहल्ला स्थित जामा मस्जिद में जमायते कादरी के तत्वावधान में एतकाफ पर बैठे नौजवानों की दस्तारबंदी का कार्यक्रम अकीदत और रूहानियत के माहौल में आयोजित किया गया।
इस मौके पर पेश इमाम मौलाना फजले रब अशरफी, सूफ़ी मुबारक कादरी, सैय्यद कादिर अली कादरी, इनायत कादरी, वारिस अली कादरी और जवाहर कादरी विशेष रूप से मौजूद रहे। सभी उलेमा-ए-किराम ने एतकाफ करने वाले नौजवानों की हौसला अफ़ज़ाई की और उन्हें दीन की राह पर मजबूती से कायम रहने की नसीहत दी।
उलेमा ने अपने बयान में कहा कि आज के दौर में जब नौजवान कई तरह की गुमराहियों और फितनों का सामना कर रहे हैं, ऐसे में मस्जिद से जुड़ना और एतकाफ जैसी इबादत में वक्त गुज़ारना उनकी ज़िंदगी में सकारात्मक बदलाव लाने का जरिया बनता है। उन्होंने नमाज़, रोज़ा और अन्य इबादतों की पाबंदी को कामयाब जिंदगी की बुनियाद बताया।
पेश इमाम मौलाना फजले रब अशरफी ने अपने खिताब में कहा कि एतकाफ इबादत का एक अहम ज़रिया है, जिसके जरिए इंसान अल्लाह की क़ुर्बत हासिल करता है। यह इबादत इंसान को अपनी ज़िंदगी का जायज़ा लेने और उसे इस्लामी उसूलों के मुताबिक ढालने का बेहतरीन मौका देती है।
कार्यक्रम के दौरान एतकाफ में शामिल नौजवानों को दस्तार पहनाकर सम्मानित किया गया, जिससे उनका हौसला बढ़ा और दीन की तरफ उनकी रुचि और मजबूत हुई।
अंत में मुल्क व कौम की सलामती के लिए खास दुआ की गई।



