
जबलपुर। शहर में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर वर्षों से रह रहे पांच अफगानी नागरिकों के मामले में जांच और गहराती जा रही है। विशेष एटीएस न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी आरोपियों की न्यायिक हिरासत 15 अप्रैल तक बढ़ा दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने तक आरोपियों को किसी प्रकार की राहत देना उचित नहीं होगा।
जांच एजेंसी के अनुसार सोहबत खान, गुल अघा खान, सरदार खान, शाह वली और हमीदुल्लाह नामक ये विदेशी नागरिक ओमती क्षेत्र में अलग-अलग नाम और पहचान के साथ रह रहे थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ये लोग लंबे समय से स्थानीय नागरिकों के बीच सामान्य जीवन जी रहे थे, जिससे किसी को उन पर संदेह नहीं हुआ।
एटीएस की जांच में खुलासा हुआ है कि मुख्य आरोपी सोहबत खान वर्ष 2015 में अवैध रूप से भारत में दाखिल हुआ था। इसके बाद उसने स्थानीय महिला से विवाह किया और धीरे-धीरे अपनी पहचान स्थापित करने के लिए आवश्यक दस्तावेज बनवा लिए। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने राशन कार्ड, आधार कार्ड और भारतीय पासपोर्ट तक हासिल कर लिया था। एजेंसियों का मानना है कि इतने महत्वपूर्ण दस्तावेज बिना किसी संगठित नेटवर्क की मदद के संभव नहीं हैं।
इसी को ध्यान में रखते हुए अब स्थानीय स्तर पर सहयोग देने वालों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। एटीएस ने अदालत में दलील दी कि इस पूरे मामले में एक संगठित गिरोह सक्रिय हो सकता है, जिसमें कुछ स्थानीय व्यक्तियों और संभवतः शासकीय कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका है। जांच एजेंसी बैंक खातों, संपत्ति, मोबाइल कॉल डिटेल और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की गहन पड़ताल कर रही है।
सूत्रों के अनुसार जांच टीमें आरोपियों के बैंक लेनदेन और संदिग्ध संपर्कों की जानकारी जुटा रही हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इनके तार कहीं अन्य राज्यों या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तो नहीं जुड़े हैं। सुरक्षा एजेंसियां इस मामले को केवल फर्जी दस्तावेज तक सीमित न मानते हुए अंतरराष्ट्रीय कड़ी की भी जांच कर रही हैं।
विशेष एटीएस कोर्ट में अब अगली सुनवाई 15 अप्रैल को होगी। उम्मीद है कि जांच एजेंसी उस दिन तक नए साक्ष्य और तथ्यों के साथ अदालत के समक्ष प्रकरण की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।



