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हादसा या साजिश? एक साल बाद मंडी कब्रिस्तान में कब्र खुली … गयासुद्दीन केस ने हिला दिया शहर

ग्यासुद्दीदन साहब की मौत सामान्य हादसा थी या उनके साथ साज़िश हुई थी. साज़िश हुई थी तो कौन मौत का जिम्मेदार है और किसने मौत को सामान्य हादसा बनाया.  यह सारे सवाल आज मुस्लिम समाज ही नहीं पूरे शहर में गूंज रहे हैं. क्योंकि बुधवार को जो हुआ वो पहले कभी नहीं हुआ. इसलिये हर जुबान पर दुआ है— ‘अल्लाह मरहूम को जन्नतुल फिरदौस अता फरमाए.. और अगर कोई सच्चाई छिपी है, तो वह जल्द सामने आए। लोग दर्द के साथ सही लेकिन हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत कर रहे, और प्रशासन से अपील कर रहे हैं कि मामले में निष्पक्ष जांच करें और सच्चाई को सामने लाएं.


जबलपुर। बुधवार का दिन शहर के मुस्लिम समाज के लिए बेहद भारी, दर्दनाक और बेचैन कर देने वाला रहा। मंडी मदार टेकरी कब्रिस्तान में एक ऐसा मंजर सामने आया, जिसे देखकर हर आंख नम हो गई और हर दिल से बस यही दुआ निकली— ‘या अल्लाह, ऐसा दिन किसी को न दिखाए।

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एक साल पहले सुपुर्द-ए-खाक किए गए मरहूम गयासुद्दीन कुरैशी की कब्र को हाईकोर्ट के निर्देश पर प्रशासन ने खोला और उनका जिस्म बाहर निकाला गया। कब्र खुलते ही वहां मौजूद लोगों की रूह कांप उठी। माहौल गमगीन हो गया।

मरहूम गयासुद्दीन कुरैशी

यह भी अहम है कि कब्र खोलने का यह आदेश मरहूम के भाई कसीमुद्दीन कुरैशी की याचिका पर ही दिया गया। उन्होंने ही मौत को संदिग्ध बताते हुए अदालत से जांच की मांग की थी। हालांकि, शहर में इस मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं भी हैं, कोई कह रहा है की आरोपी और संदिग्ध मौत को सामान्य मौत दिखाने वाले सब रिश्तेदार ही हैं। इसीलिए कोर्ट के आदेश पर सच्चाई सामने लाने के लिए ही यह पूरी प्रक्रिया की जा रही है।

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हर जुबान पर दुआ है— ‘अल्लाह मरहूम को जन्नतुल फिरदौस अता फरमाए, उनके परिवार को सब्र दे… और अगर कोई सच्चाई छिपी है, तो वह जल्द सामने आए।

शव को बाहर निकालने के बाद पोस्टमार्टम के लिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज भेजा गया। यह कार्रवाई एसडीएम अधारताल और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में पूरी की गई।

इंसाफ की तलाश में एक साल की जद्दोजहद…

मरहूम गयासुद्दीन कुरैशी की मौत 27 मार्च 2025 को नागपुर में हुई थी। इससे एक दिन पहले वे सड़क हादसे में घायल हुए थे। आरोप है की बिना विस्तृत जांच के उन्हें सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया, लेकिन समय बीतने के साथ कई सवाल खड़े होने लगे।

मरहूम के भाई कसीमुद्दीन का आरोप है कि यह महज हादसा नहीं, बल्कि एक संदिग्ध मौत है। उनके मुताबिक डिस्चार्ज रिपोर्ट में सीने पर चोट के निशान दर्ज थे, जो संदेह पैदा करते हैं। पुलिस में शिकायत के बावजूद कार्रवाई न होने पर उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया।

जनवरी 2026 में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच—जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस एके सिंह—ने मामले को गंभीर मानते हुए सख्त आदेश जारी किए।

हाईकोर्ट का सख्त रुख— देरी बर्दाश्त नहीं होगी

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि सच्चाई सामने लाना जरूरी है और इसमें किसी भी प्रकार की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अदालत ने आदेश दिया कि तय समय में कब्र से शव निकालकर उसी दिन पोस्टमार्टम कराया जाए।

साथ ही निर्देश दिए गए कि पूरी प्रक्रिया मजिस्ट्रेट की निगरानी में हो और मृतक के परिवार की मौजूदगी में पंचनामा तैयार किया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि यदि याचिकाकर्ता तय समय पर उपस्थित नहीं होता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

कब्र से उठे सवाल—अब रिपोर्ट का इंतजार…

बुधवार को प्रशासन ने तय समय के भीतर कब्र खुलवाई और शव को बाहर निकाला। इस दौरान मौजूद हर शख्स के चेहरे पर दर्द, हैरानी और बेचैनी साफ झलक रही थी।

अब पूरे मामले की सच्चाई पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी—क्या यह महज एक सड़क हादसा था या इसके पीछे कोई और वजह छिपी है।

समाज में गम और बेचैनी का माहौल…

इस घटना ने जबलपुर के मुस्लिम समाज को अंदर तक झकझोर दिया है। कब्र से एक साल बाद शव निकाले जाने की यह घटना लंबे समय तक लोगों के दिलों में बनी रहेगी।

लोगों के बीच एक ही बात कही जा रही है—अगर शुरुआत में ही सही जांच हो जाती, तो शायद आज यह दिन नहीं देखना पड़ता।

हर जुबान पर दुआ है—* ‘अल्लाह मरहूम को जन्नतुल फिरदौस अता फरमाए, उनके परिवार को सब्र दे… और अगर कोई सच्चाई छिपी है, तो वह जल्द सामने आए। ‘*

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बाज़ मीडिया जबलपुर डेस्क 'जबलपुर बाज़' आपको जबलपुर से जुडी हर ज़रूरी खबर पहुँचाने के लिए समर्पित है.
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