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शीरीन को इंसाफ मिला होता तो आज गाजा में चुन चुन कर पत्रकारों की हत्या न होती

गाजा में चल रही जंग मीडिया कर्मियों की शहादत के लिये भी जानी जाएगी। क्योंकि जितने और जिस तरह से पत्रकारों को गाजा में इजरायल द्वारा शहीद किया गया, वैसा मानव इतिहास में कभी नहीं हुआ।

इजरायली सेना द्वारा कब्जे वाले वेस्ट बैंक में अपनी ड्यूटी निभाते हुए शहीद हुई पत्रकार शिरीन अबू अकिला की आज दूसरी बरसी मनाई जा रही है।

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पत्रकार और मानवतावादी संगठनों का कहना है कि शिरीन अबू अकिला की हत्या की स्वतंत्र जांच और जवाबदेही की कमी के कारण ही इजरायली सेना को गाजा में खुली छूट मिल गई। इजरायल ने बीते सात महीनों में गाजा युद्ध को पत्रकारों के लिए इतिहास का सबसे घातक युद्ध बना दिया, लगातार टार्गेट करके पत्रकारों को शहीद किया जा रहा है।

गौरतलब है की अल जज़ीरा नेटवर्क के पत्रकार शिरीन अबू अकिला, जिनके पास अमेरिकी नागरिकता है, को 11 मई, 2022 को जेनिन में इजरायली छापे को कवर करते समय एक इजरायली सेना के स्नाइपर ने गोली मार दी थी।

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इज़राइल ने शिरीन अबू अकिला की हत्या के लिए फ़िलिस्तीनी प्रतिरोध समूहों को दोषी ठहराया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के बाद, इज़राइल ने स्वीकार किया कि शिरीन अबू अकिला की हत्या इज़रायली सैनिकों ने की थी, लेकिन उसने अपने सैनिकों के खिलाफ किसी भी आपराधिक जांच से इनकार किया।

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