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Baz World : ग़ज़ा में तबाही की चेतावनी: सर्दी, बारिश और घेराबंदी ने हालात को बनाया ‘नरक’ — मुस्लिम देशों के विदेश मंत्रियों का इज़राइल पर सीधा दबाव

ग़ज़ा। ग़ज़ा पट्टी में मानवीय हालात तेज़ी से बद से बदतर होते जा रहे हैं। भीषण सर्दी, लगातार बारिश और इज़राइली घेराबंदी के बीच लाखों फ़िलिस्तीनी ज़िंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में पाकिस्तान, मिस्र, इंडोनेशिया, जॉर्डन, क़तर, सऊदी अरब, तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्रियों ने गहरी चिंता जताते हुए ग़ज़ा की स्थिति को “तेज़ी से बिगड़ता मानवीय संकट” करार दिया है।

इस्लामाबाद में जारी एक संयुक्त बयान में इन मुस्लिम देशों ने कहा कि भारी बारिश और तूफ़ानों ने पहले से मौजूद खाद्य संकट, दवाओं की कमी, ईंधन की अनुपलब्धता और आश्रय की तबाही को कई गुना बढ़ा दिया है। बयान के मुताबिक़ राहत सामग्री और ज़रूरी सामान की बेहद धीमी आवाजाही के चलते न तो बुनियादी सेवाएं बहाल हो पा रही हैं और न ही अस्थायी आवासों का निर्माण।

19 लाख विस्थापित, टेंट डूबे, बीमारियां फैलीं

संयुक्त बयान में लगभग 19 लाख विस्थापित फ़िलिस्तीनियों की भयावह स्थिति को रेखांकित किया गया, जो अस्थायी और बेहद कमज़ोर टेंटों में रहने को मजबूर हैं। कई शरणार्थी शिविरों में पानी भर गया है, टेंट फट चुके हैं और पहले से जर्जर इमारतें ढहने लगी हैं। ठंड, कुपोषण और गंदगी के कारण बीमारियों के फैलने का खतरा बेहद बढ़ गया है।

विदेश मंत्रियों ने साफ कहा कि इस हालात में सबसे ज़्यादा खतरे में बच्चे, महिलाएं, बुज़ुर्ग और पहले से बीमार लोग हैं। उनके लिए यह सर्दी जानलेवा साबित हो रही है।

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UN और राहत एजेंसियों की तारीफ़, इज़राइल को चेतावनी

मुस्लिम देशों ने संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों, खासकर UNRWA और अन्य अंतरराष्ट्रीय राहत संगठनों की तारीफ़ की, जो “बेहद कठिन और जटिल हालात” में भी ग़ज़ा में मदद पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। साथ ही, बयान में इज़राइल से स्पष्ट शब्दों में कहा गया कि वह ग़ज़ा और वेस्ट बैंक में UN और गैर-सरकारी संगठनों के काम में किसी भी तरह की रुकावट न डाले।

विदेश मंत्रियों ने चेताया कि राहत कार्यों को बाधित करने की किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

सीज़फायर, संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव और राजनीतिक समाधान की मांग

बयान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापक योजना के समर्थन की भी बात कही गई। मंत्रियों ने कहा कि उनका मकसद सीज़फायर को टिकाऊ बनाना, युद्ध को समाप्त करना और फ़िलिस्तीनियों के लिए सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करना है।

उन्होंने ज़ोर दिया कि मौजूदा हालात से बाहर निकलने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को फ़िलिस्तीनी आत्मनिर्णय और स्वतंत्र राज्य की दिशा में ठोस और विश्वसनीय रास्ता बनाना होगा।

सर्दी से बचाव के लिए तत्काल कदमों की अपील

मुस्लिम देशों ने मांग की कि ग़ज़ा में ‘अर्ली रिकवरी’ प्रयासों को तुरंत तेज़ किया जाए। टिकाऊ और गरिमापूर्ण शेल्टर की व्यवस्था की जाए, ताकि लोग ठंड और बारिश से बच सकें।

साथ ही, अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की गई कि वह इज़राइल पर दबाव बनाए ताकि टेंट, आश्रय सामग्री, दवाइयां, साफ पानी, ईंधन और स्वच्छता से जुड़ी मदद बिना किसी रुकावट के ग़ज़ा में दाख़िल हो सके।

रफ़ा क्रॉसिंग खोलने की मांग

संयुक्त बयान में ग़ज़ा में मानवीय सहायता की “तत्काल, पूर्ण और बिना रोक-टोक” आपूर्ति की मांग की गई। इसके साथ ही बुनियादी ढांचे और अस्पतालों की मरम्मत तथा रफ़ा क्रॉसिंग को दोनों दिशाओं में खोलने पर भी ज़ोर दिया गया।

सीज़फायर के बावजूद इज़राइली हमले जारी

इन कूटनीतिक अपीलों के बीच ज़मीनी हकीकत और भी डरावनी है। ग़ज़ा से आ रही रिपोर्टों के मुताबिक़, सीज़फायर के बावजूद इज़राइली हमले जारी हैं। उत्तरी ग़ज़ा में जबालिया कैंप के पूर्वी इलाक़ों पर तोपखाने से गोलाबारी की गई, जबकि दक्षिण में ख़ान यूनिस के पूर्वी हिस्सों में टैंकों से फायरिंग की खबरें हैं।

बताया जा रहा है कि यह हमले अक्टूबर में हुए सीज़फायर समझौते के बाद से लगातार हो रहे उल्लंघनों का हिस्सा हैं, जिनमें लगभग रोज़ाना सैन्य कार्रवाई देखी जा रही है।

तूफ़ान, बाढ़ और मौत

इसी दौरान एक “बेहद विनाशकारी” सर्दी के तूफ़ान ने ग़ज़ा के विस्थापन शिविरों को तबाह कर दिया। हज़ारों टेंट फट गए या पानी में डूब गए। राहत एजेंसियों का काम संकट के पैमाने के सामने नाकाफ़ी साबित हो रहा है।

बाढ़, ठंड और मदद की कमी के चलते कई फ़िलिस्तीनियों की मौत की खबरें सामने आई हैं, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं। यह हालात इस बात की गवाही दे रहे हैं कि ग़ज़ा में सिर्फ़ बम नहीं, बल्कि सर्दी, भूख और घेराबंदी भी जान ले रही है।

कुल मिलाकर, मुस्लिम देशों की यह सामूहिक आवाज़ एक सख़्त चेतावनी है—अगर ग़ज़ा में तुरंत और बिना शर्त मानवीय मदद नहीं पहुंची, तो यह संकट आने वाले दिनों में और भी भयावह रूप ले सकता है।

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