सिहोरा जिला बनाओ आंदोलन विस्फोटक मोड़ पर —स्लीमनाबाद उबल रहा, बहोरीबंद फटने को तैयार, कुण्डम–ढीमरखेड़ा तक फैली आग !

जबलपुर। संभाग के महत्वपूर्ण उपक्षेत्र सिहोरा को जिला बनाने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। कई वर्षों से चलती आ रही यह मांग अब व्यापक जनसमर्थन के साथ नए स्वरूप में उभर रही है। सिहोरा समेत स्लीमनाबाद, बहोरीबंद, कुण्डम, करेला और ढीमरखेड़ा क्षेत्र तक आंदोलन का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
पिछले एक सप्ताह में ही विभिन्न सामाजिक संगठनों, किसान इकाइयों, व्यापारिक संघों और जनप्रतिनिधियों ने बैठकें, रैलियां और ज्ञापन सौंपने की श्रृंखला तेज कर दी है। आंदोलन की ताज़ा गतिविधियों को देखते हुए प्रशासन भी सतर्क हो गया है और पुलिस-प्रशासन ने इलाके में निगरानी बढ़ा दी है।

क्यों बढ़ रही है मांग? क्षेत्रीय तर्क मजबूती से उठे
स्थानीय नेताओं और आंदोलनकर्ताओं का कहना है कि सिहोरा उपक्षेत्र भौगोलिक रूप से विशाल और प्रशासनिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां के ग्रामीणों को आज भी ज़मीन, राजस्व, स्वास्थ्य, पुलिस और विभागीय कार्यों के लिए जबलपुर तक 40–80 किमी का सफर तय करना पड़ता है।
उनका कहना है कि स्लीमनाबाद, बहोरीबंद, कुण्डम, करेला, ढीमरखेड़ा और पूर्वी क्षेत्रों को जोड़कर नया जिला बनाया जाए तो—
- सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचेगा
- ग्रामीण प्रशासन मजबूत होगा
- 50 से अधिक ग्राम पंचायतों को सीधा फायदा मिलेगा
- सड़क, स्वास्थ्य, पुलिस और शिक्षा व्यवस्था का विस्तार होगा
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिले का दर्जा मिल जाने से लंबे समय से उपेक्षित क्षेत्रों को विकास की नई रफ्तार मिलेगी।

स्लीमनाबाद में उभरा बड़ा मोर्चा, 14 दिसंबर को विशाल प्रदर्शन
स्लीमनाबाद में जिला मांग को लेकर वातावरण सबसे ज्यादा गर्म है। व्यापारियों, पंचायत प्रतिनिधियों, युवाओं और किसान इकाइयों ने संयुक्त बैठक कर आंदोलन का समर्थन किया है।
14 दिसंबर को स्लीमनाबाद में विशाल धरना-प्रदर्शन रखा गया है, जिसमें हजारों लोगों की मौजूदगी अनुमानित है।
ज्ञापन में साफ कहा गया है कि स्लीमनाबाद भौगोलिक रूप से केंद्रीय स्थान होने के कारण जिला मुख्यालय बनने की क्षमता रखता है।

बहोरीबंद में भी तगड़ा समर्थन, अधिकारियों को सौंपे गए ज्ञापन
बहोरीबंद में जनपद सदस्यों, सामाजिक संगठनों और किसान नेताओं ने तहसीलदार और एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर कहा कि क्षेत्र सभी प्रशासनिक और भौगोलिक मानकों को पूरा करता है।
यहां सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और पेयजल जैसी सुविधाओं का दायरा पहले से मजबूत है।
स्थानीय नेताओं के अनुसार, जिला बनने से—
- निवेश को बढ़ावा मिलेगा
- युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
- बुनियादी ढांचे में तेजी आएगी
कुण्डम–ढीमरखेड़ा में भी पंचायतों की बैठकें, चेतावनी दे चुके किसान संगठन
कुण्डम और ढीमरखेड़ा क्षेत्र में पंचायत प्रतिनिधियों ने बैठक कर जिला की मांग का समर्थन किया है।
किसान संगठनों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो वे सड़क पर उतरकर व्यापक आंदोलन शुरू करेंगे।
प्रशासन अलर्ट, पुलिस बल की तैनाती बढ़ी
आंदोलन के तेजी से फैलने के बाद प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में मॉनिटरिंग बढ़ा दी है।
पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती की गई है और अधिकारी लगातार स्थिति की समीक्षा बैठकों में जुटे हुए हैं।
स्थानीय प्रशासन का कहना है कि आंदोलन फिलहाल शांतिपूर्ण है, लेकिन भीड़ और रैलियों को देखते हुए एहतियाती कदम अनिवार्य हैं।
आखिर कब मिलेगा निर्णय?
लंबे समय से अटका प्रस्ताव, जनता में बढ़ी बेचैनी**
यद्यपि सिहोरा जिला बनाए जाने का मुद्दा कई बार शासन स्तर पर उठ चुका है, लेकिन अब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
इस बीच लगातार बढ़ता जनसमर्थन सरकार पर दबाव बढ़ा रहा है।
जनता का कहना है कि—
“अब सिर्फ आश्वासन नहीं, आदेश चाहिए।”
आने वाले दिनों में आंदोलन किस दिशा में जाएगा, यह सरकार के फैसले पर निर्भर करेगा, लेकिन इतना तय है कि सिहोरा जिला आंदोलन इस बार बड़े रूप में सामने आया है और थमने वाला नहीं दिख रहा।



