
जबलपुर। देशभर में ऑनलाइन दवा बिक्री और ई-फार्मेसी के विरोध में ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के आह्वान पर मंगलवार को देशव्यापी हड़ताल हुई, जिसका असर जबलपुर में भी स्पष्ट रूप से देखने को मिला। पूरे देश में करीब 12 लाख से अधिक मेडिकल स्टोर बंद रहे, जबकि जबलपुर में 1500 से अधिक दवा दुकानें दिनभर बंद रहीं। इस हड़ताल से आम मरीजों को दिनभर काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
🏥 क्यों हुई यह हड़ताल?
केमिस्ट और ड्रगिस्ट संगठनों का कहना है कि ई-फार्मेसी और ऑनलाइन दवा बिक्री प्लेटफॉर्म बिना उचित जांच-पड़ताल के और पुराने या फर्जी प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर दवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। इससे न केवल गलत दवा सेवन का खतरा बढ़ रहा है, बल्कि दवाओं के दुरुपयोग की आशंका भी गंभीर रूप से बढ़ गई है।

उनका तर्क है कि एक पारंपरिक मेडिकल स्टोर पर दवा देने से पहले लाइसेंसी फार्मासिस्ट पूरी जांच करता है, जबकि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म इस प्रक्रिया को पूरी तरह नजरअंदाज कर रहे हैं। इससे जन स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
💊 मध्यप्रदेश केमिस्ट एसोसिएशन ने दिया समर्थन
मध्यप्रदेश केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने भी AIOCD की इस देशव्यापी हड़ताल को अपना पूर्ण समर्थन दिया। संगठन ने कहा कि सरकार को ऑनलाइन दवा बिक्री पर कड़े नियम लागू करने चाहिए और बिना लाइसेंस व उचित प्रक्रिया के दवाओं की बिक्री को तत्काल रोका जाना चाहिए।

एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि ई-फार्मेसी के कारण स्थानीय मेडिकल स्टोर व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और लाखों छोटे दुकानदारों की रोजी-रोटी खतरे में है।
⚠️ ऑनलाइन दवा बिक्री पर उठे गंभीर सवाल
केमिस्ट संगठनों ने ऑनलाइन दवा बिक्री पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं:
🔴 नशीली और प्रतिबंधित दवाओं की ऑनलाइन बिक्री का खतरा
🔴 बिना फार्मासिस्ट की सलाह के दवाएं देना खतरनाक
🔴 एक्सपायर्ड दवाओं की बिक्री का जोखिम
🔴 स्थानीय मेडिकल स्टोर को भारी आर्थिक नुकसान
🏨 अस्पताल की दुकानें रहीं खुली — जरूरी सेवाएं जारी
हड़ताल के बावजूद अस्पतालों के अंदर संचालित दवा दुकानों को हड़ताल से बाहर रखा गया है, जिससे भर्ती मरीजों और आपात स्थिति में लोगों को दवाएं मिलती रहीं। इसके अलावा जिला प्रशासन ने भी व्यवस्था की कि:
✅ अमृत फार्मेसी सेवारत रहीं
✅ सरकारी अस्पतालों के मेडिकल स्टोर खुले रहे
✅ आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए
😟 आम मरीजों को हुई परेशानी
दिनभर बाजार में दवाओं की दुकानें बंद रहने से आम लोगों, खासकर बुजुर्गों और गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कई लोगों को दवाओं के लिए घंटों दर-दर भटकना पड़ा। सरकारी अस्पतालों में भीड़ सामान्य से अधिक रही।
शहर के विभिन्न बाजारों में मेडिकल स्टोरों के बंद शटर देखे गए। कुछ दुकानों पर हड़ताल के समर्थन में बैनर और पोस्टर भी लगाए गए थे, जिनमें ई-फार्मेसी के खिलाफ नारे लिखे थे।
📢 केमिस्ट संगठनों की प्रमुख मांगें
📌 ऑनलाइन दवा बिक्री के लिए कड़े नियम बनाए जाएं
📌 केवल लाइसेंसी प्लेटफॉर्म को ही ऑनलाइन बिक्री की अनुमति हो
📌 डॉक्टर के वैध प्रिस्क्रिप्शन के बिना कोई दवा न मिले
📌 स्थानीय मेडिकल स्टोर की रक्षा के लिए सरकार नीति बनाए
🏛️ सरकार से मांग — ठोस कानून लाए
केमिस्ट संगठनों ने केंद्र सरकार और राज्य सरकार से मांग की है कि ई-फार्मेसी को विनियमित करने के लिए तत्काल कानून बनाया जाए। उन्होंने कहा कि अगर जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आगे और भी बड़े आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
📌 संक्षेप में
कौन: AIOCD (ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स)
क्यों: ई-फार्मेसी और ऑनलाइन दवा बिक्री का विरोध
कहां: पूरे देश में — जबलपुर में 1500+ दुकानें बंद
देशभर में: 12 लाख से अधिक मेडिकल स्टोर बंद
खुली रहीं: अस्पतालों की दुकानें, जन औषधि केंद्र, सरकारी फार्मेसी
— रिपोर्ट: BazMedia.in, जबलपुर | दिनांक: 20 मई 2026



