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जमीयत प्रमुख अरशद मदनी ने गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित करने की मांग की — कहा, मॉब लिंचिंग और नफरत की राजनीति हमेशा के लिए खत्म होगी

नई दिल्ली। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने एक बड़ा और चर्चित बयान देते हुए गाय को भारत का ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित करने की मांग की है। उनका कहना है कि इस एक कदम से देश में मॉब लिंचिंग, सांप्रदायिक घृणा और धर्म की आड़ में होने वाली राजनीति को हमेशा के लिए खत्म किया जा सकता है। सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में मदनी ने सरकार पर यह भी सवाल उठाया कि वह इस फैसले को लेने से क्यों रोक रही है।


🐄 मदनी का तर्क — जब देश मानती है गाय को माँ, तो राष्ट्रीय पशु क्यों नहीं?

मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि देश की बहुसंख्यक जनता गाय को न केवल पवित्र मानती है बल्कि उसे माँ का दर्जा भी देती है। ऐसे में सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि वह गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने से क्यों परहेज कर रही है।

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उन्होंने कहा कि अगर गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने से इस मुद्दे का स्थायी समाधान निकलता है और किसी की जान नहीं जाती तथा धर्म का राजनीतिक इस्तेमाल बंद होता है, तो जमीयत उलेमा-ए-हिंद ऐसे फैसले का स्वागत करेगी।

🗣️ मदनी का बयान (सारांश में):
“देश के अधिकांश लोग गाय को पवित्र मानते हैं और उसे माँ का दर्जा देते हैं। यह समझना मुश्किल है कि कौन सी राजनीतिक मजबूरी सरकार को गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित करने से रोक रही है। अगर इससे इस विवाद का स्थायी हल निकले, कोई जान न जाए और धर्म का राजनीतिक दुरुपयोग बंद हो — तो हम ऐसे फैसले का स्वागत करेंगे।”

⚖️ बीफ कानूनों पर दोहरे मानदंड का सवाल

मदनी ने देश में बीफ को लेकर जारी दोहरे मानदंड (double standards) पर भी तीखा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों में बीफ की खुलेआम बिक्री होती है और वहां न कोई विरोध होता है, न लिंचिंग की घटनाएं। लेकिन जहां मुसलमानों की आबादी अधिक है, वहां गाय के नाम पर खून बहाया जाता है।

उन्होंने इसे भक्ति नहीं बल्कि राजनीतिक खेल करार दिया।

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⚠️ मदनी की आपत्ति के प्रमुख बिंदु:
🔴 कुछ राज्यों में बीफ खुलेआम बिकता है — न विरोध, न लिंचिंग
🔴 मुस्लिम बहुल इलाकों में गाय के नाम पर हिंसा
🔴 सत्तारूढ़ दल के नेता भी कुछ राज्यों में बीफ खाने की बात स्वीकार करते हैं
🔴 यह भक्ति नहीं — यह दोहरा मानदंड और राजनीतिक खेल है

📜 ‘एक देश, एक कानून’ की मांग — पशु वध कानूनों में भी एकरूपता हो

मदनी ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) की बहस के संदर्भ में भी अहम सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अगर ‘एक देश, एक कानून’ की बात की जा रही है, तो पशु वध से जुड़े कानून भी देशभर में समान रूप से लागू होने चाहिए। अभी जो स्थिति है उसमें अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नियम हैं, जो असमानता पैदा करते हैं।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि जमीयत केवल यह चाहती है कि गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा दिया जाए और इस विवाद को हमेशा के लिए समाप्त किया जाए — लेकिन बिना किसी भेदभाव के, पूरे देश में एकसमान कानून के साथ।


🏛️ मदनी का बयान — राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्यों?

जमीयत उलेमा-ए-हिंद भारत के सबसे बड़े और प्रभावशाली मुस्लिम संगठनों में से एक है। मौलाना अरशद मदनी का यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि:

📌 यह पहली बार है जब किसी प्रमुख मुस्लिम धार्मिक नेता ने गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित करने की मांग का समर्थन किया है
📌 इस बयान ने मॉब लिंचिंग को सांप्रदायिक नहीं बल्कि राजनीतिक मुद्दा बताया
📌 बीफ कानूनों में दोहरे मानदंड को उजागर किया
📌 ‘एक देश, एक कानून’ की बहस को नया आयाम दिया

📌 बयान का सारांश:
🗣️ किसने कहा: मौलाना अरशद मदनी, अध्यक्ष — जमीयत उलेमा-ए-हिंद
📅 कब: 20 मई 2026
💬 मांग: गाय को भारत का ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित किया जाए
🎯 उद्देश्य: मॉब लिंचिंग, सांप्रदायिक हिंसा और धर्म की राजनीति का स्थायी अंत
⚖️ शर्त: कानून पूरे देश में समान रूप से लागू हो — बिना किसी भेदभाव के

— रिपोर्ट: BazMedia.in | दिनांक: 20 मई 2026

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बाज़ मीडिया जबलपुर डेस्क 'जबलपुर बाज़' आपको जबलपुर से जुडी हर ज़रूरी खबर पहुँचाने के लिए समर्पित है.
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