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भोपाल — बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी का नाम बदलने की कोशिश, SFI-SIO ने जताया विरोध

भोपाल | 14 May 2025 | BAZ Media Bhopal Division | BAZ Desk | Bazmedia.in

News in Short

  • बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी का नाम बदलकर वगदेवी भोजपाल यूनिवर्सिटी करने का प्रस्ताव
  • SFI और SIO ने इसे आज़ादी की लड़ाई में मुस्लिम योगदान मिटाने की कोशिश बताया
  • 1988 से यूनिवर्सिटी का नाम मौलाना बरकतुल्लाह भोपाली के नाम पर था

भोपाल की बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी का नाम बदलने के प्रस्ताव को लेकर हंगामा खड़ा हो गया है। स्टूडेंट्स फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया (SFI) और स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया (SIO) ने इस फ़ैसले का ज़ोरदार विरोध किया है। यूनिवर्सिटी की एग्ज़ीक्यूटिव काउंसिल ने इसका नाम बदलकर “वगदेवी भोजपाल यूनिवर्सिटी” रखने का प्रस्ताव पास किया है। प्रस्ताव मंज़ूरी के लिए आगे भेजा जा चुका है।

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बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी — 1988 से यही नाम

SFI ने अपने बयान में कहा कि यह प्रस्ताव तारीख़ को बदलने और सांप्रदायिकता फैलाने की बड़ी साज़िश का हिस्सा है। यूनिवर्सिटी का नाम 1988 से मौलाना बरकतुल्लाह भोपाली के नाम पर रखा गया था, जिन्होंने अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ ग़दर आंदोलन में अहम रोल निभाया था। लेफ़्टिस्ट ग्रुप ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार बुनियादी ढांचे, स्टाफ़ की सैलरी में देरी और स्टूडेंट्स की परेशानियों को नज़रअंदाज़ कर रही है। बजाय इसके सिर्फ़ इमारतों और यूनिवर्सिटीज़ के नाम बदलने में लगी हुई है।

SIO ने कहा — मुस्लिम आज़ादी के नायकों को मिटाने की कोशिश

SIO मध्य प्रदेश वेस्ट ने इसे मुस्लिम फ़्रीडम फ़ाइटर्स की यादों को मिटाने की “खुली साज़िश” करार दिया। संगठन ने कहा कि यह फ़ैसला एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस को भगवाकरण और राजनीतिक मक़सद से तारीख़ को बदलने की कोशिश है। SIO ने कहा कि यूनिवर्सिटी का नाम बरकतुल्लाह के बलिदान और आज़ादी की लड़ाई में योगदान की सही पहचान है। उनका नाम हटाना सिर्फ़ एडमिनिस्ट्रेटिव फ़ैसला नहीं बल्कि उनकी विरासत पर हमला है।

कौन थे मौलाना बरकतुल्लाह भोपाली?

मौलाना बरकतुल्लाह भोपाली अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ आज़ादी की लड़ाई के सबसे मज़बूत नामों में से एक थे। भोपाल में पैदा हुए बरकतुल्लाह ने अपनी ज़िंदगी का बड़ा हिस्सा विदेश में बिताया। जापान, अमेरिका, जर्मनी और अफ़ग़ानिस्तान में उन्होंने क्रांतिकारी नेटवर्क बनाए। 1915 में काबुल में राजा महेंद्र प्रताप की अगुवाई में बनी प्रोविज़नल गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया में वो प्रधानमंत्री बने थे। यह भारत की पहली निर्वासित सरकार थी। अपनी तक़रीरों और लेखों से बरकतुल्लाह ने अंग्रेज़ी हुकूमत के ख़िलाफ़ दुनियाभर में माहौल बनाया।

SFI और SIO दोनों ने मांग की है कि यह प्रस्ताव तुरंत वापस लिया जाए। दोनों संगठनों ने कहा कि ऐसे फ़ैसलों से समाज में बंटवारा बढ़ता है, जबकि यूनिवर्सिटीज़ को पढ़ाई, रिसर्च और बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान देना चाहिए। इतिहास को राजनीति की भेंट चढ़ाना किसी भी सूरत में जायज़ नहीं।

📌 Sources & References

  • Maktoob Media
  • SFI Statement
  • SIO Madhya Pradesh West

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