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War Update: अमेरिका-इज़राइल की ईरान पर जंग: 100 दिन में 7,000 मौतें, 146 देशों में पेट्रोल महंगा

वाशिंगटन | 07 जून 2026 | BAZ News Network (BNN) | BAZ Desk | Bazmedia.in

News in Short

  • अमेरिका-इज़राइल की ईरान पर जंग के 100 दिन पूरे, कम से कम 7,000 मौतें दर्ज
  • होर्मुज़ जलडमरूमध्य से रोज़ाना 7 जहाज़ — जंग से पहले 100 गुज़रते थे
  • 146 देशों में पेट्रोल की कीमतें बढ़ीं, एशिया सबसे ज़्यादा प्रभावित

अमेरिका-इज़राइल की ईरान पर जंग को 100 दिन हो गए। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि यह “बहुत जल्दी” खत्म होगी। लेकिन 8 अप्रैल को संघर्षविराम के बावजूद होर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद है, छिटपुट गोलीबारी जारी है और बातचीत बार-बार टूट चुकी है। अल जज़ीरा की रिपोर्ट के मुताबिक़, जंग में अब तक कम से कम 7,000 लोग मारे जा चुके हैं।

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लेबनान में ईरान से ज़्यादा मौतें

प्रारंभिक आंकड़ों में लेबनान में कम से कम 3,593, ईरान में 3,468 और खाड़ी देशों में 29 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। ईरानी हमलों में 26 इज़राइली और 13 अमेरिकी सैनिक भी मारे गए। हालात बदलने के साथ ये आंकड़े बढ़ सकते हैं। लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने इज़राइली आक्रमण को “झुलसी धरती की नीति और सामूहिक सज़ा” बताया।

17 अप्रैल को अलग संघर्षविराम के बावजूद इज़राइल लेबनान के दक्षिण में बमबारी जारी रखे हुए है। 10 लाख से ज़्यादा लेबनानी लोग विस्थापित हो चुके हैं। 1 जून तक इज़राइली सेना नबतीह शहर के बाहरी इलाके तक पहुंच गई थी। बोफोर्ट किले पर कब्ज़ा करके उसने 25 साल में लेबनान में सबसे गहरी घुसपैठ की। अब इज़राइली सेना लेबनान के लगभग पांचवें हिस्से — 2,000 वर्ग किलोमीटर — पर कब्ज़ा जमाए है।

होर्मुज़ जलडमरूमध्य से सिर्फ 7 जहाज़

जंग की शुरुआत से होर्मुज़ जलडमरूमध्य में सैकड़ों जहाज़ फंसे हैं। यह वह रणनीतिक जलमार्ग है जिससे दुनिया के पांचवें हिस्से का तेल और गैस गुज़रता था। शिप-ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक़, 28 फरवरी से 31 मई के बीच करीब 607 जहाज़ यहां से गुज़रे — रोज़ाना औसतन सात। जंग से पहले रोज़ाना लगभग 100 जहाज़ यहां से गुज़रते थे।

जलडमरूमध्य बंद होने से वैश्विक तेल भंडार रिकॉर्ड रफ्तार से खाली हुए। अमेरिका ने अप्रैल के मध्य से ईरानी बंदरगाहों की अपनी नाकेबंदी भी लगा रखी है। टैंकर फंसे होने से यात्रा की दूरी बढ़ी, मुख्य मार्गों पर जहाज़ों की उपलब्धता कम हुई और माल ढुलाई की दरें बढ़ीं।

146 देशों में पेट्रोल महंगा

ऊर्जा बाज़ार इस जंग से हिल गए। पिछले तीन महीनों में तेल की कीमतें लगभग दोगुनी हो गईं। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने इस बाधा को रिकॉर्ड पर सबसे बड़ा ऊर्जा झटका बताया। जंग से पहले ब्रेंट क्रूड — तेल कीमतों का वैश्विक मानक — लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल था। जंग के एक हफ्ते बाद कीमतें 2022 के बाद पहली बार 100 डॉलर पार हुईं। अंततः कीमतें लगभग 120 डॉलर पर पहुंच गईं। अब वे फिर से 100 डॉलर के आसपास स्थिर हैं।

इन कीमतों में उछाल का एक बड़ा कारण राष्ट्रपति ट्रंप की सोशल मीडिया गतिविधि भी रही। ट्रुथ सोशल पर उनकी पोस्ट अक्सर तेल फ्यूचर्स में अरबों डॉलर की उथल-पुथल का कारण बनीं। अल जज़ीरा की गिनती के मुताबिक़ कम से कम 146 देशों ने फरवरी के अंत से पेट्रोल की कीमतें बढ़ाईं।

एशियाई देश सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए हैं। ये अपने तेल का 60 फ़ीसदी खाड़ी से आयात करते हैं। म्यांमार में पेट्रोल की कीमत जंग के पहले तीन महीनों में 90 फ़ीसदी से ज़्यादा बढ़ी। 30 लाख से ज़्यादा ईरानी भी जंग के पहले दो हफ्तों में विस्थापित हुए।

📌 Sources & References

  • Al Jazeera
  • International Energy Agency (IEA)

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