Jabalpur

जामिया में भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों से मारपीट, रात में धावा बोल दिया

नई दिल्ली | BAZ News Network (BNN) । जामिया मिलिया इस्लामिया में भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों पर सुबह-सुबह सिक्योरिटी गार्ड्स ने धावा बोल दिया। छह दिन से धरने पर बैठे तीन छात्रों को बेरहमी से पीटा गया। उनके बिस्तर और तिरपाल फाड़ दिए गए। विश्वविद्यालय ने एक छात्र को एक साल के लिए निकाल दिया और दूसरे पर 6 महीने की पाबंदी लगा दी। इसके बावजूद छात्रों ने फिर से एंट्री कर धरना स्थल घेर लिया।

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News in Short

  • सुबह 5 बजे प्रॉक्टर और सिक्योरिटी गार्ड्स ने हमला किया
  • भूख हड़ताली एबिन बासिल को पेट में लात मारी गई
  • एबिन को एक साल के लिए रस्टिकेट किया, जासिम पर 6 महीने की पाबंदी
  • छात्रों की मांग — स्टूडेंट्स यूनियन बहाल हो
  • गेट 7 के बाहर लाइब्रेरी भी बंद कर दी गई

सुबह 5 बजे धावा बोला, जामिया छात्र हड़ताल पर बैठों को पीटा

भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों ने आरोप लगाया कि सुबह करीब 5 बजे प्रॉक्टर, सिक्योरिटी एडवाइजर और कई गार्ड्स घालिब लॉन पहुंचे। पहले बिस्तर फाड़े। फिर धक्के मारे। छात्रों की धुनाई कर दी। प्लेन कपड़ों में दिल्ली पुलिस के जवान भी मौके पर थे।

“जामिया की सिक्योरिटी ने हमें बेरहमी से पीटा। प्रॉक्टोरियल टीम और सिक्योरिटी एडवाइजर के आदेश पर यह सब हुआ,” छह दिन से भूख हड़ताल पर बैठे एबिन बासिल ने बताया। एबिन NSUI के सेक्रेटरी हैं। “मुझे पेट में लात मारी गई। कई छात्र घायल हो गए,” उन्होंने आरोप लगाया।

एबिन के साथ इंटरनेशनल स्टडीज के पोस्टग्रेजुएट छात्र जासिम खान और जेंडर स्टडीज के फर्स्ट ईयर छात्र फैज़ान अली खान भी भूख हड़ताल पर बैठे हैं।

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एक निकाला, एक पर पाबंदी — लेकिन हड़ताल जारी

विश्वविद्यालय प्रशासन ने 16 अक्टूबर को एबिन बासिल को BA LLB कोर्स से एक साल के लिए रस्टिकेट कर दिया। आरोप लगाया गया कि उन्होंने अनधिकृत जमावड़ा किया, यूनिवर्सिटी अधिकारियों से बदतमीजी की और कैंपस की घटनाओं को लेकर “भ्रामक जानकारी” फैलाई।

जासिम खान पर 6 महीने की कैंपस बैन लगाई गई। आरोप — 12 अक्टूबर को गेट नंबर 18 से जबरन घुसने की कोशिश की, अनधिकृत जमावड़ा किया और 15 अक्टूबर को CCTV कैमरा लगाने वाले टेक्निकल स्टाफ को रोका।

इसके बावजूद एबिन ने कहा, “मैं तब तक भूख हड़ताल जारी रखूंगा जब तक स्टूडेंट्स यूनियन बहाल नहीं हो जाती। यह हमारा बुनियादी हक है। मैं पीछे नहीं हटूंगा।”

“हमें अपराधी की तरह ट्रीट कर रहे हैं”

NSUI के प्रेसिडेंट फैज़ान अली खान ने कहा, “पुलिस यूनिवर्सिटी के बाहर खड़ी है। सड़कों पर भी हमें पीटा जा रहा है। जामिया हम पर जुल्म कर रही है। वो हमें अपराधी की तरह ट्रीट कर रहे हैं जबकि हम सिर्फ अपनी जायज़ मांग के लिए प्रोटेस्ट कर रहे हैं।”

PhD स्कॉलर और फ्रैटरनिटी मूवमेंट के नेशनल जनरल सेक्रेटरी लुबैब मोहम्मद बशीर को भी नोटिस मिला। उन्हें घालिब लॉन खाली करने के आदेश दिए गए। चेतावनी दी गई कि ऐसा न करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।

लाइब्रेरी बंद, छात्र घंटों गेट पर इंतजार में

एक छात्रा ने बताया कि प्रशासन ने लाइब्रेरी भी बंद कर दी। “हम गेट नंबर 7 के बाहर घंटों से इंतजार कर रहे हैं। कोई नोटिफिकेशन भी नहीं मिला। हम दूर से आए हैं लेकिन लाइब्रेरी खोल ही नहीं रहे।”

छात्रों ने गेट नंबर 7 के बाहर प्रदर्शन किया। कई प्लेकार्ड्स में वाइस-चांसलर प्रो. मजहर आसिफ को RSS की वर्दी में दिखाया गया और “Shame” लिखा हुआ था।

छात्रों की मांग — हमला की जांच, घायलों को मदद, डायलॉग शुरू हो

प्रदर्शनकारियों ने मांग की — हमले की निष्पक्ष जांच हो, सभी घायल छात्रों को मेडिकल मदद मिले, हिरासत में लिए गए छात्रों को रिहा किया जाए। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो। प्रोटेस्ट करने के लोकतांत्रिक अधिकार पर डराना-धमकाना बंद हो। प्रशासन के साथ सार्थक डायलॉग हो और स्टूडेंट यूनियन बहाल करने की मांग पर ठोस जवाब मिले।

कई छात्रों को हिरासत में लिया गया था जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया। पुलिस की हिरासत और प्रशासन की चेतावनी के बावजूद छात्र फिर से कैंपस में घुसे और धरना स्थल पर पहुंच गए।

12 अक्टूबर से जारी है यह विरोध प्रदर्शन। छात्रों की एक ही मांग — जामिया में स्टूडेंट्स यूनियन बहाल हो। लेकिन प्रशासन की कार्रवाई से साफ है कि विश्वविद्यालय छात्रों की आवाज़ दबाने पर तुला है। हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं।

📌 Sources & References

  • Maktoob Media
  • छात्रों के बयान

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