मुरादाबाद: मुस्तफा मस्जिद पर बुलडोजर की तलवार, हाईकोर्ट में मिली राहत

मुरादाबाद | BAZ Media Bhopal Division । मुस्तफा मस्जिद पर बुलडोजर की तलवार लटक गई थी। लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राहत दी। मुरादाबाद डेवलपमेंट अथॉरिटी (MDA) ने कोर्ट में आश्वासन दिया कि फॉर्मल डेमोलिशन ऑर्डर पास होने से पहले मस्जिद नहीं तोड़ी जाएगी।
News in Short
- पाकबारा इलाके की मुस्तफा मस्जिद को 21 अगस्त को शो-कॉज नोटिस मिला था
- MDA ने मस्जिद को अवैध करार देते हुए 3 सितंबर तक जवाब मांगा था
- जमीयत उलमा-ए-हिंद की मदद से मस्जिद मुंतजिमा कमेटी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की
- सीनियर एडवोकेट शशि नंदन ने दलील दी कि नोटिस में पर्याप्त समय नहीं दिया गया
- अगली सुनवाई 28 सितंबर को तय हुई है
मुस्तफा मस्जिद मुरादाबाद को मिला शो-कॉज नोटिस
मुरादाबाद के पाकबारा इलाके में TMU यूनिवर्सिटी के पास स्थित मुस्तफा मस्जिद कई दशक पुरानी है। लेकिन MDA के डेजिगनेटेड ऑफिसर ने 21 अगस्त को मस्जिद के मैनेजर को नोटिस थमा दिया। नोटिस में कहा गया कि करीब 300 वर्ग मीटर में बनी मस्जिद के लिए कोई मंजूरी का कागज नहीं है। यूपी अर्बन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट 1973 की धारा 27 के तहत कार्रवाई की गई।
नोटिस में दावा किया गया कि 20 अगस्त को अवैध निर्माण शुरू हुआ था। जबकि मस्जिद कई साल पुरानी है। मैनेजर को 3 सितंबर दोपहर 1 बजे तक जवाब देने को कहा गया था। बताना था कि मस्जिद को अवैध मानकर क्यों न तोड़ा जाए।
हाईकोर्ट में जमीयत उलमा-ए-हिंद की मदद
मस्जिद की मुंतजिमा कमेटी की ओर से जीशान अहमद फरीद ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी के निर्देश पर संगठन ने कानूनी मदद मुहैया कराई। सीनियर एडवोकेट शशि नंदन और एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड आदित्य परिहार ने पैरवी की। एडवोकेट मोहम्मद ताहिर हकीम और मुहम्मद निजाम पाशा भी साथ थे।
24 सितंबर को सुनवाई हुई। शशि नंदन ने दलील दी कि 21 अगस्त के नोटिस में सिर्फ 12 दिन का समय दिया गया। जबकि जवाब देने के लिए कम से कम 15 दिन मिलने चाहिए थे। उन्होंने कहा कि नोटिस में साफ तौर पर बताया नहीं गया कि कौन सी जमीन और कितना हिस्सा तोड़ा जाना है। दस्तावेज मांगने के लिए अर्जी भी दी गई थी।
MDA ने दिया डेमोलिशन न करने का आश्वासन
MDA की ओर से सीनियर एडवोकेट एम.सी. चतुर्वेदी ने एक हफ्ते का वक्त मांगा। उन्होंने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि डेमोलिशन ऑर्डर पास होने से पहले मस्जिद नहीं तोड़ी जाएगी। जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस कुनाल रवि सिंह की बेंच ने सुनवाई की। अगली सुनवाई 28 सितंबर को तय हुई है।
गौरतलब है कि 7 जुलाई को मुरादाबाद प्रशासन ने TMU के पास बाबा फौलाद शाह की दरगाह को बुलडोजर से तोड़ दिया था। दावा किया गया था कि दरगाह तालाब की जमीन पर अवैध तरीके से बनाई गई थी।
मुस्तफा मस्जिद की तरफ से दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने राहत दी है। अब देखना होगा कि 28 सितंबर की सुनवाई में क्या फैसला आता है। मुरादाबाब में बुलडोजर की कार्रवाइयों को लेकर मुस्लिम समुदाय में चिंता बढ़ी हुई है।
📌 Sources & References
- Maktoob Media
- Jamiat Ulama-i-Hind



